किसान संसद में उपस्थित होकर संसद की कार्यवाही सुचारू रूप से संचालन की प्रक्रिया सीख सकते हैं देश के प्रधान मंत्री

संयुक्त मोर्चे द्वारा जंतर मंतर पर आयोजित किसान संसद में उपस्थित रहकर, चुने हुए सांसद, लोकसभा किस तरीके से सुचारू रूप से चले, सीख सकते है।;

Update: 2021-08-06 06:32 GMT

एड. आराधना भार्गव

जंतर मंतर पर किसान संसद का आयोजन 22 जुलाई से 09 अगस्त तक किया गया है। जिसमें सिंघु बार्डर से प्रतिदिन किसान संसद में 200 किसान भाग लेने के लिए आते हैं, किसान संसद में किस विषय पर चर्चा होनी है इसकी जानकारी पूर्व से ही संसद में आने वाले किसानों को दी जाती है। अलग अलग सत्र के संचालन के लिए स्पीकर तथा डिप्टी स्पीकर की नामों की घोषणा की जाती है। किसान संसद में आने के लिए जिन किसानों को पास आवंटित किये जाते हैं वे ही किसान संसद में पहुँच सकते हैं, उसके पश्चात् भी पुलिस द्वारा सभी किसान सांसदों की जाँच की जाती है संयमित तरीके से किसान संसद में आते और जाते है तथा निर्धारित विषयों पर संसदीय भाषा का उपयोग करते हुए तर्क के साथ अपनी बात को रखते हैं तथा किसान संसद में तीन किसान विरोधी कानून रद्द करने का प्रस्ताव लिया गया है।

एक तरफ तो देश की संसद चल रही है जिसमें एक एक मिनट में देश के आम गरीब के मेहनत की कमाई का पैसा लगता है और लोकसभा का संसद सत्र बिना सुनवाई के ही समाप्त हो जाता है। दूसरी तरफ 200 कदम की दूरी पर किसान संसद का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें पांच मिनट चाय पीने तथा 15 मिनट भोजन अवकाश के लिए दिये जाते है, सादगी पूर्ण तरीके से किसानों की संसद चल रही है, जिसमें पैसा तथा समय की बर्बादी नही होती। जंतर मंतर पर किसान संसद खुले आसमान के नीचे एक पण्डाल के अन्दर आयोजित की जाती है जिसमें 200 किसान सांसद के बैठने की व्यवस्था की जाती है। किसान संसद में अगर हमारे देश के प्रधानमंत्री, सांसद तथा विपक्ष की भूमिका निभाने वाले सांसद उपस्थित रहकर अगर सीखना चाहें तो पैसों की बचत और भारत की जनता की आवश्यकता के अनुसार कानून बनाये जा सकते हैं, किसान संसद इस बात का घोतक भी है कि कोई भी कानून देश की जनता से विचार विमर्श करके ही बनाया चाहिए। तीन कृषि कानून अगर सरकार देश के किसानों से विचार विमर्श करके बनाती तो आज किसानों को दिल्ली की सीमा पर 6 महिने से बैठना नही पड़ता और ना ही 700 किसानों की शहादत होती। किसान संसद, स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के सपनों को साकार करती दिखाई दे रही है।

देश के ज्वलंत मुद्दों पर चर्चा करने के लिए वैभवशाली विष्टा प्रोजेक्ट जैसे आलीशान ईमारत की एवं सांसद के लिये मेंहगे भोजन की आवश्यकता नही है। जिस देश में किसानों पर 16.80 लाख करोड़ रूपये का कृषि कर्ज बकाया है उस देश में प्रधानमंत्री के निवास एवं नई लोकसभा के ईमारत की क्या अवश्यकता है ? लोकतंत्र जनता के वोट और जनता के पैसों से चलता है। प्रधान मंत्री को देश के अन्तिम छोर में खड़े व्यक्ति को अपने सामने रखते हुए फैसले करना चाहिए। पेपर छीनने और पापड़ी चाट पर प्रधानमंत्रीजी ने इसे संसद का अपमान कहा, किन्तु उनके मंत्री मण्डल की सदस्य सुश्री मीनाक्षी लेखी द्वारा किसान संसद को मवाली कहा, इसे किसानों का अपमान मनने को देश के प्रधानमंत्री तैयार नही है।

गैर जरूरी खर्चो पर किस तरीके से रोक लगाई जा सकती है इसे देखने के लिए हमारे मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री, वित्त मंत्री तथा अन्य मंत्री जंतर मंतर पर आयोजित किसान संसद में उपस्थित होकर सीख सकते हैं। मध्यप्रदेश राज्य पर 2 लाख करोड़ का कर्जा है, राज्य के खजाने की माली हालत खराब है, पर मुख्यमंत्री का खटोला मध्यप्रदेश कि विधान सभा पर उतरे इसकी तैयारी जोरो पर है, प्रदेश के वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा के बंगले पर 24 लाख के निर्माण कार्य शुरू कर दिये गये है, यह निर्माण कार्य उनके निवास परिषर में तेजी से चल रहा है, उनके बंगले को अत्याधुनिक तरीके से तैयार करना है। कांग्रेस की सरकार में भी करोड़ों रूपया खर्च किये गये, कमलनाथ सरकार की बात करें तो उस दौरान मंत्रियों के बंगले पर करोड़ों रूपये साज सज्जा में खर्च हुए, तत्कालीन वित्त मंत्री तरूण भानोट के बंगले पर सबसे ज्यादा 45 लाख रूपया सरकारी खाजाने से खर्च हुए थे। मैं यह बात इसलिए बता रही हूँ कि किसान संसद में उपस्थित होने वाले संसद जिस तम्बू में 7 महिने से निवास कर रहे हैं उस जगह पर हमारे देश के प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को अवश्य जाना चाहिए। मेंहगे बंगले तथा अत्याधुनिक तरीके से तैयार किये गये प्रधानमंत्री के निवास स्थान तथा लोकसभा की नई बिलि्ंडग (विष्टा प्रोजेक्ट) से देश के अन्तिम छोर पर खड़े व्यक्ति के पक्ष में कानून नही बनेंगे, आलीशान बंगले पर निवास करने वाले प्रधानमंत्री को देश का आम गरीब नागरिक ही दिखाई नही देगा तो उनके पक्ष में कानून बनने का तो प्रश्न ही नही उठता, इसका जीता जागता उदाहरण है, तीन किसान विरोधी कानून जिस पर चर्चा करने या उन्हें निरस्त करने को भी प्रधान मंत्री तैयार नही हैं। प्रधानमंत्री का आलीशान निवास स्थान तथा अत्याधुनिक संसद भवन उद्यौगपति और पूंजीपति के पक्ष में कानून बनाने का घोतक है। देश में सड़कों की हालत खस्ता है सड़क पर आने की धमकी देने वाले ज्योतिआदित्य सिंधिया जी को अब सड़क नही उन्हें पूृंजीपति तथा उद्यौगपति के लिए हवाई अड्डे दिखाई दे रहे हैं।

देश में अब अगर कहीं स्वर्ग देखना है तो दिल्ली की सीमा में बैठे किसान आन्दोलन को देखने अवश्य जाईये। गैर बराबरी, जातिवाद, महिला हिंसा, धार्मिक उन्माद का तो वहाँ नामो निशान नही है। किसान संसद यह दर्शाती है कि सादगी पूर्ण जीवन पद्धति अपनाकर भी जनता के हित में कैसे कानून बनाये जा सकते है। दिल्ली की सीमा पर देश के हर कोने से किसान पहुँच रहे है, किसान आन्दोलन देश भर में पांव पसार चुका है। जब तक तीन किसान विरोधी कानून निरस्त नही होंगे किसान दिल्ली की सीमा पर डटे रहेंगें, सरकार तुम ये सुन लो।

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