राजस्थान में 10 रूपये में करवाया धर्म परिवर्तन
जोधपुर में दस रुपए में धर्म परिवर्तन वाले केस में राजस्थान हाईकोर्ट ने सख्त टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा है कि सिर्फ निकाह करने से धर्म परिवर्तन नहीं हो सकता।;
जोधपुर: जोधपुर में दस रुपए में धर्म परिवर्तन वाले केस में राजस्थान हाईकोर्ट ने सख्त टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा है कि सिर्फ निकाह करने से धर्म परिवर्तन नहीं हो सकता। दरअसल पायल नाम की एक लड़की के भाई चिराग सिंघवी का आरोप है कि 10 रुपये के स्टांप पेपर पर दस्तखत करवाकर उसकी बहन का धर्म परिवर्तन कराया गया है। इस बारे में कोर्ट ने राजस्थान सरकार से जवाब मांगा है कि वह बताए कि धर्म परिवर्तन का नियम-कानून क्या है?
क्या है पूरा मामला
जोधपुर में एक हिंदू लड़की घर से भागकर मुसलमान बन गई। इसके बाद परिवार हाईकोर्ट पहुंचा तो खुलासा हुआ कि दस रुपये के स्टांप पेपर पर हस्ताक्षर कराकर पायल सिंघवी नाम की हिंदू लड़की आरिफा बन गई। परिवार का आरोप है कि बहला फुसलाकर पायल का धर्म परिवर्तन कराया गया है।
धर्म परिवर्तन करने के लिए देश में कोई नियम क्यों नहीं है?- हाईकोर्ट
इसपर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा है कि जब कोई इंसान अपना नाम बदलता है तो उसके लिए नियम कायदे हैं, तो फिर धर्म परिवर्तन करने के लिए देश में कोई नियम क्यों नहीं है? अगर है तो क्या हैं? बताया जाएं।
कोर्ट ने यह भी कहा है कि सिर्फ निकाह करने से धर्म परिवर्तन नहीं हो सकता. कल तो कोई भी कह देगा कि मैं मुसलमान हो गया, अगले दिन ईसाई और फिर तीसरे दिन हिंदू बन गया. ये तो नहीं हो सकता.इसके लिए कोई ना कोई नियम या कानून तो होगा.
न्यायाधीश गोपाल कृष्ण व्यास ने की तल्ख टिप्पणी
न्यायाधीश गोपाल कृष्ण व्यास ने तल्ख टिप्पणी करते हुए यहां तक कह दिया कि कल मैं भी दस रुपए में शपथ पत्र पर स्वयं को गोपाल मोहम्मद लिख सकता हूं क्या? पायल के घरवालों के मुताबिक, वो 25 अक्टूबर तक घर में ही रह ही थी, अचानक वो गायब हो गई। परिवार जब पुलिस के पास पहुंचा तो पता चला कि पायल मुसलमान बन चुकी है और 14 अप्रैल 2017 को उसका निकाह फैज मोदी के साथ हो चुका है।
कोर्ट ने पायल को नारी निकेतन भेजने का आदेश दिया
लड़की के भाई चिराग सिंघवी की अर्जी पर राजस्थान हाईकोर्ट ने पायल उर्फ आरिफा को नारी निकेतन भेजने और पुलिस को पूरी जांच करके रिपोर्ट देने के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि निकाहनामा में जो गवाह हैं और कोर्ट में जो शपथ पत्र दिया है वो अलग अलग है ऐसे में फैज मोदी की तरफ से पेश किए गए दस्तावेज फर्जी लग रहे हैं।
अब सात नवंबर को राज्य सरकार को इस पर कोर्ट को जवाब देना है। फिलहाल इस मामले के सामने आने के बाद धर्म परिवर्तन को लेकर बड़ी बहस छिड़ गई है।