कार्तिक पूर्णिमा आज, जानिए स्नान, दान और पूजन का शुभ मुहूर्त

Update: 2021-11-19 04:44 GMT

प्रत्येक माह शुक्ल पक्ष की आखिरी तिथि को जब चंद्रमा अपनी पूर्ण कलाओं में आ जाता है तो वह तिथि पूर्णिमा कहलाती है। धार्मिक और ज्योतिष दोनों ही दृष्टि से पूर्णिमा महत्व माना जाता है। इस बार कार्तिक मास की पूर्णिमा 19 नवंबर 2021 दिन शुक्रवार को पड़ रही है। कार्तिक मास की पूर्णिमा का विशिष्ट महत्व माना गया है, क्योंकि इस दिन काशी में देव दिवाली भी मनाई जाती है। पूर्णिमा तिथि पर चंद्रमा के साथ भगवान विष्णु के पूजन किया जाता है। 

ज्योतिष में पूर्णिमा तिथि को बेहद शुभ माना जाता है। मान्यता है कि कार्तिक मास की पूर्णिमा को भगवान विष्णु के मत्स्यावतार का प्राकट्य हुआ था। इस वजह से इस तिथि का विशेष महत्व है। इस दिन पवित्र नदी में स्नान और दान करने का महत्व शास्त्रों में वर्णित है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन भगवान शिव ने त्रिपुरासुर नामक राक्षस का अंत किया था। जिसके कारण इसे त्रिपुरारी पूर्णिमा भी कहते हैं। वहीं सिख धर्म में इस दिन को बेहद खास माना जाता है। इस दिन सिखों के प्रथम गुरु गुरुनानक देव का अवतरण हुआ था। जानिए दान व पूजन का शुभ मुहूर्त-

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कार्तिक पूर्णिमा के दिन पवित्र नदी में स्नान करने से व्यक्ति को पापों से मुक्ति मिल जाती है। मान्यता है कि इस दिन स्वर्ग से देवतागण भी आकर गंगा में स्नान करते हैं। इसलिए कार्तिक पूर्णिमा के दिन गंगा स्नान जरूर करना चाहिए। अगर आपका गंगा स्नान के लिए जाना संभव नहीं है तो घर पर ही पवित्र जल में गंगाजल मिलाकर स्नान किया जा सकता है। 

कार्तिक पूर्णिमा पर दान का महत्व- कार्तिक पूर्णिमा के दिन हर व्यक्ति को अपनी सामर्थ्य अनुसार दान करना चाहिए। शास्त्रों के अनुसार, इस दिन फल, अनाज, वस्त्र और गुड़ आदि चीजों का दान किया जा सकता है। शास्त्रों में पूर्णिमा तिथि मां लक्ष्मी को समर्पित मानी जाती है। मान्यता है कि इस दिन मां लक्ष्मी की प्रिय वस्तुओं मिठाई, दूध और नारियल का दान करने से धन की देवी माता लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं।

कार्तिक पूर्णिमा 2021 शुभ मुहूर्त-  पूर्णिमा तिथि 18 नवंबर को दोपहर 12 बजकर 01 मिनट से प्रारंभ होकर, 19 नवंबर को दोपहर 2 बजकर 28 मिनट पर समाप्त होगी। पूर्णिमा तिथि के दिन स्नान का शुभ मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 28 मिनट तक है। दान करने का शुभ समय 19 नवंबर को सूर्यास्त से पहले तक है।

कार्तिक पूर्णिमा पर तुलसी पूजन क्यों किया जाता है? 

कार्तिक पूर्णिमा के दिन तुलसी पूजा का विशेष महत्व होता है। अगर आप देवउठनी एकादशी के दिन तुलसी पूजा नहीं कर पाएं हैं तो कार्तिक पूर्णिमा के दिन कर सकते हैं। मान्यता है कि ऐसा करने से घर में सुख-समृद्धि का वास होता है।

कार्तिक पूर्णिमा पूजन विधि-

कार्तिक पूर्णिमा पर देव दीपावली भी होती है इसलिए इस दिन शाम को किसी नदी, सरोवर या धर्म स्थान पर दीपदान अवश्य करना चाहिए।

कार्तिक पूर्णिमा पर ब्रह्ममुहुर्त में किसी पवित्र नदी में स्नान करना चाहिए या घर पर ही पानी में गंगाजल डालकर स्नान करें।

व्रत का संकल्प लेकर भगवान विष्णु के समक्ष शुद्ध देसी घी का दीपक प्रज्वलित करना चाहिए।

अब तिलक करके धूप-दीप, फल, फूल वह नैवेद्य से विधिवत् पूजन करें।

शाम को पुनः भगवान विष्णु का पूजन करें, उन्हें देसी घी में भूनकर बनाया गया आटे का सूखा कसार और पंचामृत चढ़ाएं।

विष्णु जी के साथ मां लक्ष्मी का भी पूजन व आरती करें।

चंद्रमा निकलने के बाद अर्घ्य दें और फिर व्रत का पारण करें।


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