जयपुर : जब से देश में मोदी की सरकार बनी है तब से देश में भाजपाईयों को यह भ्रम हो गया है कि अब केंद्र में हमारी ही सरकार है ,और अपराध करने करने के बाद भी हमारी सरकार में हमारा कुछ नहीं बिगड़ेगा . दुर्भाग्य से जब से यूपी में बीजेपी की पूर्ण बहुमत की सरकार बनी है ,तब से भाजपा की भगवा टोली कुछ ज्यादा ही आक्रामक हो गयी है . देश के विभिन्न राज्यों में जहां -जहां बीजेपी की सरकार है ,उन सभी राज्यों में कानून के शासन की स्थापना के प्रति समर्पित पुलिस के अनुशासित बल के साथ बीजेपी के नेता और कार्यकर्ता थानों में घुसकर मारपीट कर रहे है .भाजपाईयों की गुंडागर्दी का शिकार बनने में पुलिस के जवानों से लेकर पुलिस के उच्चाधिकारी भी शामिल है .पुलिस की वर्दी का इकवाल भाजपा शासित राज्यों में तार -तार हो रहा है .इसके पीछे पुलिस के उच्च अधिकारियों में मलाईदार पोस्ट पर लगने का लालच काम कर रहा है .
हमारे देश में क़ानून की सुरक्षा एवं संविधान निर्मित बिधि के विधान की रक्षा की शपथ लेने वाले पुलिस के उच्चाधिकारियों में अपनी शपथ का निर्वाह करने के बजाय भ्रष्ट राज्य सत्ता के सम्मुख समर्पण करने का भाव गहराता जा रहा है .मलाईदार पोस्टों पर रहकर भ्रष्ट आचरण से अपने घर भरने वाले पुलिस के उच्चाधिकारी सत्तारूढ़ दल के नेताओं के यहां हाजरी लगाते देखे जाते है .पूर्व में भी राज्य सरकारों के जनप्रतिनिधियों की अनुशंषा पर पुलिस के अधिकारियों को स्थानांतरण करके उनकी पोस्टिंग की जाती रही है ,लेकिन वर्तमान भाजपा के शासन वाले राज्यों में राजनैतिक पृष्ठभूमि के आधार पर समूचे पुलिस बल की निष्ठा देखकर ही उन्हें फील्ड पोस्टिंग दी जाती है .
उत्तर प्रदेश में चुन -चुन कर यादव जाति के पुलिस अफसरों को नॉन फील्ड करके खांचों में भेजने का काम योगी सरकार ने पूरा कर लिया है .यूपी में आगरा ,सहारनपुर ,अलीगढ़ सहित अनेक जिलों में सत्ता के नशे में चूर होकर भाजपाई पुलिस के सिपाही से लेकर उच्च अधिकारियों पर हाथ उठा कर सूबे में भाजपा की सरकार होने की हनक दिखा चुके है .पुलिस के अफसरों को भाजपा के शासन वाले राज्यों में रोज ही भाजपाईयों के हाथों अपमानित होना पड़ता है ,इस अपमान के पीछे मलाईदार सीट पर लगने का लालच छिपा है .
हालांकि देश की सबसे बड़ी अदालत सुप्रीम कोर्ट द्वारा कोतवाल से लेकर जिला पुलिस अधीक्षक के पद पर तैनात अफसरों के कार्यकाल की समय सीमा दो वर्ष तय कर रखी है .दो वर्ष से कम समय में किसी भी अधिकारी का स्थानांतरण नहीं किया जाना चाहिए ,परन्तु सत्ताधारी दल के नेताओं को इन कानूनी बाध्यताओं से कोई मतलब नहीं है .सत्ताधारी दल के विधायक ,मंत्री की कृपा पाने के लिए अनेक पुलिस अफसर उनके आवास पर मंडराते रहते है .मनचाहे जिले में लगने के लिए घूस देने वाले पुलिस अफसरों द्वारा हर सत्ताधारी दल के नेताओं ,विधायक ,मंत्रियों का हुक्म बजाया जाता है .
भाजपा शासन वाले राजस्थान राज्य की पुलिस का भी सम्मान इन दिनों खतरे में है .पुलिस के उच्चाधिकारियों की वफादारी अब राज्य में क़ानून से ज्यादा भाजपाईयों का हुक्म बजाने में दिख रही है .जब इस प्रकार के रीढ़विहीन भ्रष्ट समझौतावादी पुलिस अधिकारी जिलें की सभी संवेदनशील पोस्टों पर लगते है तो फिर आम जनता के साथ पुलिस के छोटे अधिकारियों का भी खूब शोषण होता है .जिले का पुलिस कप्तान जब भाजपाईयों के रहमों करम पर नौटंकी करता है तो फिर उसके मातहत काम करने वाले पुलिस के जांच अधिकारी निष्पक्ष जाँच कर पाएंगे ,इस सवाल पर राजस्थान पुलिस के उच्चाधिकारियों के आचरण से संशय पैदा होता है .
कांग्रेस शासन के समय पूरे पांच साल तक राज्य के मुख्यमंत्री रहे अशोक गहलोत द्वारा सत्येंद्र सिंह पुलिस अधिकारी को नॉन फील्ड पोस्ट पर रखा गया .
इसी प्रकार वर्तमान भाजपा सरकार की मुख्यमंत्री राजे के नजदीकी धीरेन्द्र कमठान की गलीचा चोरी प्रकरण की जांच करने वाले पुलिस अधिकारी कपिल गर्ग का सियासी वनवास ख़त्म होने का नाम नहीं ले रहा है .
भाजपा सरकार के शासन का चार वर्ष का समय बीतने जा रहा है परन्तु ईमानदारी और निष्ठा से काम करने के कारण कपिल गर्ग से स्वयं मुख्यमंत्री ही बेहद कुपित है .हाल ही में राज्य के टोंक जिले में शहर कोतवाली थाने में एक साधारण व्यक्ति को बीजेपी के पदाधिकारियों ने पीटा ,जिसकी रिपोर्ट उस व्यक्ति ने थाने में कर दी . पुलिस द्वारा पीड़ित को न्याय दिलाने की दिशा में कार्य करते हुए मारपीट के आरोपी भाजपाईयों को थाने में बुलाया गया . इस पर भाजपा युवा मोर्चा के पदाधिकारी मयंक जैन के साथ स्थानीय विधायक अजीत मेहता का पुत्र अपने साथियों सहित थाने पर जा धमका .विधायक पुत्र ने सत्ता के नशे की हनक में पूर्व में पिट चुके परिवादी को फिर थाने में ही पीटना शुरू कर दिया .विधायक पुत्र व् उसके साथियों की इस गुंडागर्दी पर थाने में तैनात पुलिस वालों ने मारपीट से रोकना चाहा .विधायक पुत्र अपने बाप की रसुकात की दुहाई देकर थाने में ही पुलिस वालो को भी वर्दी में ही मारने लगा .इस पर थाने के पुलिस जनों ने विधायक पुत्र को उसकी ओकात बताकर 151 सीआरपीसी में हवालात में डाल दिया .
यहां बड़ा सवाल यह है कि जब थाने में सत्ताधारी गुंडे परिवादियों को पीटने लग जाए तो आप सहज ही अनुमान लगा सकते है कि प्रदेश में क़ानून के शासन की जगह सत्ताधारी भाजपाईयों की मर्जी चल रही है .
अपने पुत्र को पुलिस द्वारा बुलाने से मौके पर फिर विधायक अजीत मेहता भी पहुंच गए ,देखते ही देखते टोंक के बाजार बंद हो गए और थाने पर भाजपाईयों की भीड़ ने घेराव कर दिया .इस घटना में फिर खाकी के इकवाल के साथ क़ानून के शासन पर भाजपाईयों की मर्जी ने अपना रंग दिखा दिया .सम्पूर्ण घटना की जानकारी मुख्यमंत्री को देने की बात कहकर टोंक के विधायक मेहता जयपुर आ धमके ,वहां पर उन्होंने एक समारोह में शामिल जिला पुलिस कप्तान जो उनकी सजातीय प्रीती जैन है .उन्हें खूब बुरा भला कहकर धमकाया .विधायक मेहता ने यहां तक कहा कि पुलिस अधीक्षक को टोंक एस .पी .के पद पर उसने ही लगाया था .अब वे उनके अहसान भूल गयी .सार्वजानिक रूप से विधायक द्वारा जिला टोंक पुलिस अधीक्षक का भरपूर अपमान किया गया .टोंक की पुलिस अधीक्षक के द्वारा विधायक के सामने समर्पण कर दिया गया .इसके पश्चात एक थानेदार सहित दो पुलिस सिपाहियों को इस घटना का दोषी मानकर निलंबित कर दिया गया .
इस घटना में थाने में मारपीट करने वाले विधायक पुत्र की गुंडागर्दी के सामने खाकी वर्दी का सम्मान जिला पुलिस अधीक्षक ने ही तार तार कर दिया .विधायक के अहसानों के बोझ तले दबी पुलिस अधीक्षक प्रीती जैन के आत्म -समर्पण पर पुलिस के ही एक ईमानदार आई .पी.एस . अफसर पंकज चौधरी ने अपनी लेखनी से सवाल खड़े कर दिए .
पंकज चौधरी ने सत्ता के प्रतिष्ठान से उपकृत प्रीती जैन के रहते छोटे पुलिस जनों के सम्मान के साथ जनता को अब टोंक जिले में पुलिस द्वारा न्याय दिलाने पर भी सवाल उठाये .
इस घटना पर हमे भारत के सर्वाधिक चर्चित चुनाव अधिकारी रहे टी . ऍन .शेषन की कही पंक्तियाँ याद आ रही है कि भारतीय प्रशासनिक अधिकारी एक कॉलगर्ल यानी वैश्या की भाँती होते है ,जिस राजनैतिक दल की सरकार होती है हमारे प्रशासनिक अधिकारी उस दल के नेताओं के प्रति क़ानून से ज्यादा वफादार होते है .जिस प्रकार एक वैश्या प्रत्येक नए ग्राहक के साथ अपनी वफादारी हर नई रात जोड़ती है ,उसी प्रकार हमारे प्रशासनिक अधिकारी भी प्रत्येक दल की सरकारों के प्रति निष्ठावान होते है .
इस घटना के पश्चात टोंक जिले की जनता को अब समझ नहीं आ रहा है कि उनकी रिपोर्ट थाने कोर्ट कचहरी में देने से कार्यवाही उसी पर होगी जिस पर क्षेत्र के विधायक की मर्जी होगी .सत्ताधारी विधायक के गुंडे पुत्र की हरकतों से अपमानित हुई टोंक जिला पुलिस के अपमान पर राज्य की पुलिस के गलियारों में सन्नाटा पसरा हुआ है .
राज्य के बयानबीर गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया के अधकचरे ज्ञान के आधे अधूरे सच के बयान भी इस घटना पर अभी तक नहीं आये .राज्य की पुलिस अपने थानेदार के द्वारा केस जांच में मदद करने के बहाने अभियुक्त की पत्नी की अस्मत मांगने के कारण शर्मसार है ,तो कहीं सत्ताधारियों की कृपा के बल पर भ्रष्टाचार की मलाई खाने के लोभी पुलिस अधिकारियों के नपुंसक समर्पण के आचरण के कारण शर्मसार हो रही है .
प्रदेश की जनता इससे पूर्व देख चुकी है राज्य में भ्रष्ट मंत्रियों का कुख्यात डॉन आनंदपाल से गठजोड़ आनंदपाल की मृत्यु तक बना हुआ था ,राज्य के भ्रष्ट मंत्री यूनुस खान के आनंदपाल से गहरे संबंधों पर प्रदेश भाजपा मौन धारण कर चुकी है .और देश के प्रधानमंत्री के साथ -साथ राज्य की मुख्यमंत्री भ्रष्टाचार समाप्त करने के दावे करती है .शायद यहां उनका आशय उनके अपने मंत्रीमंडल के भ्रष्ट कुनबे के बिगड़ैल सांडो के काले कारनामो की ओर ना होकर विपक्षी दलों के भ्रष्टाचार की ओर इशारा था .
राज्य की नागौर पुलिस आनंदपाल के लिए पूर्व में भी यूनुस के इशारों पर समर्पण कर चुकी है .ऐसे में प्रदेश की जनता की भगवान् ही रक्षा करेंगे ,क्योकि बुरे से बुरे कर्मो के कर्महीन भाजपाईयों की चुनावी नैया भी तो भगवान् राम का नाम ही पार लगाता रहा है .
रिपोर्ट : मोहम्मद हफीज