बाबा का एक और चमत्कार, निर्धन लाला ले आया सवा मन लड्डू

Update: 2017-11-07 03:10 GMT
जय गुरूदेव, नीवं करोरी महराज जी की क्रपा कब किस पर बरस जाय कहा नहीं जा सकता. बाबा बड़े ही दयालू है जब भी अपने भक्तों को दुखी पाया किसी न किसी भेष में अवश्य पहुंच गये और उनकी मदद की. 
बांबा जी कब , किस पर कैसी दया कर दे , कुछ कहा नही जा सकता, इस बार बाबा की दया पात्र बने लाला रामकिशन ( हल्द्वानी ) बताते है.
" मेरी माली हालत बहूत खराब थी.  काम धन्धा कुछ नही था. बडे भाई की दुकान पर मै उनके कर्मचारी की हैसियत से काम करता था.  बडे भाई के के साथ ही एक बार मै कैंची धाम गया. बाबा ने मुझसे कहा , "" मै तुझसे जो मागुँगा , लायेगा ?" मैने कहा "अगर हिम्म्त हूई तो जरूर लाऊँगा." तब बाबा ने कहा " देख सवा मन देसी घी के लड्डु अपने हाथ से बनाकर लाना हनुमान जी के लिये. बोल लायेगा ?"". मै मन ही मन बोल उठा  " अरे ये क्या कह दिया आपने , मेरे पास तो सवा किलो आटा भी अपना नही.". फिर भी मेरे मूँह से निकल गया , " अच्छा महाराजजी,"और वापस हल्द्वानी आ गये.
कराया को सब कुछ बाबा ने ही , दो तीन हफ्तो मे मैने सवा मन लड्डु अपने हांथ से तैयार कर लिये. उन्हे लेकर बाबा जी के पास हाजिर हूआ !बाबा ने लड्डुओ का भोग लगवाकर मेरे हाथ से ही सबको प्रसाद पवाया.
इसके बाद मै एक बार फिर कैंची गया. वहाँ भण्डारा चल रहा था.  मैने भी सेवा की इच्छा की तो बाबा जी बोले , "" यहाँ नही तु अपनी दुकान खोल."" मैने कहा ,"" बाबा मै तो पागल हूँ. दुकान कैसे करूँगा. तब बाबा बोले , "" देख, एक तु पागल और एक मै पागल हूँ.  जा अपना काम शुरू कर."" और मुझे गीता की एक पुस्तक देते हूये कहा , "अपनी घरवाली को दे देना. कहना, पढा करे ."" न मालुम क्या अर्थ था इसका .
बाबा जी ही जाने कि कैसे कैसे , क्या क्या , कहाँ कहाँ से हो गया , पर उनके चमत्कार स्वरूप आज मेरे पास एक बडी दुकान ( स्टैण्डर्ड स्वीट हाउस ) है. और जिस हैसियत से मै ( कर्मचारी ) से मै स्वंय काम करता था, उस हैसियत के दस कर्मचारी आज मेरी दुकान पर काम करते है. बाबा जी की दया ही दया है . सब बदल गया उनकी कृपा से.
जय गुरूदेव अनंत कथामृत
आज फिर बाबा ने अपने भक्त पर अपनी असीम क्रपा बरसा दी. आज बाबा का दिन मंगलवार सभी लोग इस बात को अधिक से अधिक शेयर करें. 

Similar News