राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद के बड़े बेटे पूर्व मंत्री तेजप्रताप की शादी पूर्व मुख्यमंत्री दारोगा प्रसाद राय के बेटे चंद्रिका राय की बेटी ऐश्वर्या के साथ शनिवार की रात संपन्न हो गयी . पिछले एक पखबाड़े से मीडिया की सुर्खियो में रहने वाले इस शादी समारोह में लालू प्रसाद यादव के शामिल होने को लेकर भी दो दिनो पूर्व तक काफी संशय रहा . लेकिन 10 मई को लालू यादव को पैरोल मिलना और फिर 11 मई को राची हाईकोर्ट द्वारा 6 सप्ताह की अंतरिम जमानत ने लालू परिवार को राहत दी. स्वाभाविक था जब लालू खुद पटना मे मौजूद थे तो देश के नामी गिरामी हस्तियो का शादी समारोह मे शामिल होने की बात कही जा रही थी.
कांग्रेस की अभिभावक सोनिया गांधी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी , उनकी बहन प्रियंका गांधी , पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी , यू पी की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती , मुलायम सिंह यादव समेत वाम दलों के कई बड़ी हस्तियों के आने की घोषणा भी की गयी थी. कतिपय राजद समर्थको द्वारा यह भी कहा जा रहा था कि हो ना हो प्रधानमंत्री नेपाल से लौटते वक्त एकाएक पटना पहुंच कर लोगों को अचरज में ना डाल दे. लेकिन ऐसा हो नही पाया और कांग्रेस , ममता , मायावती और वामदलो के अग्रिम पंक्ति के नेताओं ने इस समारोह में आने से परहेज किया. हालांकि उनके दलो का प्रतिनिधित्व जरूर रहा.
लेकिन इन सबके के बावजूद इस समारोह में क्षेत्रीय क्षत्रपो का जुटान कोई कम नही रहा. यू पी से अखिलेश , झारखंड से हेमंत सोरेन और बाबू लाल मरांडी जैसे दिग्गजो की उपस्थिति ने यह अहसास दिलाने की कोशिश की कि वे लालू के साथ राजनीतिक ही नही पारिवारिक रूप से भी जुड़े है. लेकिन सबसे आश्चर्य की बात सूबे और देश में भाजपा के नेताओं का इस समारोह से अलग दिखना अाश्चर्य जनक रहा. प्रदेश भाजपा के बड़े नेता और 74 आंदोलन के साथी सुशील मोदी तो विदेश जाने के बहाने गायब रहे ही केन्द्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद , पथ निर्माण मंत्री नंद किशोर यादव के अलावे भाजपा कोटे के किसी मंत्री का समारोह में शामिल नही होना कुछ ना कुछ नया संकेत दे गया जो बिहार की परंपरागत मान्यताओ से अलग दिखा.यानि चाहे राजद गठबंधन दल के बड़े नेता हो और या उसके विरोधी नेता खुद को लालू के साथ जाने से परहेज किया. इतना ही नही वर्षो तक लालू के साथ रहने वाले रामकृपाल यादव की गैर मौजूदगी तो हतप्रभ करने वाली.
लेकिन इन सबों के बावजूद महागठबंधन की सरकार के टूटने के बाद पहली पर शादी समारोह के बहाने नीतीश का इसमें शामिल होना और फिर लालू का गर्मजोशी से स्वागत , नीतीश के लिये राबड़ी का आदर का भाव और सभी बेटियों से मिलवाना और तेजस्वी को अपने बगल में बैठने के लिेये नीतीश का इशारा करना साफ संकेत है कि भले ही दोनों के बीच दिल नही मिला हो लेकिन हाथ जरूर मिले है. और नीतीश अभी भी लालू के छोटे भाई है तो तेज तेजस्वी के चाचा . शादी समारोह में मौजूद भीड़ ने जिस तरह से नीतीश और लालू के मिलन पर और नीतीश द्वारा तेज प्रताप को बधाई देने पर ताली बजाकर खुशी का इजहार किया यह इस बात का संकेत है कि दोनो के समर्थक अभी भी दोनों के मिलन को आवश्यक समझते है.
हालांकि इस शादी समारोह को सियासत से अलग रखा जाना चाहिये लेकिन लोजपा सुप्रीमो रामविलास पासवान का पूरे परिवार के साथ मौजूद रहना और महामहिम राज्यपाल सत्यपाल मालिक का इस मौके पर मौजूदगी ने इतना संकेत तो दे ही दिया कि राजनैतिक मत भिन्नता के बावजूद हम सब एक है.दूसरी ओर शादी के बहाने अपने समर्थको की मौजूदगी का अहसास कराने वाले लालू ने यह संकेत तो दे ही दिया कि उनके विरोधी लाख चाहे अपनी जनता के दिलो पर राज वही करते है. वही बिहार ही नही देश की राजनीति के चाणक्य कहे जाने वाले नीतीश ने यह संकेत दिया है कि भले ही वह सत्ता में किसी के साथ रहे आत्मा उनकी समाजवादी है. बधाई तेजप्रताप और ऐश्वर्या को कि इस शादी के बहाने ही सही उन्होनें अपने पापा और चाचा का हाथ मिलाने में सफलता पायी. ऐेसे कहा भी जाता है कि दिल मिलने से पहले हाथ ही मिलते है ----