बांग्लादेश हमले को लेकर इरफान खान का, मुसलमानों पर प्रहार

Update: 2016-07-04 10:30 GMT
मुंबई: बांग्लादेश की राजधानी ढाका में शुक्रवार रात हुए चरमपंथी हमले को लेकर इरफ़ान ने फ़ेसबुक पर लिखा, बचपन में मज़हब के बारे में कहा गया था कि आपका पड़ोसी भूखा हो तो आपको उसको शामिल किए बिना अकेले खाना नहीं खाना चाहिए।

बांग्लादेश की ख़बर सुनकर अंदर अजीब वहशत का सन्नाटा है। क़ुरान की आयतें न जानने की वजह से रमज़ान के महीने में लोगों को क़त्ल कर दिया गया। हादसा एक जगह होता है और बदनाम इस्लाम और पूरी दुनिया का मुसलमान होता है।

वो इस्लाम जिसकी बुनियाद ही अमन, रहम और दूसरों का दर्द महसूस करना है। ऐसे में चुप क्यों हैं मुसलमान क्या इसी तरह मज़हब को बदनाम होने दे? या वो ख़ुद इस्लाम के सही मायने को समझे और दूसरों को बताए कि ज़ुल्म और नरसंहार करना इस्लाम नहीं है।

इरफ़ान की पोस्ट पर सैकड़ों लोगों ने टिप्पणी की है। आशू अरूष ने लिखा, ये सिर्फ़ बात करने का वक़्त नहीं है, ये वक़्त है मुसलमान भाइयों के आगे आकर आतंकियों से लड़ने का सिर्फ़ यही तरीक़ा है छवि ठीक करने का।

प्रतीक कुमार ने अपनी टिप्पणी में लिखा, अच्छे लोगों की चुप्पी से ही अब तक ऐसी आतंकी वारदातें हो रही हैं। धर्म आपका, लोग आपके, इंसानियत आपकी।

इरफ़ान ख़ान अपनी हालिया टिप्पणियों को लेकर चर्चित हैं। जयपुर में अपनी फ़िल्म के प्रोमोशन के दौरान इरफ़ान ख़ान ने क़ुर्बानी पर टिप्पणी करते हुए कहा था, बाज़ार से बकरे ख़रीदकर काटना कुर्बानी नहीं है।

उनकी इस टिप्पणी पर विवाद भी हआ था। जिसके बाद उन्होंने एक फ़ेसबुक पोस्ट में कहा था कि मैं धर्म के ठेकेदारों से नहीं डरता हूँ।

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