मैडम चीफ मिनिस्टर, यह 2017 है, 1817 नहीं', राहुल गांधी
राजस्थान में वसुंधरा सरकार ने एक अध्यादेश जारी किया है, जिसके मुताबिक किसी भी जज, मजिस्ट्रेट या लोकसेवक के खिलाफ सरकार की मंजूरी लिए बिना कोई जांच नहीं की जाएगी. इतना ही नहीं सरकार की मंजूरी के बाद ही मीडिया इस विषय में खबर चला सकेगा.;
राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे अपने एक अध्यादेश को लेकर सियासी गलियारों में बहस तेज हो गई है. बता दे राजस्थान सरकार के अध्यादेश को लेकर कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने राज्य की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे पर निशाना साधा है. राहुल ने रविवार को ट्वीट कर लिखा कि 'मैडम चीफ मिनिस्टर, हम 21वीं सदी में रह रहे हैं. यह साल 2017 है, 1817 नहीं.'
राजस्थान में वसुंधरा सरकार ने एक अध्यादेश जारी किया है, जिसके मुताबिक किसी भी जज, मजिस्ट्रेट या लोकसेवक के खिलाफ सरकार की मंजूरी लिए बिना कोई जांच नहीं की जाएगी. इतना ही नहीं सरकार की मंजूरी के बाद ही मीडिया इस विषय में खबर चला सकेगा.
23 अक्टूबर से शुरु हो रहे विधानसभा सत्र में इस अध्यादेश को कानून का रुप दे दिया जाएगा. लेकिन इस अध्यादेश को लेकर सरकार विरोधियों के निशाने पर आ गई है.
इससे पहले शनिवार को राजस्थान प्रदेश कांग्रेस समिति के अध्यक्ष सचिन पायलट ने इस मामले में राज्य के वसुंधरा राजे सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, 'हम सरकार से इस कदम से हैरान हैं. इससे पता चलता है कि सरकार भ्रष्टाचार को संस्थागत करने की कोशिश कर रही है. राज्य सरकार इसके जरिए उन लोगों को बचाना चाहती है, जिनके जरिए राज्य में भ्रष्टाचार और घोटाले करवाए गए हैं.
आप नेता कुमार विश्वास ने तो इस अध्यादेश के मुद्दे पर वसुंधरा राजे की तुलना उत्तर कोरिया के सनकी तानाशाह किम जोंग उन से कर डाली है. कुमार विश्वास ने कहा कि लोकतंत्र में इतनी सहिष्णुता तो होनी चाहिए कि लोगों को अपनी बात कहने का अवसर मिले.
अध्यादेश के अनुसार, राज्य सरकार की मंजूरी नहीं मिलने तक जिसके खिलाफ मुकदमा दर्ज करवाना है, उसकी तस्वीर, नाम, पता और परिवार की जानकारी सार्वजनिक नहीं की जा सकेगी। इसकी अनदेखी करने पर 2 साल की कैद और जुर्माने का प्रावधान किया गया है.