1948 और 1952 ओलंपिक गोल्ड मेडलिस्ट हॉकी टीम के सदस्य रहे केशव दत्त नहीं रहे। वे इस टीम के एक मात्र जीवित खिलाड़ी थे। पूर्व सेंटर हाफ बैक दत्त साहब ने मंगलवार देर रात कोलकाता में आखिरी सांस ली। वे हॉकी में भारत के स्वर्णिम युग का हिस्सा थे।
15 अगस्त 1947 को भारत आजाद हुआ था और 12 अगस्त 1948 को आजाद भारत की टीम ने अंग्रेजों को उनकी ही सरजमीं पर वेम्बले स्टेडियम में 4-0 से करारी शिकस्त देकर ओलंपिक गोल्ड अपने नाम किया था, केशव साहब उस टीम का हिस्सा थे। ओलंपिक से पहले दत्त महान हॉकी खिलाड़ी मेजर ध्यानचंद की अगुवाई में 1947 में पूर्वी अफ्रीका के दौरे पर भी गए और ओलंपिक 1952 में स्वर्ण पदक जीतने वाली भारतीय हॉकी टीम का भी हिस्सा रहे।
भारतीय टीम ने इन खेलों के फाइनल में नीदरलैंड को एकतरफा मुकाबले में 6-1 से हराकर लगातार पांचवीं बार ओलंपिक खिताब जीता था। केशव दत्त का जन्म 29 दिसंबर, 1925 को लाहौर में हुआ था। विभाजन के बाद मुंबई में कुछ वर्ष गुजारने के बाद वे 1950 में कोलकाता चले आए और यहीं के होकर रह गये। केशव दत्त ने लंबे समय तक मोहन बागान हॉकी टीम का भी प्रतिनिधित्व किया था। दोनों ओलंपिक में मिला मेडल उन्होंने भारत चीन युद्ध के बाद आर्मी फंड को दान में दे दिया था।