Parshuram Jayanti 2020: भगवान विष्णु के छठे अवतार थे परशुराम, जानें उनसे जुड़ी कुछ रोचक बातें

उन्होंने क्रोध में न सिर्फ 21 बार इस धरती को क्षत्रिय विहीन किया बल्कि भगवान गणेश भी उनके गुस्से का शिकार हो चुके हैं।

Update: 2020-04-25 02:04 GMT

हिन्दी नववर्ष के अनुसार वैशाक मास की शुक्ल पक्ष की अक्षय तृतीया के दिन परशुराम जयंती मनाई जाती हैं। इसी दिन इनका भी जन्म हुआ था। ऋषि परशुराम को भगवान विष्णु का छठा अवतार भी माना जाता हैं।

मान्यता है, भगवान ऋषि परशुराम आज भी इस दुनिया में जीवित हैं। भगवान परशुराम भगवान शिव के सबसे बड़े भक्त थे। इस बार परशुराम जयंती 26 अप्रैल को मनाई जाएंगी। परशुराम ऋषि जमदग्नि और रेणुका के पुत्र थे। परशुराम भगवान शिव के परमभक्त होने के साथ न्याय के देवता भी माने जाते हैं। उन्होंने क्रोध में न सिर्फ 21 बार इस धरती को क्षत्रिय विहीन किया बल्कि भगवान गणेश भी उनके गुस्से का शिकार हो चुके हैं। 

आइए जानते हैं परशुराम से जुड़ी ऐसी ही खास बातें जो शायद ही अब तक आपने कभी सुनी होंगी....

1) भगवान परशुराम न्याय के देवता है

ऋषि परशुराम का जन्म भगवान श्रीराम के जन्म से पहले हुआ था। इनका जन्म वैशाख शुक्ल तृतीया के दिन-रात्रि के प्रथम प्रहर में हुआ था। परशुराम जी के जन्म समय को सतयुग और त्रेता का संधिकाल माना जाता है।

2) गणपति को भी दिया था दंड

भगवान परशुराम के क्रोध से स्वयं गणेश जी भी नहीं बच पाये थे। ब्रह्रावैवर्त पुराण के अनुसार, जब परशुराम जी भगवान शिव के दर्शन करने के लिए कैलाश पर्वत पहुंचे तो भगवान गणेश जी उन्हें शिव से मुलाकात करने के लिए रोक दिया। इस बात से गुस्सा होकर उन्होंने अपने फरसे से भगवान गणेश का एक दांत तोड़ दिया था।

3) शिव जी के अनन्य भक्त थे परशुराम

परशुराम भगवान शिव के अनन्य भक्त थे। ये दिन रात शिव जी की पूजा करते थे। शिवजी परशुराम की पूजा से अधिक प्रसन्न रहते थें। ऐसा माना जाता है कि इन्होंने धरती पर 21 बार क्षत्रियों का संहार किया था। मान्यता है कि इसी दिन से सतयुग की शुरुआत हुई थी।

4) हर युग में रहे मौजूद

महाभारत और रामायण दो युगों की पहचान हैं। रामायण त्रेतायुग में और महाभारत द्वापर में हुआ था। पुराणों के अनुसार एक युग लाखों वर्षों का होता है। ऐसे में देखें तो भगवान परशुराम ने न सिर्फ श्री राम की लीला बल्कि महाभारत का युद्ध भी देखा।

5) भगवान शिव ने दिया था परशु अस्त्र

भगवान परशुराम जी की माता का नाम रेणुका और पिता का नाम जमदग्नि ॠषि था। उन्होंने पिता की आज्ञा पर अपनी मां का वध कर दिया था। जिसके कारण उन्हें मातृ हत्या का पाप लगा, जो भगवान शिव की तपस्या करने के बाद दूर हुआ। भगवान शिव ने उन्हें मृत्युलोक के कल्याणार्थ परशु अस्त्र प्रदान किया, जिसके कारण वे परशुराम कहलाए।

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