राजस्थान, ब्यूरो प्रमुख , मोहम्मद हफीज
राज्य में भी सम्पूर्ण देश की भांति भाजपाइयों में देश के प्रति अथाह प्रेम उमड़ रहा हैं। सत्तारूढ़ भाजपा के मंत्री विधायकों के मन देश प्रेम में फटे जा रहे हैं तथा कथित देश भक्ति के ये त्यागी बलिदानी नामी परनामी महाशय अब पूर्णतया देश प्रेम में डूब चुके हैं। इनके शरीर के रोम-रोम में देशभक्ति समाई हुई है, शरीर के सर्वाधिक चंचल अंग जिव्हा पर भी अब भाजपाइयों के देशभक्ति का राग चारो पहर चलता रहता है। इन भाजपाइयों के द्वारा किये गये सभी कर्म जलेबी की भांति देशभक्ति की चाशनी में डूबे हुए दिखते हैं।
अनेक प्रकार के झूठे जुमलों वादों के बल पर भ्रम फैलाने की कलाकारी का सार्वजनिक प्रदर्शन करने का हुनर इन देश भक्तों को सत्तासीन होने पर दूसरी पार्टियों से अलग करता है। भला झूठे वादों के बल पर झूठ बोलने की कलाकारी में भी अब तो भाजपाइयों को देशप्रेम का स्वाद चढ़ चुका है। हमें तो झूठ बोलने की हर अदा पर भी अब देशप्रेम ही दिखाई देता है। कमबख्त विरोधी दल के नेताओं का बुरा हो उन्हें तो बस बीमारी लगी है। कभी मध्य प्रदेश भाजपा सरकार के व्यापम घोटाले की बात करते हैं। कभी ललित मोदी, वसुंधरा महारानी के सम्बन्धों पर आसमान उठा लेते हैं। अरे भाई राजस्थान के खान घोटाले में भी आप अगर देशप्रेम खोजेंगे तो वह भी मिल ही जाएगा। कांग्रेस सहित तमाम विपक्षी दलों की सरकारों में होने वाला भ्रष्टाचार विदेशी तकनीक पर आधारित था इसलिए संघ परिवार सहित भाजपाइयों को वह पच नही रहा था। भाजपा शासन में भाजपाइयों द्वारा किया गया भ्रष्टाचार संघ की नागपुर फैक्ट्री में बना उच्च तकनीक का स्वदेशी भ्रष्टाचार है।इस पर भी राष्ट्रवाद की मोहर और लगी है।फिर इस भ्रष्टाचार की शुरुआत रामनाम से हर शुभ कार्य की भांति की जाती है।इतने शुभ मुहूर्त में रामनाम से शुरू होने वाला कर्मकांडी भाजपाइयों का भ्रष्टाचार भी मुए विपक्षियों को क्यों नहीं सुहाता है। हमारी नजर में तो इन भाजपाइयों को स्वयं निर्मित स्वदेशी रामनामी राष्ट्रवादी भ्रष्टाचार करने के नये कल्याणकारी नुस्खे इजाद करने के कारण इनाम मिलना चाहिए। इनाम के रूप में भाजपा वाले अपने घर भरे इतनी तो छुट मिलना ही चाहिए।
नाश हो विपक्षियों का ना खुद चेन से बैठते हैं ना भाजपाइयों को चेन से भ्रष्टाचार करने देते हैं। भाई सचमुच जमाना खराब हो गया है। सम्पूर्ण देश प्रदेश विलुप्त होते स्वदेशी तकनीक से बने राष्ट्रवादी भ्रष्ट भाजपाई भी जो मात्र कुछ ही राज्यों की सरकारों में बैठे हैं वे भी अब तो बुरे लगने लगे हैं और हमारे राज्य मै तो यशस्वी प्रतापी महारानी की भ्रष्टाचार करने की कलाएं चंद्रमा की अष्ठ कलाओं के समान देश विदेश में प्रकाश फैला रही है। उसे भी गांधीवादी मुख्यमंत्री रहे गहलोत साहब पानी पी पीकर बुरा कह रहे हैं।कोई मौका भी हाथ से जाने नहीं देते हैं। जब देखो जब हजारों करोड़ खा जाने के आरोप जड़ देते हैं। भाई कांग्रेस के नेता प्रदेश के किसी किसान मजदूर के आंगन में पैदा होकर पले बढे है। वह क्या जाने राज परिवार में जन्म लेकर दूसरे राज्य की महारानी बनने वालों की जरूरते कितनी बड़ी होती है। राज्य के अनेक नेताओं की कुल जमा पूंजी से ज्यादा तो हमारे राजा रजवाड़ों के महलों के रंग रोगन में ही खर्च हो जाता है। तो फिर उनकी आवश्यकता अनुसार भ्रष्टाचार वे स्वयं कर रहे हैं और तकलीफ दूसरों को हो ये कहां का न्याय है। देश में जन-जन के अराध्य ब्रह्मांड को रचने वाले ब्रम्हा विष्णु महेश के अवतार भगवान राम दया के सागर है। इनकी दया की कृपा सभी को प्राप्त हैं। सभी देशवासियों के घट में भगवान राम विराजे है। परन्तु इन दिनों सारे धर्म देवताओं का पेटेंट भाजपाइयों ने अपने नाम से करा लिया है। तभी उनके सम्पूर्ण कार्य सफल होते हैं। भाजपा सरकार के मंत्री विधायक भी अपने चुनाव का श्री गणेश राम के नाम से करते हैं।
चुनाव जीतने से लेकर सरकार बनाने तक सम्पूर्ण कार्यों में भगवान का साथ भाजपाइयों को मिला हुआ है। विपक्षियों को यह भी समझ नही आता कि भगवान के नाम से शुरू होने वाला हर कार्य शुभ होता है। इसलिए देश की भांति प्रदेश सरकार का भ्रष्टाचार भी भगवान के नाम से ही शुरू होता है। शुभ मुहूर्त में भगवान के नाम से शुरू होने वाला राज्य सरकार का भ्रष्टाचार भी देशहित में देश प्रेमियों के द्वारा देश प्रदेश की जनता के भले के लिए ही किया जा रहा है। हमारा दुखलग यह है नादान विपक्षियों इतना भी समझ नहीं आता है।
परचूनी की दुकान पर बैठने वाले एक मिलावट राम जी भाजपाई देशभक्त का सामना एक दिन हमसे भी हो गया। भाई जोर-जोर से धर्म का ठेकेदार बना मिलावट राम हमें ग्राहक समझ कर जय श्रीराम जय श्रीराम के नारे लगाने लगा। माथे पर तिलक लगाये उस धर्म योद्धा से सामना होते ही हमने दोनों हाथ जोड़ उसे प्रणाम किया। धर्म पुरूष भाजपाई ने भी दोनों हाथ जोड़कर कहा कि कहो मेरे देशवासी में क्या कर सकता हूं आपकी सेवा। हमने भी झट से कहा भाई आपकी देशभक्ति हमें नजर आती है शुध्द वर्ना तो हमें मिलावटी लोगों से ही करना पड़ता है युध्द। भईया दो किलो शुध्द देशी घी चाहिए। उसने झट से पीपे से दो किलो तोला हमने पैसे निकाल कर उसके हाथ पर धरे और घी लेकर घर चले। घर जाते ही श्रीमती जी पडी हमारे गले और कहा कि यह तो मिलावट का घी है और तोल भी कम ही लग रहा है। हमने दूसरी दुकान से घी की करी तुलाई और अपनी जान छुडाई। ताेल में घी का वजन एक किलो की जगह आठ सो ग्राम का ही निकला। अब हमारी बारी श्रीमती के हाथों आई खूब बुरा भला सुनकर हमने भी ये सोचा सतयुग तो चला गया है। कलियुग में राम नाम का इतना दुरूपयोग ? पैसे पूरे देकर जय श्रीराम के नारे के उद्घोष के पीछे बडा धोखा हो गया है।
हाय राम ये भी हमारे साथ ही होना था। हे भगवान श्री राम हमें क्यूँ मिला किलो का आठ सौ ग्राम। हम कलम नवीशो को भी बड़ा घमण्ड होता है अपनी कलम पर की हम सरकार हिला देंगे ? परन्तु यह भ्रम भी हमारा हमारे एक मित्र ने यह कहकर तोड दिया की भइया सतयुग में तो एक धोबी के कहने पर सीतामाता की भी अग्नि परीक्षा भगवान राम ने ली थी। सतयुग में धोबी तो क्या धोबी के गधे का भी सम्मान होता था। हमने उससे घबराते हुए कहा कि भईया ये भाजपाई तो बड़े आदर्शवादी और मर्यादा का निर्वहन करने वाले सच्चे राम भक्त है।इनके घट में तो साक्षात हनुमानजी की भांति भगवान राम ही विराजते है। उसने झट से कहा क्या बात करते हो ? बढती उम्र ने आपका दिमाग खराब कर दिया। ये भाजपाई बडे़ चालाक लोग हैं। ऊपर से कलयुगी राम भक्त भी है।
क्या बात करते हैं बृहमांड के रचियता राम को आदर्श मानकर इन्होंने तो देश में राम मंदिर की रचना करने के लिए सड़कों पर सौगंध खाई थी। सौगंध राम की खाते हैं हम मन्दिर वहीं बनाएंगे। हमने घबराकर कहा। इस पर पण्डित जी बोले भाई इन्होंने अपने बाप की कसम तो खाई नहीं थी। जो इन्हें पाप चढ़ता। झूंठी सौगंध खाने से बाप मर सकता था। इसीलिए अपने बाप की जगह इन्होंने भगवान राम की सौगंध खाई थी। अब भगवान तो अजर अमर है उनका तो कुछ बिगड़ेगा नहीं। इसलिए इन झूठो ने सड़कों पर हजारों लाखों झूठी कसमें भगवान राम के नाम की खाई थी। फिर हमने चौकते हुए कहा कि नहीं जी आपको कुछ गलत फहमी हो गई है। वह बोला भाई साहब इन्होने वह काम कर दिया जो औरंगजेब ने भी नहीं किया था। इन्होंने जयपुर की छोटी चौपड़ पर रोजगारेश्वर महादेव मंदिर को बुलडोजर फेर कर तोड दिया। जयपुर के राजा सवाई जय सिंह के समय का प्राचीन ऐतिहासिक महत्व के इस मन्दिर को बिना इजाजत ही तोड़ दिया। अब हमारी सारी जानकारी हमें अज्ञानी बना रही थी। इतने में फिर वह की लाल किले से प्रधानमंत्री झूंठा जुमला बोलते हैं मैं प्रधानमंत्री नहीं प्रधान सेवक हूँ। ना खाऊँगा ना खाने दूंगा ! पर उसे वसुंधरा सरकार में भ्रष्टाचार के धुरंधर जे.डी.ए. जयपुर नगर निगम के घोटाले नहीं दिख रहे। शिखर अग्रवाल, आशुतोष पेण्ढनेकर जैसे भ्रष्ट अधिकारी जयपुर में आवारा सरकारी सांड बने प्रदेश को लूट रहे हैं। हर दिन नये घोटाले हो रहे हैं पर क्या संघी हो फिर भाजपा के बंधुआ विधायक सब पर ये दोनों भारी पड़ रहे हैं।
जयपुर शहर की सड़कों पर इन भ्रष्टो के लगाए जख्मों के कारण शहर के निवासीगण बेमौत मर रहे हैं। शहर की चारदीवारी के भीतर तंग गलियों में बनी अवैध इमारतों ने शहर के यातायात को जाम कर रखा है। अब फिर हमने कहा कि कुछ भी हो भाजपाई सहिष्णु तो है ही तभी आप जैसे आलोचक इतनी आलोचना कर रहे हैं। इस बात का कुछ असर होने पर हमने कुछ यूं भी कहा कि भाई ये तो मर्यादा पुरुषोत्तम को मानने वाले सच्चे सहिष्णु राम भक्त है। अरे इतना कहते ही वह फिर बरस पडे कहने लगे इनमें मर्यादा कहा है। भगवान राम ने तो रावण के अन्तिम समय में रावण को विद्वान पण्डित मानकर अपने भाई लक्ष्मण को उनके पास भेजा था। राम ने लक्ष्मण से कहा था कि जाओ और रावण के अन्तिम समय में उनसे उनके ज्ञान के भण्डार से कुछ अमूल्य ज्ञान प्राप्त करो। शायद मृत्यु से पूर्व रावण कोई ज्ञान की बाते तुम्हें बता दें। दुश्मन के पास जो ज्ञान था उसकी भी राम ने प्रशंसा की थी।
ये हमारे देश की सहिष्णुता की परम्परा है। ये कलियुगी रामभक्त क्या जाने धर्म की मर्यादा को स्थापित करने वाले भगवान राम के बारे मे ? ये तो सिर्फ चुनाव के समय राम रोटी और इंसाफ के साथ राम राज की बाते करने वाले ढोंगी है। इनके शासन में किसान आत्महत्या कर रहे हैं। दलित छात्र अपने जीवन को भाजपाइयों के अन्याय के कारण असमय नष्ट कर रहे हैं। फिर हमने आखिर में कहा कि भाई ये हर वक़्त श्यामा प्रसाद मुखर्जी के नाम को अपने से जोडे तो रखते हैं। उसने तपाक से फिर कहा कि भाई श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने कहा था कि एक देश नहीं रहेंगे दो निशान मगर आज उनके अनुयायी बने भाजपा वाले कश्मीर में दो राष्ट्र के सिद्धान्त को मानने के समर्थक दल पी.डी.पी.से हाथ मिलाकर सरकार में बैठ चुके हैं। मुफ्ती सईद ने अपनी सरकार के मंत्रियों से अपनी गाड़ी पर कश्मीर का ध्वज तिरंगे के साथ लगाने का हुक्म दिया था। उन्हीं की बेटी के चरणों में बैठकर ये सरकार बनाने के लिए विनती कर रहे हैं। भईया ये स्वदेशी को भूल कर अब विदेशी कम्पनी के अफसरों से मिलकर ईस्ट इंडिया कंपनी फिर भारत में ला रहे हैं। अच्छे दिनों में किसान मर रहे हैं और हमारे पी.एम. विदेश घूम-घूमकर दुनिया देख रहे हैं। अरे भाई गरीब से गरीब भी तीन दिन तो जवान मौत का शोक मनाता है पर ये तो सीमा पर जवान की मौत पर भी विदेश घूमने जा रहे हैं। इनके विरूद्ध बोलने वालों को तो अब ये देश द्रोही बताकर झूठे केस बनाकर जेल भेज रहे हैं। भाई इनकी तो मती मारी गई हैं। इनके साथ में हमें तो थारी भी ये ही हालत दिखती है जा अब भाई तू भी अपना इलाज करा लें भाजपाइयों का तो अब देश की जनता इलाज करने लग गयी है। बिहार चुनाव के बाद एक बिहारी कन्हैया ने इनकी नींद हराम कर दी है वैसे भी केजरीवाल से ये रोज ही दिल्ली में अपनी फजीहत करवा रहे हैं। आप क्यों अपनी फजीहत इनके साथ मुफ्त में ही करवाने पर तुले है। आप समझदार व्यक्ति हो क्यो इनकी तारीफ कर रहे हो। हमने तब अपनी खेर जानकर पण्डित जी की हा में हा मिलाकर कहा भाई बात तो आपकी ठीक ही है पर जातिवाद से तो भाजपाई बहुत दूर है। यहां तो भाजपाइयों में संघ के आदर्शवादी चरित्र की झलक मिलती है। फिर तो अब पण्डित जी का मूढ़ पूरी तरह उखड़ गया। लगभग चीखते हुए बोले रे क्या बकता है।
इन्होंने ने हरियाणा में जाटों को झूंठा आरक्षण का वादा किया था क्या ये जातिवाद नहीं है। भाई इनकी जातिवादी राजनीति से हरियाणा आज तक जल रहा है। ये तो भारत जलाओ पार्टी के लोग हैं। इन्हें देश धर्म राष्ट्रवाद के नाम पर अल्पसंख्यक वर्ग को गाली देकर हिन्दुओं के वोट लेने है।सत्ता प्राप्त कर ये अपने घर भर रहे हैं। भले ही कानून व्यवस्था जाए भाड़ में इन्हें तो कुर्सी से प्यार है इनके शासन में सड़कों पर बलात्कारी दंगाई हरियाणा में अपना तांडव दिखा चुके हैं। बेबस महिलाओं की अस्मत बचाने वाले पुलिस जवानों के हाथ बांध देना उन्हें मजबूर बना देना, बलात्कारियों को छूट देना भी देशभक्ति है क्या ? देशभक्ति की बाते करने वाले इन नेताओं का एक बालक भी फौज में नहीं होता है। हमारे बालक सरहद की रक्षा में शहीद हो जाते हैं। हम घरों में ना बैठकर खेतों में अन्न उपजाने है। ये क्या करते हैं कौनसा बुरा काम ये अपने शासन में नहीं करते हैं। आतंकी बाहर से आकर हमारे देश में हमारे लोग मारते हैं। ये भी तो दंगों में देशवासी ही मारते हैं। पाकिस्तान की सम्पत्ति जलाने तो ये सीमा पार नहीं जाते ? राष्ट्र की सम्पत्ति जलाने वाले इन पाखण्डीयो के कर्म भी हमें तो दंगाइयों जैसे ही लगते हैं। आप जैसाे को भी हम अब तो इनकी वकालत करने के कारण दंगाई ही मानेंगे तब ही आप चुप बैठोगे ? अब हमें हमारी भलाई चुप रहने में लगी वह इसलिए की एक चुप्पी हजारों सवालों का जवाब होती है। हमारे मोदी जी भी यही कर रहे हैं। तो हम भी चुप हो गए।