12वीं के बाद ज्योतिष के माध्यम से करें विषय का चुनाव

Update: 2018-04-21 07:11 GMT
10वीं और 12वीं की परीक्षा हो चुकी है। और आपको अच्छे नबंर भी मिल जाएंगे। अब एक सवाल जरूर आपको परेशान कर रहा होगा कि कौन से विभाग को चुनें। और क्या आपका चुनाव सही होगा, कोर्स के बाद आपके पास नौकरी के कितने विकल्प मौजूद होंगे। ऐसा न हो कि गलत विभाग चुन लेने से बाद मे डिग्री लेकर नौकरी के लिए भटकना पड़े।

 जातक की आजीविका का निर्धारण आधुनिक युग में ज्योतिष शास्त्र के द्वारा जन्म कुण्डली के माध्यम से आसानी से जाना जा सकता है। यदि जातक की वृत्ति का निर्धारण कुण्डली के माध्यम से पहले ही हो जाता है तो वह जातक उस क्षेत्र में, कार्य मे, तथा व्यापार में अल्प समय में ही सफल होकर अर्थार्जन करता है। ज्योतिष शास्त्र का आदि जातक ग्रंथ बृहज्जातक में आचार्य वराहमिहिर ने किस कार्य से जीविकोपार्जन होगा, इस प्रश्न का समाधान "कर्माजीवाध्याय" में बताया है। वहाँ ग्रह के माध्यम से जातक के कर्म क्षेत्र का निर्धारण ग्रहयोग एवं परिगणना से सुलभता से प्राप्त होता है।
होरेन्द्वोर्दशमगतैर्विकल्पनीया, भेन्द्वर्कास्पदपतिगांशनाथवृत्त्या।
अर्थात लग्न और चन्द्र दोनों से दशम स्थान में एक, दो या अधिक ग्रह स्थित हों तो उन ग्रहों की अन्तर्दशा में पूर्वोक्त फल की प्राप्ति होगी। यदि लग्न और चन्द्र दोनों से दशम स्थान में कोई ग्रह नहीं हो तो अर्थ का दाता होगा, यह लिखते हैं कि लग्न, चन्द्र, और सूर्य इन तीनों से दशम भाव के स्वामी जिस ग्रह के नवांश में हो उस ग्रह की वृत्ति (व्यापार) से धन लाभ समझना चाहिए। लग्न, चन्द्र, या रवि से दशम भाव का स्वामी, जिस नवांश मे हो, उसका स्वामी यदि रवि हो तो छात्र आयुर्वेदिक, यूनानी या होम्योपैथिक डॉक्टर बनने का विकल्प भी चुन सकते हैं। ऑडियोलॉजी या स्पीच थेरेपी जैसे क्षेत्रों में भी करियर बनाया जा सकता है। 
 
नवांश का स्वामी चन्द्र हो तो छात्र के लिए समुद्री विज्ञान में भी करियर बनाने के मौके हैं, जहां नर्सिंग, डेंटिस्ट्री और वेटनरी साइंस के विकल्प हैं। फार्मोकोलॉजी, फोरेंसिक साइंस, एन्वायरमेंटल साइंस, एग्रीकल्चर, हॉर्टिकल्चर, फ्लोरीकल्चर, फूड टेक और न्यूट्रीशन साइंस में भी करियर बनाया जा सकता है। पूर्वोक्त नवांश का स्वामी मंगल हो तो प्रशासनिक अधिकारी, इंजीनियरिंग के क्षेत्र में एनर्जी सेक्टर, डेटा एनालिटिक्स, मैन्युफैक्चरिंग और ऑटो सेक्टर, कंप्यूटर प्रोग्रामिंग, वेबसाइट, सॉफ्टवेयर , में करियर का विकल्प होता है। यदि पूर्वोक्त नवांश का स्वामी बुध हो तो छात्र का रचनात्मक कार्यों में मन लगता है डिजाइनिंग, पेंटिंग में भी मन लगता है तो ऐसे छात्र इंटीरियर डिजाइनिंग में डिप्‍लोमा कर सकते हैं. डिप्‍लोमा शॉट टर्म कोर्स के रूप में आपको जल्‍द ही अर्निंग के मौके देगा, आप अपना फर्म भी खोल सकते हैं। यदि पूर्वोक्त नवांश का स्वामी गुरु हो तो अध्यापन, उच्च शिक्षा, के क्षेत्र में आजीविका प्राप्ति के योग बनते हैं।

यदि पूर्वोक्त नवांश का स्वामी शुक्र हो तो एयर फोर्स, कामर्स, मैनेजमेंट, के क्षेत्र में आजीविका प्राप्ति के योग बनते हैं। यदि पूर्वोक्त नवांश का स्वामी शनि हो तो शिल्प ( दस्तकारी), आर्किटेक्चर, के क्षेत्र में आजीविका प्राप्ति के योग बनते हैं, इसके अलावा देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी योग पर जोर देते हैं। स्वस्थ रहने के लिए वो लोगों को योग करने की सलाह भी देते हैं. इन दिनों लोगों में योग के प्रति जागरुकता भी बढ़ी है. ऐसे में आप योग को करियर के तौर पर अपना सकते हैं, आपको इसके लिए कोर्स के साथ प्रैक्‍टिस की भी बहुत जरूरत होगी, 12वीं के बाद छोटा सा कोर्स करके इसमें आप धीरे-धीरे आगे बढ़ सकते हैं, फिटनेस को लेकर आजकल लोग बेहद जागरूक हो रहे हैं. लिहाजा आप जिम में इंस्‍ट्रक्‍टर भी आप हो सकते हैं। लेकिन यहां भी इंट्रेस्‍ट का ही सवाल है. यह एक बेहतर करियर ऑप्‍शन है, आप 6 से 8 महीने के कोर्स में आप किसी भी बड़ी जिम में ट्रेनर इंस्‍ट्रक्‍टर हो सकते हैं ।
इस समय वैज्ञानिक युग एवं व्ययाधिक्य युग में बाल्यकाल में वृत्ति निर्धारण के सम्बन्ध में पूर्वोक्त प्रक्रिया अतीव महत्वपूर्ण और चमत्कारी है। जो छात्र के विकास में अपना महत्वपूर्ण स्थान रखती है।
लेखक- ज्योतिषाचार्य पं गणेश प्रसाद मिश्र,लब्धस्वर्णपदक,नेट, शोध छात्र ज्योतिष विभाग काशी हिन्दू विश्वविद्यालय

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