मध्य प्रदेश: सिंधिया भी गये और सत्ता भी गयी, कांग्रेस हाथ मलते रह गयी

Update: 2020-03-20 07:59 GMT

अशोक मिश्र 

 मध्य प्रदेश में पिछले एक पखवाड़े से चल रही राजनीति का हाई वोल्टेज ड्रामा आज प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ के इस्तीफे के एलान के साथ ही खत्म हो गया. कांग्रेस के दिग्गज युवा नेता और मध्य प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ज्योतिरादित्य राजे सिधिंया को राज्य सभा जाने से कमलनाथ और दिग्विजय सिंह की जोड़ी ने रोका था और उसके बाद शुरू हुए विवाद की यह अंतिम परिणति है जो होना ही था.

लेकिन क्या कांग्रेस की लीडर शिप इस घटना पर चिंतन करेगी कि कांग्रेस के अंदरूनी कलह के कारण उसके दिग्गज नेता और राहुल गांधी की किचन कैबिनेट के सदस्य ज्योतिरादित्य को कांग्रेस छोड़ बीजेपी का शरण लेना पड़ा तो कांग्रेस को अपनी सत्ता भी गंवानी पड़ी. यानि पार्टी ने दोनों को खोया.

अगर कांग्रेस नेतृत्व सही समय पर फैसला लेता तो शायद ज्योतिरादित्य और सरकार दोनों बच सकती थी. अब मध्य प्रदेश में हाथ मल रही कांग्रेस क्या सिंधिया के बगैर फिर वापसी कर पायेगी. क्या कमल नाथ और दिग्विजय सिंह से हारे बूढे शेर फिर बीजेपी के खिलाफ दहाड़ मार पायेगें. फिलहाल कांग्रेस के बारे में यह कह सकते हैं कि ना खुदा मिला ना विसाले सनम, ना इधर के रहे ना उधर के रहे.

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