भाजपा का गाय प्रेम और मन्दिर प्रेम समय के साथ बदलता है

Update: 2016-06-03 12:01 GMT

 राजस्थान व्यूरो चीफ मोहम्मद हफीज पठान

भाजपा इन दिनों अपने ही नेताओं के बनाए हुए अनेक मिथकों और भ्रम का शिकार बन गई है। देश के चुनावों में सबका साथ सबका विकास, मण्डल कमण्डल, गाय माता और भारत माता धर्म, पूजा धर्म, ध्वज के साथ खड़ी भाजपा में इन दिनों अनेक प्रकार के अन्तर विरोध दिखाई पड़ रहे हैं। चुनावों में विजय प्राप्त करने के लिए अनेक प्रकार के मिथक गढ़ना और अपने कुतर्को से उन मिथकों को आगे बढ़ाते रहने की कला भाजपाइयों में कूट कूट कर भरी है। समय समय पर धर्म आधारित वैमनस्यता को बढ़ावा देने से अनेक बेकसूर व्यक्तियों की मौत भी सत्ता का स्वाद चखने वाले नेताओं के आचरण पर कोई विपरीत प्रभाव नहीं डाल पाई है।


सत्ता प्राप्त करने के अनेक प्रकार के नेता और उनके अपने अपने एजेन्डे इस पार्टी में ही है। चुनावी समय में निर्लज्ज भोंडेपन से इनके नेताओं द्वारा अपनी इस कला का सर्वज्ञान दिखाया जाता है। परन्तु सत्ता प्राप्त करते ही इनके अपने नेता ही इन सारे नफरत के विवादों, वादों को चुनावी जुमले करार देकर एकदम से पलट जाते हैं। सम्पूर्ण देश में गाय माता व राम मन्दिर के मुद्दे पर अपनी सियासी रोटी सेकने के आदतन ठेकेदार बने भाजपाइयों की सरकार में राजधानी जयपुर में ही देव देवालय पुजारी के साथ गाय माता सुरक्षित नहीं है।


राम जादो की ही सरकार में 50 से अधिक मन्दिर अबतक तोड़े जा चुके हैं। इन मन्दिरो में एक मन्दिर तो एेसा भी था जो जयपुर शहर के बसाने वाले राजा सवाई जय सिंह के समय का बना था। जयपुर शहर छोटी चौपड़ पर बना रोजगारेश्वर महादेव का मन्दिर एतिहासिक और पुरातत्व विभाग से संरक्षित हैरिटेज की श्रेणी में संरक्षित था। अचानक बिना किसी सरकारी आदेश के दिन दहाड़े भगवान शिव के इस मन्दिर को राम मन्दिर बनाने की कसमें खाने वालों की सरकार में तोड दिया गया। इस से पहले राजधानी में दर्जनों मन्दिर तोडने से पहले मन्दिर के पुजारियों को पुलिस थाने में बैठा कर पुलिसियाई दण्डे से सरकारी आतंक का ज्ञान दिया गया। आनन-फानन में बुलडोजर चलाकर एेतिहासिक मन्दिर तोड डाला। राम मन्दिर और शिव मन्दिर में राजनैतिक वोटों की फसल नहीं मिलने के फर्क के कारण ही शायद जयपुर में बेरहमी से मन्दिर पुजारी और देवताओं का अपमान भाजपा शासन में हुआ है अन्यथा तो सभी देवालय व देवालय में विराजमान देवमूर्ति भी सभी के लिए समान रूप से आदर के पात्र हैं। पर शायद राम मन्दिर व गाय माता के लिए मरने मारने वालों के लिए भगवान और उनकी आस्था का सम्मान समय स्थान देखकर व उनके लाभ अनुसार भिन्न-भिन्न है।


अभी ताजा घटना राजस्थान के प्रतापगढ़ के छोटी सादड़ी कस्बे की है, यहां गौ भक्तों ने एक व्यक्ति को निर्वस्त्र कर पुलिस की मौजूदगी में सिर्फ़ इसलिए मारा कि वह व्यक्ति कथित तौर पर एक ट्रक में गाय-बैल व भैंस को बुरी तरह से ठूंसकर ले जा रहा था। अगर वह व्यक्ति गोैवंश की तस्करी कर रहा था तो इसकी सजा उसको न्यायालय देता। पर इन गौभक्तो को कानून हाथ में लेना का अधिकार किसने दे दिया।


अब  बात करते हैं इन गौ भक्तों की गौ भक्ती की। इन की गौ भक्ती जयपुर नगर निगम की गौशालाओ के भयावह हाल को देखकर गायब हो जाती है। वह भी जबकि नगर निगम जयपुर सहित प्रदेश में गौ भक्तों की सरकार है। सरकारी निगम की गौशाला से कई वर्षों से निगम के भ्रष्ट कर्मचारी ही गोवध के लिए गायों को बेच रहे हैं। गायों के चारे में भारी गोल माल है। एक ही दिन में जांच होने पर पाँच हजार गाये कागजों में मार दी जाती है। कागजों में गायों की नफरी दिखाकर चारे के साथ दवाइयों में भी खूब घपले किये जा रहे हैं। नगर निगम जयपुर के भाजपा के पार्षद ने ही पुलिस थाना कानोता में गायों की तस्करी करने के आरोपी निगम कर्मियों के विरूद्ध रिपोर्ट दी है। यह सब दर्शा रहा है आज के राजनेताओं के मन में अब मात्र कुर्सी प्रेम व धन की ही भूख बची है। गायों के चारे को भी भक्त गाय माता का प्रसाद समझ सपरिवार सहित खा रहे हैं। गायों की तस्करी में लिप्त भ्रष्ट अपने पैसों के बल पर राज्य सरकार से बचे हैं।

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