300 वॉट्सऐप ग्रुप से कश्मीर में होती थी सुरक्षा बलों के खिलाफ पत्थरबाजी

Update: 2017-04-24 05:19 GMT
नई दिल्ली : कश्मीर में सुरक्षा बलों के खिलाफ पत्थरबाजी करने और आतंकियों के खिलाफ मुठभेड़ों में बाधा पहुंचाने के लिए युवाओं की फौज को कश्मीर के कोने-कोने से इकठ्ठा किया जाता था और इसके लिए व्हाट्सएप का इस्तेमाल होता था। एक पुलिस अधिकारी ने जानकारी दी है कि पत्थरबाजी के लिए कश्मीर में करीब 300 व्हाट्सएप ग्रुप ऑपरेट किये जा रहे थे। इन्हीं व्हाट्सएप ग्रुप्स पर युवाओं को पत्थरबाजी के लिए मैसेज भेजे जाते थे। पत्थरबाजी के लिए 10-10 किलोमीटर दूर से युवाओं को व्हाट्सएप मैसेज के जरिए बुलाया जाता था। इंटरनेट बंद होने से इस पर रोक लगी है।

जानकारी के मुताबिक कश्मीर में पिछले कुछ दिनों से पत्थरबाजी की घटनाओं में काफी कमी आई है। इसकी दो वजहें हैं। पहली वजह है, सरकार द्वारा घाटी में इंटरनेट सेवाओं को पूरी तरह से बंद कर देना। दूसरी वजह है, पत्थरबाजों के करीब 90 प्रतिशत व्हाट्सएप ग्रुप्स को बंद कराना। इन दोनों कामों की वजह से अब पत्थरबाजी के लिए कश्मीरी युवाओं तक सूचना नहीं पहुंच पा रही है, जिससे पत्थरबाजी के लिए भारी भीड़ जुटाना मुश्किल हो गया है। बता दें कि पुलवामा के कॉलेज में पुलिस की कार्रवाई के बाद छात्रों ने भारी हंगामा किया था। इसके बाद सरकार ने घाटी में इंटरनेट सेवाएं बंद करा दी थीं।

एक अफसर के मुताबिक, "हमने ग्रुप और ग्रुप एडमिनिस्ट्रेटर्स की पहचान कर ली है। पुलिस ने उन्हें काउंसलिंग के लिए भी बुलाया। इसका रिस्पॉन्स भी अच्छा मिला। बीते 3 हफ्तों में 90% वॉट्सऐप ग्रुप खत्म किए जा चुके हैं। पत्थरबाजी के दौरान घाटी में इंटरनेट सर्विसेज को बंद करने के फैसले काफी असर हुआ था।

अधिकारी ने बताया कि इंटरनेट सेवा को निलंबित करने की सरकार की नीति के सकारात्मक नतीजे मिल रहे हैं और इससे मुठभेड़ स्थलों पर पत्थरबाजी पर लगाम लगी है। उन्होंने शनिवार को बडगाम जिले में आतंकियों के साथ मुठभेड़ का हवाला भी दिया।

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