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जब तक जीवन है जेपी के प्रति रहेगी प्रतिवद्धता: नीतीश कुमार

पुस्तक "द ड्रीम ऑफ रेवोल्यूशन: ए बायोग्राफी ऑफ जयप्रकाश नारायण" का लोकार्पण, जेपी सेनानी के पेंशन में बढ़ोतरी

जब तक जीवन है जेपी के प्रति रहेगी प्रतिवद्धता: नीतीश कुमार
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कुमार कृष्णन

पटना।मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने लोकनायक जयप्रकाश नारायण के जीवन पर आधारित 'द ड्रीम ऑफ रेवोल्यूशन' पुस्तक का लोकार्पण किया। गांधी संग्रहालय स्थित सत्याग्रह मंडप में मुख्यमंत्री ने लोकनायक जयप्रकाश नारायण के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें नमन किया। गांधीवादी विचारक रजी अहमद ने मुख्यमंत्री का अभिनंदन किया। गौरतलव है कि लोकनायक जयप्रकाश नारायण के सहयोगी रहे विमल प्रसाद ने ' द ड्रीम ऑफ रेवोल्यूशन: ए बायोग्राफी ऑफ जयप्रकाश नारायण" के लेखन की शुरूआत की थी। उनके निधन के बाद यह पुस्तक अधूरी रह गयी थी।उनकी पुत्री सुजाता प्रसाद ने लेखन के काम को पूर्ण किया।

पुस्तक "द ड्रीम ऑफ रेवोल्यूशन: ए बायोग्राफी ऑफ जयप्रकाश नारायण" उस व्यक्ति के जीवन से उपाख्यानों और पहले कभी नहीं बताई गई कहानियों को साझा करती है, जो परिवर्तनकारी राजनीति के लिए भावनात्मक भूख, शक्ति और इनक्यूबेटिंग क्रांतिकारी विचारों के लिए जाने जाते थे।

इतिहासकार बिमल प्रसाद और लेखक सुजाता प्रसाद द्वारा लिखित पुस्तक "बैरिकेड्स पर रहने वाले जीवन की अस्पष्टताओं और विडंबनाओं और समानता और स्वतंत्रता पर आधारित समाज में एक व्यक्ति की निरंतर खोज" की खोज करती है।पुस्तक में लेखक ने 1975 में इंदिरा गांधी के आपातकाल के दौरान जयप्रकाश नारायण की भूमिका के बारे में भी लिखा है।

पुस्तक लोकार्पण समारोह में मुख्यमंत्री ने सर्वप्रथम पुस्तक की लेखिका सुजाता प्रसाद को बधाई दी कि उन्होंने पुस्तक लेखन के काम को पूर्ण किया जिसकी उनके पिता जी प्रोफेसर विमल कुमार ने की थी। लोकनायक जयप्रकाश नारायण के जीवन भर आधारित कामों पर पुस्तक लेखन कर सुजाता प्रसाद ने बहुत सुंदर काम किया है। प्रो विमल प्रसाद 1991 से 1995 के बीच नेपाल में भारत के राजदुत थे। आज की राजनीति में उनलोगों का जो योगदान है, वह जेपी मूवमेंट की उपज है।जब छात्र आंदोलन आरंभ हुआ,उस समय हमलोगों ने जेपी से आंदोलन का नेतृत्व करने का अनुरोध किया था। जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया।


जेपी मूवमेंट की शुरुआत बिहार से हुई,जिसका देशव्यापी असर हुआ।

मुख्यमंत्री ने वर्ष 2005 के नवंबर माह में बिहार के लोगों ने काम का मौका दिया। आरंभ से ही हमलोगों ने बापू, लोहिया और जेपी के विचारों को ध्यान में रखकर विकास और सामाजिक उत्थान का काम किया है। जेपी जब अमेरिका पढ़ने गए तो वे वहां कम्युनिज्म से प्रभावित हुए। लेकिन जब वे वापस आए तो देश में समाजवादी के रुप में काम किया। जेल से भागकर जेपी और लोहिया ने आजादी की लड़ाई को सोशलिस्ट तरीके से गति प्रदान किया। देश की आजादी की लड़ाई में जेपी का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। कांग्रेस पार्टी से अलग होकर जब वे चुनाव लड़े और असफल हुए तो उन्होंने राजनीति ही छोड़ दी।उन्होंने शेखो देवरा में आश्रम बनायी,जिसे मैं भी देखने गया था। 1974 के मूवमेंट में उन्होंने जिस तरीके से काम किया। इससे पुन:उनका राजनीतिक रुप सामने आया। उस समय परस्पर विरोधी चार पार्टियां एकजूट हो गयीं। कांग्रेस नेतृत्व द्वारा जेपी के साथ दुर्व्यवहार किया गया और जिस प्रकार की बातें कही गयी, उसी का एक रूप सामने आया। उन्होंने कहा कि बापू के विचारों का जेपी पर काफी असर था।

जेपी के मार्गदर्शन से आजतक काम कर रहें हैं ।देश को स्थिति देखकर जेपी समाजवादी विचारधारा को अपनाया।हमसब तो जेपी, गांधी ,लोहिया के विचार को जन जन तक पहुंचाने में लगे हैं।

आजकल के युवा पीढ़ी को भी इन तीनों लोगो की जीवनी के बारे में बताने की जरूरत है। जेपी के गाँव सिताब दियारा में भी सरकार ने कई तरह का काम किया है।पुस्तकालय और चित्र प्रदर्शनी लगाया गया है।

जेपी गंगा पथ का निर्माण भी करवाया जा रहा है ।मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एलान करते हुए कहा कि जेपी सेनानी का पेंशन बढाया जा रहा है जिसके तहत 6 महीने जेल में रहने वालों को 7.5 हजार मिलेगा। वही 6 महीने से ज्यादा जेल में रहने वालों को 15 हजार पेंशन मिलेगा। साथ ही गांधी संग्रहालय को 3 करोड़ की सहायता राशि दी जाएगी। वही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने साफ तौर पर तमाम अधिकारियों को भी निर्देशित करते हुए कहा कि जेपी का जो आवास है चरखा समिति उसके भी कायाकल्प के लिए सरकार जल्द से जल्द कदम उठायेगी। जेपी जहां रहते थे उनके आवास का भी कायाकल्प सुंदर हो और तमाम लोग युवा भी खासतौर पर आजकल के जो युवा पीढ़ी भी जेपी आवास जाकर उनके बारे में कुछ जान सकें क्योंकि आज के युवाओं को जेपी लोहिया और महात्मा गांधी के बारे में जानने की बहुत जरूरत है।

मुख्यमंत्री ने यह एलान भी किया कि राजधानी स्थित महिला चरखा समिति, कदमकुआं के विस्तार के लिए तीन करोड़ रुपए की संचित निधि (कार्पस फंड) दी गयी थी जिसे बढ़ाने का निर्णय लिया गया है। गांधी संग्रहालय के विकास के लिए दो करोड़ रुपये का कार्पस फंड दिया गया था। इसके अतिरिक्त भी तीन करोड़ रुपये का कार्पस फंड दिया जाएगा ताकि कोई असुविधा नहीं हो।

Shiv Kumar Mishra
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