बिजनौर के थाना शेरकोट के थानाध्यक्ष धर्मेंद्र गुर्जर और बसपा के बढ़ापुर विधायक मोहम्मद गाज़ी की नोकझोंक का खामियाजा विधायक के समर्थकों को भुगतना पड़ रहा है। मिली खबर के मुताबिक, कुछ दिन पहले बसपा विधायक गाज़ी और शेरकोट थानाध्यक्ष धर्मेन्द्र में किसी मामले को लेकर अनबन हो गई थी, जिसपर विधायक ने पुलिस के उच्च अधिकारियो से थानाध्यक्ष की शिकायत की थी। शिकायत का खामियाजा अब विधायक समर्थकों को भुगतना पड रहा है, लेकिन सवालिया निशाहै कि पश्चिमी यूपी में पुलिस इस तरह की हरकत पर क्यों उतरी है जिससे पुरे महकमें को बदनामी मिलती है।
इस पर बिजनौर पुलिस अधीक्षक ने शेरकोट थानाध्यक्ष धर्मेन्द्र गुज्जर को लाइन हाज़िर कर दिया था तथा शेरकोट थाने का इंचार्ज किसी दूसरे को नही दिया था ऐसा लगभग दो दिन चला। इसी घटनाक्रम के चलते नगर में उस समय हलचल मच गई जब धर्मेन्द्र गुज्जर को थाने में देखा गया पता चला की उनकी बहाली हो गई और उन्हें फिर से शेरकोट थाने का चार्ज दे दिया गया है।
इसी उथल पुथल के चलते अब धर्मेन्द्र ने विधायक पर आरोप लगाने शुरू कर दिए. थानाध्यक्ष द्वारा बसपा विधायक पर लगाये गये आरोपो में थाना इंचार्ज को धमकाने,गाली गलोच करने जैसे कई आरोपों में मुकदमा दर्ज कर दिया।
थानाध्यक्ष का गुस्सा यही शांत नही हुआ अब बारी आई विधायक समर्थको की धरपकड़ की. विधायक समर्थक पुलिस को जहाँ मिला उसे मार-पीटकर थाने लाया गया. इसी सिलसिले में मोहल्ला इमामबाड़ा में बनी मस्जिद के मुतवल्ली हाज़ी मुशर्रफ ने आप-बीती बताई।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार उन्होंने बताया कि जब वो अपने घर में थे उनके घर के बाहर पुलिस की गाड़ी आकर रुकी जो पुलिस के जवानो से भरी हुई थी. उन्होंने मुझसे कहा तुम्हे एसओ ने थाने बुलाया है मे उनकी गाड़ी में बैठ उनके साथ थाने चला गया. वहां पहुंचा तो थानाध्यक्ष ने मुझे देखते ही पीटना शुरू कर दिया और मेरी दाढ़ी पकड़ कर अपमानित करते हुए मुझे नीचे गिरा दिया। मेरी टोपी भी जमीन पर गिर गई जिसे थानाध्यक्ष धर्मेन्द्र गुज्जर ने अपने पेरो तले मसल दिया। मामले को लेकर लोगों में तीव्र आक्रोश है।