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बिहार एनडीए में क्यो मचा है घमासान, क्या नीतीश फिर बदलेगे पाला या मांझी डुबोयेगे एनडीए की नैया!

बिहार एनडीए में क्यो मचा है घमासान, क्या नीतीश फिर बदलेगे पाला या मांझी डुबोयेगे एनडीए की नैया!
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पश्चिम बंगाल चुनाव में बीजेपी की हार और राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के जेल से बाहर निकलने के बाद एन डी ए के घटक दलो के बीच ही घमासान मचा हुआ है. एक तरफ जहां नीतीश सरकार में बड़े भाई की भूमिका निभा रही बीजेपी हिन्दुत्व के बहाने ही सरकार को कटघरे में खड़ा कर रही वही सरकार के मुखिया नीतीश की पार्टी जद यू और उनके सहयोगी पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी की पार्टी लगातार बीजेपी पर हमलावर है.

पूरा देश जहां इस वक्त कोरोना जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहा है तो बिहार में कोरोना से निपटने के बजाय सत्ताधारी घटक दल एक दूसरे से ही फरिया लेने के मूड में है.इसकी शुरूआत कोरोना के बहाने से ही हुई. असल में राज्य सरकार ने कोरोना संकट पर विचार विमर्श के लिये अप्रैल महीने मे महामहिम राज्यपाल की अध्यक्षता में एक सर्वदलीय बैठक बुलाई थी.बीजेपी अध्यक्ष संजय जायसवाल का दावा है कि उस बैठक में उन्होनें राज्य में लाक डाउन लगाने का सुझाव दिया था. लेकिन सरकार ने तत्काल उसे नही माना . सरकार ने 5 मई से लाक डाउन लगाया तब तक स्थिति बिगड़ चुकी थी. राज्य सरकार के फैसले पर जायसवाल ने तंज कसा था जिस पर जद यू संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष उपेन्द्र कुशवाहा ने पलटवार किया था.

इसके बाद कोरोना के टीके को लेकर हम के राष्ट्रीय जीतन राम मांझी ने प्रधानमंत्री पर निशाना साधा था और टीकाकरण के प्रमाण पत्र राज्य के मुख्यमंत्री की तस्वीर भी लगाये जाने की मांग की थी. इतना ही नही श्री मांझी और वी आई पी प्रमुख मुकेश सहनी ने अकेले में गुफ्तगू भी की.लेकिन असली राजनीतिक भूचाल बीजेपी एम एल सी टूना पांडे का मुख्यमंत्री नीतीश पर सीधा हमले को लेकर हुआ. राजद के पूर्व सांसद मो0 शहाबुद्दीन की मौत के बहाने श्री पांडे ने नीतीश को परिस्थितियो का मुख्यमंत्री बतलाया और नीतीश को अपना नेता मानने से तो इंकार किया ही जेल भेजने का भी दावा किया. बस क्या था इस मामले को लेकर उपेन्द्र कुशवाहा से लेकर संजय सिहं खुलकर बीजेपी के खिलाफ मैदान में आ गये. संजय सिंह ने तो पांडे की अंगुली ही काटने की बात कही तो जीतन राम मांझी भी नीतीश के पक्ष में आ गये. जद यू के दबाब पर बीजेपी ने टूना पांडे को बाहर का रास्ता दिखाया.

इसके बाद बीजेपी हमला वर हुई. पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष डा0 संजय जायसवाल ने राज्य में अल्पसंख्यको द्वारा दलितो पर अत्याचार और इसमें पुलिस की भूमिका पर प्रश्न खड़ा किया तो मंत्री जनक राम ने गोपाल गंज , पूर्णिया और जमुई में दलितो की घटना पर अपनी ही सरकार को कटघरे में खड़ा किया. जिस पर जीतन राम मांझी एक बार खुलकर मैदान में आये सूबे मे दलित मुस्लिम एकता के बहाने बीजेपी पर निशाना साधा. वही मांझी के बयान पर भड़के एक बीजेपी के दूसरी पंक्ति के नेता ने उनकी ऐसी तैसी कर दी.

अब बीजेपी नेताओ के बयान से नाराज जीतन राम मांझी की पार्टी ने बीजेपी पर नीतीश सरकार को अस्थिर करने का आरोप लगाया है पार्टी के मुख्य प्रवक्ता दानिश रिजवान ने कोर्डिनेशन कमिटी बनाने की मांग कर दी है. ये वही जीतन राम मांझी की पार्टी जिसने विधान सभा चुनाव के समय कार्डिनेशन कमिटी नही बनाये जाने के कारण महागठबंधन को छोड़ दिया था.

सूबे के राजनीतिक गलियारो में यह सवाल तैरने लगा है कि क्या एन डी ए में सब कुछ ठीक ठाक नही चल रहा है क्या बीजेपी और जद यू के बीच अंदरूनी रसा कसी शुरू हो गयी है या फिर जीतन राम मांझी एन डी ए की नैया को डुबोयेगें. याद कीजिये महागठबंधन की सरकार मे भी जद यू के बाहर निकलने के पहले नेताओ के बीच इसी तरह के बयान बाजी की शुरूआत ङुई थो जो आगे चल कर लालू और नीतीश को अलग होना पड़ा. हम के इस मांग पर तो बीजेपी प्रवक्ता प्रेमरंजन पटेल ने तो संकेत भी दे दिया है कि मांझी बाहर जाने का बहाना ढूढ रहे है.इधर बाका में मदरसे में हुए बम विस्फोट पर बीजेपी विधायक हरिभूषण ठाकुर बचौल ने मदरसो को आंतकवादी का अड्डा बतलाते हुए पूरे बिहार के मदरसो की जांच कराने और उसे बंद करने की मांग कर नीतीश सरकार को सकते में डाल दिया है.

एन डी ए के बीच मचे घमासान पर राज्य की मुख्य विपक्षी पार्टी राजद ने भी पलटवार किया है. राजद प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव का दावा है कि एन डी ए के घटक दलो का एक दूसरे से भरोसा खत्म हो गया है और यह सरकार अब चलने वाली नही है.हालांकि अभी इन बयानो पर भरोसा करना जल्दबाजी होगी लेकिन इतना तय है कि अंदर खाने कुछ ना कुछ पटकथा अवश्य लिखी जा रही है.

अशोक कुमार मिश्र
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