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चालान काटना जायज़ है... ये लाठी- डंडे मारना कितना मानवीय और लोकतांत्रिक है.. मानवाधिकार की बात तो रहने ही दीजिये!

चालान काटना जायज़ है... ये लाठी- डंडे मारना कितना मानवीय और लोकतांत्रिक है.. मानवाधिकार की बात तो रहने ही दीजिये!
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चालान काटना जायज़ है... ये लाठी- डंडे मारना कितना मानवीय और लोकतांत्रिक है.. मानवाधिकार की बात तो रहने ही दीजिये..भारत में मानव अधिकार से अधिक सक्रिय तो पशु अधिकार के लिये लड़ने वाली संस्थायें है.. त्रिपुरा के डी.एम के आतंक के बाद लेटेस्ट में थप्पड़ मार कर मोबाइल तोड़ने वाले अधिकारी तो देखे ही होंगे आपने... पुलिस बल में बहाल लोगो को मानवीयता की ट्रेनिंग देने की सबसे अधिक जरूरत है.. बी.वी से लड़ाई और बेटे की ज़िद ना पूरा कर पाने की झल्लाहट लॉकडाउन के बहाने ख़ूब सड़को पर निकल रही है... ख़ैर ! वर्दी और पावर की गर्मी सबसे बर्दाश्त होती नही है..

वैसे आज कल आइ.ए.एस और आई.पी.एस अधिकारी भी लप्पड़- थप्पड़ करने में पीछे नहीं है...डी. एम साहब ने उस मासूम लड़के का मोबाइल ऐसे पटक कर तोड़ दिया जैसे उस बेचारे को फ़ोन खरीद कर भी उन्होंने ही दिया हो... अरे ओ साहब कही भूल- चूक से आपके लौंडे को कोई सनकी अफ़सर थोप दिया न तो मानवाधिकार की ढपली नहीं पिटीयेगा..

वैसे आपलोग को लाबास्ना वाली ट्रेनिंग में मोरल- वैल्यू नहीं समझाया गया क्या ? ये बात समझ से बाहर है कि इतने मेहनत से लोक सेवा की परीक्षा पास करने वाले भी कुछ अधिकारी मानसिक दिवालियापन का शिकार कैसे हो जाते है.. 4 गार्ड मिल जाने के बाद आपका कार्य वाला इलाका कोई गार्डन नहीं बन जाता जहाँ जिसे चाहे जब मर्जी रौंद दे..

आये दिन कई अधिकारियों को अड़ीयल रवैया में बतियाते आप भी सुनते होंगे.. जनता अधिकारियों के सामने हाथ जोड़े जी - हुजूर, जी हुजुड़ कर के मिमियाती है.. साहेब के पावर के सामने आम जनता अक़सर सरेंडर कर देती है.. अरे ओ इस महान देश के महान मानुस ये अपका सरेंडर करना ना लोकतंत्र के लिये बहुते डेंजर है..

जानते है, लोक सेवको को नौकर शाह कहा जाता है.. ताकि ये लोक की सेवा कर सकें...लेक़िन यहां तो साहब लोग लॉकडाउन के नाम पर लोक सेवक के जगह पर लोक शहंशाह बन गए...

अरे...ओ साहब आप तो पिट- पाट के लोगो को निकल जाते है, लेक़िन पीछे छोड़ जाते है, एक इज्जतदार आदमी को आत्म ग्लानी में.. आप नहीं जानते आम जनता में जिस पर आपकी लाठी बरस रही है वो एक इज्ज़तदार और प्रतिष्ठा प्रिय इंसान भी हो सकता है...

पावर के रौब में किसी के आत्म सम्मान को चूर करने से पहले ये सोचियेगा जिसको आप थप्पड़ मार रहे है कहि पलट कर वो आपको चाटा जड़ दिया तो.. जड़- जोड़ूं को क्या कहिएगा और क्या उस थप्पड़ का जवाब थप्पड़ से देने वाले आम जनता को बक्स पाइयेगा.. नहीं बक्स पाएंगे जानते है.. कोई ना कोई फर्जी केस में लपेट जरूर देंगे आप अधिकारी लोग.. कहे तो पूरा का पूरा पेल दीजिएगा..

आज देश में हर जगह आत्म सम्मान को ठेस मारने वाली घटनाएं बढ़ रही है.. सभी को समता और सम्मान का अधिकार है.. चुप्पी तोड़ कर बोलना होगा... तभी इन बेलगाम अफसरों पर जनता नाथ कस पायेगी...

Shiv Kumar Mishra
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