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Bhupesh Baghel News: क्या प्रभारी पर्यवेक्षक भूपेश बघेल हैं उप्र में कांग्रेस की दुर्दशा की असली वजह?

Bhupesh Baghel News: क्या प्रभारी पर्यवेक्षक भूपेश बघेल हैं उप्र में कांग्रेस की दुर्दशा की असली वजह?
विजया पाठक, एडिटर, जगत विजन
Bhupesh Baghel News: उत्तरप्रदेश में कांग्रेस का प्रदर्शन इस बार चुनावी इतिहास का सबसे खराब प्रदर्शन रहा। इस प्रदर्शन की किसी ने भी उम्मीद नही की थी। यह बात तो तय थी कि कांग्रेस अच्छी स्थिति में नही है, लेकिन परिणाम इतने खराब आएंगे, सोचा नही था। राज्य में खराब प्रदर्शन के लिए छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। क्योंकि पार्टी ने बघेल को चुनाव का प्रभारी पर्यवेक्षक बनाया था। बघेल ने प्रदेश की कुल 42 विधानसभा क्षेत्रों में चुनाव प्रचार किया। जिसमें से 41 जगहों पर पार्टी बुरी तरह हारी, जिस 01 सीट पर जीती वो भी प्रमोद तिवारी परिवार की पारम्परिक सीट रही है। पार्टी कहीं पर तीसरे तो कहीं चौथे स्थान पर रही। वोट प्रतिशत केवल 2.33 पर आ गया। 2017 के विधानसभा चुनान में कांग्रेस पार्टी को 6.25 प्रतिशत वोट मिले थे। 1991 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को 46 सीटें, 1996 में 33 सीटें, 2002 में 25 सीटें, 2007 में 22 सीटें, 2012 में 28 सीटें और 2017 के पिछले चुनाव में पार्टी को मात्र 07 सीटों से संतोष करना पड़ा था। इस बार पार्टी तो महज दो सीटों पर सिमट कर रह गई है। छत्तीसगढ़ के जिन नेताओं को वहां प्रचार और उम्मीदवारों को जिताने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी, वे पार्टी की उम्मीदों पर खरे नहीं उतरे। सूत्र बताते हैं कि जिन नेताओं को उत्तरप्रदेश चुनाव प्रचार के लिए भेजा गया था वे नेता होटल से बाहर ही नहीं निकले और अगर निकले भी तो नेता हंसी ठिठोली और तफरीह करते नजर आए। कांग्रेस आलाकमान को ऐसे नेताओं से सावधान रहने और सबक लेने की जरूरत है। ताकि देश और प्रदेश में पार्टी की साख और गिरते हुए लोकप्रियता पर असर न पड़े। वहीं भूपेश बघेल के पिता नंदकुमार बघेल के ब्राम्हण विरोधी बयान से भी इस बार के चुनाव में ब्राम्हण वोटर कटे हैं।
बघेल के सलाहकार विनोद वर्मा करते थे रायपुर से लखनउ अपडाउन
सूत्रों के मुताबिक इस बार कांग्रेस ने चुनाव में करीब 3000 करोड़ खर्च किए। यह पैसा चुनाव प्रभारी ने छत्तीसगढ़ से दिए। अब देखा जाए तो इस चुनाव में भूपेश बघेल और उनकी टीम ने इतनी जबरदस्त फिजूलखर्ची की जिसे आजतक कभी देखा नहीं गया। दरअसल इस चुनाव के माध्यम से भूपेश बघेल ने जो चाहा था वो हासिल कर लिया। अपने आप की पब्लिसिटी में करोडों रूपए फूंक दिए। कई जगहों पर देखने को आया कि इनको प्रियंका गांधी से ज्यादा मीडिया बाइट्स मिली। अपने आप को कांग्रेस का बड़ा चेहरा बनाने में वो कामयाब रहे, साथ ही गांधी परिवार के वो काफी नज़दीक आ गये। उनके इस खेल को कांग्रेस आलाकमान नहीं समझ पाई। उत्तरप्रदेश में पैसों की कितनी बर्बादी हुई है, इसका अंदाजा इस बात से ही लगाया जा सकता है कि सीएम भूपेश बघेल के सलाहकार विनोद वर्मा हवाई जहाज से रायपुर से लखनउ और लखनउ से रायपुर अपडाउन करते रहे। इसके टीम पूरे समय महंगी होटल में बने रहे, इसमें करोड़ों रूपये तो किराये में ही खर्च कर दिये। हम अंदाजा लगा सकते हैं कि बघेल ने इस चुनाव में राज्य का कितना पैसा बर्बाद किया है। स्वाभाविक है कि बर्बादी का यह सब पैसा छत्तीसगढ़ का ही था। चुनाव प्रचार के नाम पर बघेल ने अरबों रूपये की लूटपाट मचायी। इसके साथ ही दो बार करीब-करीब 30-30 छत्तीसगढ़ शासन के स्पेशल ब्रांच के पुलिसकर्मियों को 01 महीने में दो बार उत्तरप्रदेश की हर सीट का जायजा लेने भेजा, आखिर यह असंवैधानिक काम से प्रदेश के शासन तंत्र को शर्मिंदगी उठानी पडी है। इस मामले की जांच होनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई भी होनी चाहिए।
प्रियंका गांधी के मेहनत पर भूपेश ने पानी फेरा
प्रियंका गाँधी स्वयं उत्तरप्रदेश में चुनाव के शुरुआती दौर में ही ''लड़की हूं लड़ सकती हूं'' के नारे लेकर चुनाव मैदान में जोश और खरोश के साथ उतरी थीं। साथ ही महिलाओं के लिए सीटों के आरक्षण में कोई कमी नहीं की थी। 44% सीटें महिलाओं को दी थी। जिस प्रकार प्रियंका गाँधी ने उत्तरप्रदेश में जी तोड़ मेहनत की थी। उसके बाद ऐसा परिणाम आना निश्चित तौर पर बाहर से आकर कमान संभाल रहे नेताओं के कारण लगता है। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल भी उत्तरप्रदेश के प्रभारी और वरिष्ठ पर्यवेक्षक थे और खुद उन्होंने कई दौरे कर चुके थे। यह वही बड़बोले प्रभारी नेता हैं जो उत्तराखंड में कांग्रेस विधायकों एयर-लिफ्ट करने गए थे। वास्तव में इनका ध्यान सिर्फ और सिर्फ आलाकमान की नजरों में बने रहने का था। चुनाव नतीजे के बाद कांग्रेस हाईकमान को भूपेश बघेल से तौबा करना होगा। परिणामों में साफ दिखा कि भूपेश बघेल अभी भी उन नेताओं में शुमार नहीं हो पाये हैं जो चुनावों में अपना प्रभाव डाल सकें। बघेल ने बडे पैमाने पर चुनावी खर्च जो सीधे उम्मीदवारों को देना था पर वो भी खुद डकार गये। इससे काफी सीटें कांग्रेस उत्तरप्रदेश में हारी। इन सब परिस्थितियों का आंकलन करने के बाद यही लगता है कि कांग्रेस आलाकमान ने गलत लोगों पर भरोसा कर जवाबदारी दी थी। प्रियंका गाँधी ने जिस प्रकार महिलाओं को आगे बढ़ाते हुए मनोवैज्ञानिक इंप्रेशन जमाने का दांव खेल दिया था। वह सटीक था लेकिन इस नवेले राष्ट्रीय नेता ने प्रियंका गांधी की सब मेहनत पर पानी फेर दिया। उत्तरप्रदेश के कांग्रेस नेताओं ने यह भी कहा कि साथ ही एक बड़ी गलती या चूक कांग्रेस आलाकमान ने यह भी कर दी कि पार्टी के पुराने वरिष्ठ अनुभव वाले नेता बड़े और पुराने नेताओं का उपयोग नहीं किया गया, जिसके कारण भी चुनाव परिणाम प्रभावित हुआ। नए नवेले कांग्रेस नेता के साथ में भी ऐसी ही विडम्बना चरितार्थ हुई।
पीएल पुनिया का लड़का तनुज पुनिया चौथे नंबर पर
भारतीय जनता पार्टी की हुई इस जीत के बाद कांग्रेस के बड़े नेता छत्तीसगढ़ के प्रभारी पीएल पुनिया के लड़के तनुज पुनिया भी चुनाव हार गए और वो अपने चुनाव क्षेत्र में चौथे नंबर पर आये। ज्ञात रहे कि इससे पहले भी तीन विधानसभा चुनाव हार चुके हैं, पीएल पुनिया भी एक लोकसभा चुनाव हार चुके हैं। कांग्रेस के नेताओं की इस हार को उत्तरप्रदेश के कार्यकर्ता बर्दाश्त नहीं कर पा रहे हैं और जैदपुर के कई कांग्रेस के नेता और कार्यकर्ताओं ने हार को आश्चर्यजनक ढंग से लिया है और सवाल उठाया है कि बार-बार हारने वालों को टिकट क्यों दिया जाता है। कांग्रेस अपना समीकरण बदलती क्यों नहीं? पीएल पुनिया अभी छत्तीसगढ कांग्रेस के प्रभारी हैं और इनकी भूपेश बघेल से खूब बनती भी है। सूत्रों के मुताबिक छत्तीसगढ़ के भ्रष्टाचार से निकली पैसों की बारिश में कुछ छीटें पीएल पुनिया के पास भी आते हैं।
हार की पूरी जिम्मेदारी प्रभारी पर्यवेक्षक भूपेश बघेल की, उत्तर प्रदेश डुबाने के बाद क्या गुजरात को डुबाने की है तैयारी
प्रियंका गाँधी के चलते कांग्रेस के रातोंरात उत्तरप्रदेश में सबसे मजबूत विकल्प के रूप में उभरने की स्थिति में जरूर आ जाती लेकिन कांग्रेस के नेता जिन्हें जिम्मेदारी दी गई थी, उन्होंने मेहनत ही नहीं की, सिर्फ अपना उल्लू सीधा करने में लगे रहे। कैसे पैसे का इस्तेमाल अपने खुद के प्रचार तंत्र में लगा दिया। ऊल जलूल सलाह से उत्तरप्रदेश ही नहीं पंजाब भी हरवा दिया। बहरहाल कांग्रेस को पिछले चुनाव की तुलना तक में काफी दयनीय और खोखली हालत में पहुंचाने में इन नेताओं ने कोई कोर कसर बाकी नहीं रखी। कांग्रेस आलाकमान को यह सोचना होगा कि ऐसी क्या मजबूरी थी जिसके वजह से पुराने नेताओं का उपयोग नहीं किया गया। अगर उन्होंन नहीं सोचा तो कांग्रेस पार्टी का वजूद उत्तरप्रदेश से हमेशा के लिए खत्म हो जाएगा। दरबारी षड्यंत्र की जड़ें इतनी मजबूत हो गई हैं कि कांग्रेस के बाहरी नेता भूपेश बघेल भी कांग्रेस को अपनी बपौती समझने लगे हैं। जबकि इनकी जनता में पकड़ नहीं और इनकी जड़ें कमजोर हैं। उत्तरप्रदेश चुनाव परिणाम के बाद भी कांग्रेस नेतृत्व ने कोई सबक नहीं लिया तो आगे स्थिति और भी गंभीर होगी एवं पार्टी की के हाथ सिर्फ फजीहत ही हाथ आएगी। खैर सुनने में आया है ही उत्तरप्रदेश प्रभारी पर्यवेक्षक महोदय ने गुजरात में भी प्रभारी बनने के लिए 3000 करोड़ का प्रस्ताव दिया है पर कांग्रेस आलाकमान जान ले, सिर्फ पैसे से चुनाव नहीं जीता जाता। जल्द ही कुछ कदम नहीं उठाया तो छत्तीसगढ़ भी कांग्रेस के लिए हमेशा सत्ता से दूर हो जाएगा।




