गाजियाबाद कोर्ट पुलिस छावनी में तब्दील, अम्बेडकर की मूर्ति हटाई, 7 थानों की फोर्स लगाई

Update: 2018-01-02 08:33 GMT

गाजियाबाद- गाजियाबाद कोर्ट आज छावनी में तब्दील कर दिया गया जब पुलिस और प्रशासन का बड़ा अमला कोर्ट पहुंचा और कोर्ट में लगाई गई अम्बेडकर पूर्ति को हटाया.  31 दिसंबर को वकीलों ने कोर्ट में चुपचाप इस मूर्ति लगाई थी. गाजियाबाद जिले में इतनी बड़ी घटना से कोर्ट परिसर में चप्पे चप्पे पुलिस तैनात थी. पड़ोसी जिले नॉएडा और हापुड़ से बुलाया पुलिस फ़ोर्स.


जिलाधिकारी ऋतु माहेश्वरी ने बताया कि प्रशासन को बार एसोसिएशन की ओर से प्रतिमा लगाने के लिए कोई आवेदन नहीं मिला है. इसलिए प्रशासन नियमानुसार कार्यवाही करे के लिए बाध्य है.  उधर बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राकेश त्यागी काकड़ा का कहना है कि बार एसोसिएशन ने 14 अप्रैल 2017 को कचहरी परिसर में अंबेडकर की प्रतिमा लगाने का प्रस्ताव पारित किया था और उसी के अनुपालन में प्रतिमा लगाकर उसका अनावरण किया गया है. जहां तक प्रतिमा लगाने के लिए प्रशासनिक अनुमति का सवाल है तो हमने प्रतिमा लगा दी है, अनुमति के लिए प्रार्थना पत्र भी जल्द ही भेज दिया जाएगा.


ऐसा नहीं है कि कचहरी परिसर या आसपास के क्षेत्रों में संविधान निर्माता बाबा भीमराव अंबेडकर की प्रतिमाओं का अभाव है. मगर बार एसोसिएशन द्वारा जबर्दस्ती प्रतिमा लगाने को अगले लोकसभा चुनावों से जोड़ कर देखा जा रहा है. विधानसभा चुनावों में हुए सफाये के बाद बहुजन समाज पार्टी ने निकाय चुनावों में बसपा ने दूसरे विपक्षी दल समाजवादी पार्टी से बेहतर प्रदर्शन किया है. इसके बाद से ही बसपा प्रदेश में ऐसे मौकों की तलाश में है जिनसे उसके छितराए हुए वोट बैंक (दलित व पिछड़ा वर्ग) को एक किया जाए. अतः कचहरी परिसर में रातों-रात मूर्ति लगाने के पीछे भी स्थानीय दलितों को उकसा कर एक करने के रूप में देखा जा रहा है.


कलेक्ट्रेट परिसर में मूर्ति स्थापना का मामला तूल पकड़ता नजर आया है. अभी 100 से ज्यादा अज्ञात वकीलों पर केस दर्ज कराया गया है.  22 नामजद वकीलों पर भी मुकदमा दर्ज हुआ.  डीएम के आदेश पर कविनगर थाने में केस दर्ज किया गया है. 


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