राजस्थान सरकार का बड़ा ऐलान, बिना इजाजत सरकारी अधिकारी या जज की नहीं होगी जांच

Update: 2017-10-21 12:09 GMT

जयपुर : राजस्थान सरकार ने एक अध्यादेश जारी किया है, जिसके तहत अब राजस्थान में किसी भी सरकारी अधिकारी या जज के खिलाफ बिना सरकार की इजाजत के किसी तरह की जांच नहीं की जाएगी।

अब सरकार से जांच के आदेश के लिए मंजूरी लेने के बाद ही किसी भी जज, मजिस्ट्रेट या लोकसेवक के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। अध्यादेश के मुताबिक, कोई भी लोकसेवक अपनी ड्यूटी के दौरान लिए गए निर्णय पर जांच के दायरे में नहीं आ सकता है, सिवाय कोड ऑफ क्रिमिनल प्रोसिजर 197 के।

इतना ही नहीं, किसी लोकसेवक के खिलाफ कोई भी एफआईआर दर्ज नहीं करा सकता है। इतना ही नहीं पुलिस भी एफआईआर दर्ज नहीं कर सकती और न ही किसी लोकसेवक के खिलाफ कोई कोर्ट जा सकता है और न हीं जज किसी लोकसेवक के खिलाफ कोई आदेश दे सकता है।

अध्यादेश के अनुसार सरकार के स्तर पर सक्षम अधिकारी को 180 दिन के अंदर जांच की इजाजत देनी होगी, अगर ऐसा नहीं किया गया तो इसे स्वीकृत माना जाएगा। साथ ही किसी भी जज, मजिस्ट्रेट या लोकसेवक का नाम और पहचान मीडिया तब तक जारी नहीं कर सकता है जब तक सरकार के सक्षम अधिकारी इसकी इजाजत नहीं दें। वहीँ क्रिमिनल लॉ राजस्थान अमेंडमेंट ऑर्डिनेंस 2017 में साफ तौर पर मीडिया को लिखने पर रोक लगाई गई है।

आपको बता दें 23 अक्टूबर से विधानसभा सत्र शुरू हो रहा है। ऐसे में इस तरह की अध्यादेश लाने पर वसुंधरा सरकार पर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं। हालांकि अध्यादेश में ये भी कहा गया है कि चूंकि विधानसभा का सत्र नहीं चल रहा है, लिहाजा अध्यादेश लाना जरूरी है। इसे विधानसभा सत्र में कानून बनाने के लिए पेश किया जाएगा।

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