न करें सोमवार को भगवान शिव की पूजा में इन चीजों का प्रयोग, नहीं तो...

भोलेनाथ को सोमवार अति प्रिय है और जो इस दिन उनकी पूजा करता है उसके वारे-न्यारे हो जाते हैं.

Update: 2021-11-01 02:24 GMT

भगवान शिव की पूजा विशेष रूप से सोमवार को होती है और माना जाता है कि भोलेनाथ को सोमवार अति प्रिय है और जो इस दिन उनकी पूजा करता है उसके वारे-न्यारे हो जाते हैं. वैसे तो भगवान शिव सिर्फ जल चढ़ाने से भी भक्त पर प्रसन्न हो जाते हैं पर अगर कोई भक्त पूरे विधि-विधान से उनकी पूजा करे, कुछ खास चीजें चढ़ाएं तो भोलेनाथ प्रसन्न होकर उसे मनचाहा फल पाने का वरदान भी दे देते हैं.

भगवान शिव का ही एक नाम शंकर भी हैं. शं यानी आंनद एवं कर यानी करने वाला अर्थात आंनद को करने वाला या देने वाला ही शंकर हैं. शिव को जानने के बाद कुछ शेष रह नहीं जाता इसी प्रकार मानकर सोमवार को शिव का पूजन पूरे विधि-विधान से करना चाहिए.

शिव पूजा में इन बातों का रखें खास ख्याल

शिव पूजा में बहुत सी ऐसी चीजें अर्पित की जाती हैं जो अन्य किसी देवता को नहीं चढ़ाई जाती, जैसे- आक, बिल्वपत्र, भांग आदि. इसी तरह माना जाता है कि शिव पूजा में कई ऐसी चीजें होती हैं जो आपकी पूजा का फल देने की बजाय आपको नुकसान पहुंचा सकती हैं.

हल्दी

भगवान शिव की पूजा में हल्दी नहीं चढ़ाई जाती है. हल्दी का इस्तेमाल मुख्य रूप से सौंदर्य प्रसाधन में किया जाता है. शास्त्रों के अनुसार शिवलिंग पुरुषत्व का प्रतीक है, इसी वजह से महादेव को हल्दी नहीं चढ़ाई जाती है.

फूल

शिव को कनेर और कमल के अलावा लाल रंग के फूल प्रिय नहीं हैं, शिव को केतकी और केवड़े के फूल चढ़ाने का निषेध किया गया है.

कुमकुम या रोली

शास्त्रों के अनुसार शिव जी को कुमकुम और रोली नहीं लगाई जाती है।

शिव पूजा में वर्जित है शंख

शंख भगवान विष्णु को बहुत ही प्रिय हैं, लेकिन शिव जी ने शंखचूर नामक असुर का वध किया था इसलिए शंख भगवान शिव की पूजा में वर्जित माना गया है.

नारियल पानी

नारियल पानी से भगवान शिव का अभिषेक नहीं करना चाहिए. मान्यता के अनुसार नारियल को लक्ष्मी का स्वरूप माना जाता है, इसलिए सभी शुभ कार्य में नारियल को प्रसाद के तौर पर ग्रहण किया जाता है लेकिन कहा जाता है कि शिव पर अर्पित होने के बाद नारियल पानी ग्रहण योग्य नहीं रह जाता है.

तुलसी

तुलसी का पत्ता भी भगवान शिव को नहीं चढ़ाना चाहिए. इस संदर्भ में असुर राज जलंधर की कथा है जिसकी पत्नी वृंदा तुलसी का पौधा बन गई थी. भगवान शिव ने जलंधर का वध किया था इसलिए वृंदा ने भगवान शिव की पूजा में तुलसी के पत्तों का प्रयोग न करने की बात कही थी.

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