मायावती और अखिलेश के बाद, यूपी के विधानसभा उपचुनाव के लिए RLD ने किया ये एलान

17वीं लोकसभा चुनाव में रालोद तीन सीटों पर लड़ी थी

Update: 2019-06-05 10:12 GMT

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में सपा,बसपा और रालोद के गठबंधन के बाद भी जितनी सीटे जीतनी चाहिए उतना वो जीत नही सके। लोस के परिणाम आने के बाद गठबंधन एक दूसरे पर अपना हार का ठिकरा फोड़ रहा है। अब गठबंधन के तीसरे घटक रालोद ने बुधवार को कहा कि वह उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा उपचुनाव लड़ेगा। लेकिन रालोद ने उम्मीद जताई कि गठबंधन बना रहेगा। रालोद के प्रदेश अध्यक्ष मसूद अहमद ने कहा कि राष्ट्रीय लोक दल एक राजनीतिक दल है और हम उत्तर प्रदेश विधानसभा के उपचुनाव में मैदान में उतरेंगे । हालांकि प्रदेश के राजनीतिक परिदृश्य पर टिका टिप्पणी करने से बचते रहे।

जहां तक प्रत्याशियों के चयन की बात है तो यह फैसला हमारे राष्ट्रीय नेतृत्व- चौधरी अजीत सिंह और जयंत चौधरी करेंगे । लोकसभा चुनाव को लेकर पूछे सवाल पर अहमद ने कहा कि रालोद समाजवादी पार्टी के साथ रहा है और हमें अखिलेश यादव के कोटे से सीटें मिली थीं। गठबंधन में सपा को 37, बसपा को 38 और रालोद को 3 सीटे मिली थी। उन्होंने कहा कि हमारी इच्छा है कि गठबंधन एकजुट रहे और मजबूत रहे । वस्तुतः कांग्रेस को भी गठबंधन का हिस्सा होना चाहिए था।

इस सवाल पर कि रालोद कौन-कौन सी सीटों पर प्रत्याशी उतारेगा, अहमद ने फैसला पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व पर छोड़ते हुए कहा कि आने वाले कुछ दिनों में राष्ट्रीय नेताओं के साथ बैठक के दौरान इस मामले पर चर्चा होगी। रालोद के लिए उत्तर प्रदेश विधानसभा उपचुनाव महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे पार्टी को उत्तर प्रदेश विधानसभा में अपनी उपस्थिति महसूस कराने का मौका मिलेगा । 17वीं लोकसभा चुनाव में रालोद तीन सीटों पर लड़ी थी लेकिन उसके प्रत्याशी किसी भी सीट पर विजयी नहीं हुए। रालोद प्रमुख अजीत सिंह मुजफ्फरनगर से, उनके बेटे जयंत चौधरी बागपत से और कुंवर नरेंद्र सिंह मथुरा से चुनाव हार गए। यूपी के 2017 विधानसभा चुनाव में रालोद ने 277 सीटों पर प्रत्याशी मैदान में उतारे लेकिन 266 प्रत्याशियों की जमानत जब्त हो गई थी । 

आपको बतादे कि लोस के परिणाम के बाद से ही सपा बसपा में रार छिड़ गया। और आखिरी छड़ों में दोनों पार्टी विधानसभा उपचुनाव में अकेले लड़ने का मन बना लिया है। क्यों कि मायावती का ओरोप है कि बसपा को यादवों का वोट नही मिला है। यदि ये वोट मिला रहता तो पार्टी १० सीटों से ज्यादा पर जीतती। तो अखिलेश यादव भी बसपा पर आरोप लगाये कि हमें दलित वोट नही मिला है। यदि दलित वोट मिलता तो 37 सीटों में से  5 सोटों पर हम सिमित नही रहते। रोलोद को तो ३ सीटे मिली थी फिर भी वो कुछ खास नही किये। और वो पूरी साटों पर हार गये। 

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