पुलिस डी.जी. साहब देखो इधर, वक्फ बोर्ड अध्यक्ष नकवी की लूट में शामिल हुई जयपुर पुलिस?

आज के स्वतंत्र भारत देश में पुलिस लोकतंत्र के स्वामी बने भृष्ट नेताओ की गुलाम बनकर आज भी नेताओं का हुकुम बजाती है। कल भी पुलिस का देश की जनता से कोई सरोकार नही था आज भी स्वतंत्र राष्ट्र में भृष्ट पुलिस तंत्र देश की जनता को जनता जनार्दन नही समझता है...;

Update: 2017-08-12 07:26 GMT
हमारे देश में अंग्रेजी हुकूमत द्वारा 19वी सदी के उत्तराद्ध में पुलिस एक्ट बनाया गया था। पराधीन भारत के शासक गोरी चमड़ी के अंग्रेजो ने अपनी संगठित लूट के साम्राज्य को देश में निर्विकार भाव से चलाने के लिए अपने समर्थक पुलिस बल का गठन किया था। अंग्रेजी शासन की स्वामी भक्त पुलिस पराधीन भारत में अंग्रेज सरकार एवं उनके समर्थक राजे रजवाडो के इशारो पर काम कर करके देश की जनता पर अत्याचार करती थी। देश आजाद हो गया है गोरी चमड़ी के अंग्रेज देश छोड़कर चले गये है उनकी जगह देश में आज काली चमड़ी के अंग्रेज जो गोरी चमड़ी के अंग्रेजो की ही अवैध संताने है, उनका शासन आ गया है। पराधीन भारत में भी जनता को पुलिस उनकी अपनी नही लगी थी और यह सिलसिला आज तक भी जारी है।
आज के स्वतंत्र भारत देश में पुलिस लोकतंत्र के स्वामी बने भृष्ट नेताओ की गुलाम बनकर आज भी नेताओ का हुकुम बजाती है। कल भी पुलिस का देश की जनता से कोई सरोकार नही था आज भी स्वतंत्र राष्ट्र में भृष्ट पुलिस तंत्र देश की जनता को जनता जनार्दन नही समझता है। स्वतंत्र भारत राष्ट्र के निवासियों को भारतीय पुलिस थानों में जाते हुए कल भी डर लगता था आज भी डर लगता है। पुलिस के उच्च अधिकारी ऐ.सी. लगे बंद कमरों में बैठकर भले ही दावे कुछ भी करते रहे।
 सम्पूर्ण देश के साथ राजस्थान पुलिस की भी हकीकत कुछ इसी प्रकार की है। क्योकि कल भी भारतीय पुलिस देश के शासक अंग्रेजो के साथ खड़ी उनके हित साधने का काम करती थी आज भी पुलिस सत्ताधारियों के हुकुम की गुलाम बनकर उनके हर जायज नाजायज कामो में लठेत की भूमिका निभा रही है। राजस्थान की पुलिस आज राजधानी में ही पूर्ण रूप से सामंती बन चुकी है। इनके मुह में जनता की कमाई लूटने के खून का स्वाद लग चूका है। तभी जोधपुर में एक पुलिस का थानेदार तफ्तीश के नाम पर महिला की अस्मत मांग लेता है और कहता है कि में थानेदार गबरू जवान हूँ तेरे पति से ज्यादा मजा दूंगा।
 राजधानी जयपुर में ही दिन दहाड़े जनता के पैसे लूटने वाले थानेदार जनता को पैसे नही देने पर मुर्गा बनाकर कुकड़ू कू बुलवा रहे हैं। जुए सट्टे के साथ मादक पदार्थो की बिक्री चरम सीमा पर है तो जमीन की जालसाजी करने वालो गुंडों से मिले पैसे खाकर पुलिस पीडितो को ही हवालात दिखा रही है। यह हालात कही और के नही राजस्थान की राजधानी जयपुर के है जहाँ पोपा बाई बैठकर शासन कर रही है। राजस्थान राज्य के नव पुलिस डी.जी. अजीत सिंह साहब की ईमानदारी, कर्तव्यनिष्ठा, जनता के प्रति उनका लगाव उन्हें राजस्थान पुलिस के अधिकारीयों में सबसे अलग स्थान देता है, वरना तो अधिकांश पुलिस के उच्च अधिकारीयों के खाने के निवालो से गरीबो का चूसा हुआ खून टपकता है। यह तल्ख़ हकीकत है जो राज्य पुलिस के आचरण को बयान करके नंगा कर देती है।
जब अजीत सिंह जैसे ईमानदार अफसर अपना पुलिस प्रमुख पद का कार्यभार ग्रहण कर रहे थे उसी दिन जयपुर शहर के उत्तर जिले की पुलिस दिन दहाड़े दिनांक 01.08.2017 को भट्टा बस्ती थाना क्षेत्र में वक्फ बोर्ड के भृष्ट चेयरमेन नकवी की दिन दहाड़े लूट में भागिदार बन रही थी। दरगाह आमानीशाह बाबा की जमीन पर बैठे किरायेदारो का सामान विधि विरुद्ध हटाने में लगे वक्फ बोर्ड अध्यक्ष नकवी व् रिटायर्ड हो चुके सईद अहमद की लूट में जयपुर पुलिस लठेत बनकर क्यों खड़ी थी यह समझ से परे है। दरगाह आमानीशाह बाबा की खातेदारी की जमीन पर 20 वर्षो से किरायेदार बनकर विधि अनुसार व्यापार करने वाले मार्बल व्यवसायीयों, किरायेदारो को बिना कोई नोटिस पूर्व सूचना दिए वक्फ बोर्ड अध्यक्ष अबुबकर नकवी ने निजी जे.सी.बी. भारी क्रेन मशीनों के बल पर भारी तोड़ फोड़ मचाकर बेदखल कर दिया।
 मजेदार बात यह है कि वक्फ बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सईद अहमद 31.07.2017 को सेवा निवृत हो चुके थे। जिनकी 27.07.2017 को वक्फ बोर्ड से विदाई हो चुकी थी यह भी मौके पर मौजूद रहकर तालिबानी आतंकी फरमान जारी कर रहे थे। यहाँ पाठको को बताना उचित होगा सईद अहमद के पिता पाकिस्तान के खेबर फक्तुन्वा प्रांत के मूल निवासी थे जो भागकर जयपुर में बिना पासपोर्ट वीजा के आकर बस गये थे। वक्फ बोर्ड की विधि विरुद्ध अवैध कार्यवाही करने वाली गुंडों की भीड़ का नेतृत्व सईद अहमद, अबुबकर नकवी, शोकत कुरैशी, लतीफ़ आरको, युसूफ सदस्य कर रहे थे। मौके पर जे सी बी चलाकर क्रेनो की मदद से एक करोड़ रूपये से अधिक का मार्बल ग्रेनाईट कोटा स्टोन तोड़ कर जे. सी. बी. से गड्डे खोदकर वहां दफ़न कर दिया।
 व्यापारियों के बने कार्यालयों से लाखो रूपये की नकदी दिन दहाड़े लूट ली गई। पुलिस के विद्याधर नगर थाना प्रभारी, निरीक्षक सुरेश कुमार ने मौके पर अपने वर्दी वाले नपुसंक शोर्य का खूब प्रदर्शन करके व्यापारियों के डंडे मारकर भगा दिया। पूरे क्षेत्र को छावनी में बदलकर दिन दहाड़े 24 घंटे तक रात को लाईटे लगाकर तोड़ फोड़ कर भारी लूट मचाई गई। रात भर तोड़ फोड़ करने के बाद प्रात: चार बजे लुटेरो की संरक्षक बनी जयपुर उत्तर जिला पुलिस व वक्फ बोर्ड वाले घटना स्थल से वापस लौटे। यहाँ गोरतलब होगा कि भारत के सर्वाधिक चर्चित चुनाव आयुक्त रहे स्व. टी. एन. शेषन ने एक बार भारतीय लोकतंत्र की कडवी हकीकत बयान करते हुए कहा था कि भारतीय प्रशासनिक अधिकारी एक कॉल गर्ल यानि वैश्या होते है। जिनकी निष्ठां सिर्फ और सिर्फ सताधारी दल के शासक के प्रति होती है।
 जिस प्रकार एक वैश्या हर रात एक नए ग्राहक के प्रति वफादारी की नई कसमे खाती है उसी प्रकार सत्ता बदलते ही भारतीय प्रशासनिक अधिकारी भी वैश्या की भाँती तत्काल अपनी निष्ठा बदलकर सत्ताधारियों के प्रति वफादार बन जाते है। जयपुर शहर के उत्तर जिले के पुलिस बल की उपस्थिति में कानून के रक्षक होने का दम भरने वाली पुलिस की भीड़ की आँखों के सामने कानून के शासन का जनाजा निकलता रहा है और मौके पर मौजूद वर्दीधारी पुलिस वैश्या बनकर सत्ताधारी गुंडे अबुबकर नकवी व उसके भडवो की फोज की लूट का तमाशा देखती रही। समाज और राज्य को क्या जरुरत है इस भृष्ट पुलिस की जो जनता के खून पसीने की कमाई के दिए टेक्स के बल पर मोटी तनख्वाह पाकर जनता को ही लूटती है। यहाँ पर गोरतलब होगा कि देश की सर्वोच्च अदालत सुप्रीम कोर्ट के जज रहे आनंद नारायण मुल्ला ने इस प्रकार के भृष्ट बेईमान पुलिसियों के लिए ही कहा था कि भारतीय पुलिस वर्दीधारी गुंडों का संगठित गिरोह है, जो कुछ भी कर सकता है।
 देश की आजादी के 70 वर्षो के बाद भी राजधानी की पुलिस के गुंडों का आचरण आज भी जस्टिस आनंद नारायण मुल्ला ने कहा वैसा ही है। देश भर में अनेक बेगुनाहों की ह्त्या, बलात्कार, लूट, जमीन हड़पने के साथ हजार प्रकार के आरोप पुलिस की वर्दी पर है। मेरठ का माया त्यागी काण्ड जिसमे माया त्यागी के पति, उसके देवर, जेठ की हत्या करके पुलिस ने सामूहिक बलात्कार करके माया त्यागी के अंगो में डंडे डाल दिए थे। राजस्थान राज्य में जुगताराम का लिंग ही हमारी जन सेवक पुलिस ने काट दिया था।
दारा सिंह हत्याकांड के साथ अनेक केसो में राज्य पुलिस अफसर सजा काट चूके है, फिर भी ये भृष्ट सत्ताधारियों के हाथो की कठपुतली बन जाते है ताकि थानों में मलाईदार पोस्टो पर लग कर अपने परिवार को जनता का खून चूसकर हराम के धन से ऐश मोज करें। दरगाह आमानिशाह से कुछ सो मीटर की दुरी पर बसी किशन बाग़ की अवैध बस्ती को हटाने के लिए 18 महीने पहले राज्य के हाई कोर्ट से आदेश हो रखे है, परन्तु आज तक नाले पर बसी अवैध बस्ती नही हटी है। इस अवैध बस्ती में भट्टा बस्ती थाने के पुलिसिये हाई कोर्ट के स्टे आदेश के बाद भी अवैध मकान बनाने के हजारो रूपये प्रतिदिन वसूल रहे हैं।
जुए सट्टा के साथ अफीम, चरस, गांजा की बिक्री का यह थाना क्षेत्र जयपुर में प्रमुख मंडी के रूप में जाना जाता है। जयपुर शहर में आज अधिकांश भृष्ट अधिकारी लगे है। सम्पूर्ण उत्तर जिले में पुलिस डी.सी.पी. सत्येन्द्र सिंह व् राजेश मील के आदेशो की परवाह कोई कनिष्ठ पुलिस अफसर नही करते है। जिले में वसूली का खेल चरम सीमा पर पहुँच गया है। कांग्रेस शासन में सत्येन्द्र सिंह को मुख्यमंत्री स्वयं कमजोर अधिकारी मानकर उन्हें सदैव फिल्ड पोस्ट से दूर रखते थे। हमारे द्वारा डी.सी.पी. सत्येन्द्र सिंह व राजेश मील से मिलने के बाद भी जाल साजी के केस में भट्टा बस्ती का थानेदार परिवादियों को ही धमका रहा है।
 भाजपा शासन में इनकी अनुभव हीनता पुलिस की वर्दी पर गहरे दाग लगा रही है। राज्य पुलिस के पुलिस प्रमुख अजीत सिंह शेखावत साहब से हमारी पुरजोर शब्दों में मागं है कि भृष्ट वक्फ बोर्ड अध्यक्ष नकवी जिन पर जाकिर नायक से मिलने के भी आरोप है, उनकी दिन दहाड़े लूट में शामिल पुलिस जनों के आचरण की जांच कराकर उन्हें दण्डित करें और भविष्य में भृष्ट नकवी और उसके अपराधिक गिरोह को पुलिस बल देने पर रोक लगावे।
 यदि पुलिस वर्दी में उपस्थित रहकर संगठीत लूट में शामिल होगी तो फिर राज्य में कानून का शासन कहा बचेगा ? इस संगठित दिन दहाड़े हुई लूट के आरोपियों अबुबकर नकवी, सईद अहमद शोकत कुरैशी, लतीफ़ आरको व जमिलुर्रहमान व उसके गुंडे पुत्रो के विरुद्ध अपराधिक बल प्रयोग करके लूटी गई राशि व तोड़ फोड़ के लिए न्यायालय के आदेश पर मुकदमा कायम हो गया है। राजस्थान उच्च न्यायालय में भी इनके आचरण हेतु एवं पुलिस मिलीभगत की जांच के लिए याचिका दायर की गई है।

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लेखक : मो. हफीज, व्यूरो चीफ, राजस्थान

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