पटना

युवा आईपीएस अधिकारी ने लिखा, जब जाग उठेगा पूर्व तब बदलेगा दौर

Special Coverage News
12 Sep 2019 3:14 AM GMT
युवा आईपीएस अधिकारी ने लिखा, जब जाग उठेगा पूर्व तब बदलेगा दौर
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आईपीएस विनय तिवारी इस समय पटना एसपी मध्य के पद पर तैनात है.

दिन की सबसे खूबसूरत शक्ल सुबह होती है। सुबहों का मै हमेशा से दीदार करता रहा हूं। अब तक जहां जहां रहा हूं वहां की सुबह बहुत अलग अलग दर्शन देती रही है। कुछ ना कुछ नया हर जगह की सुबह से सीखने को मिलता है। हर सुबह को जीवन की नई शुरुआत मान सकते है। कल से क्या मतलब। सुबह आपको आज का अहसास कराएगी। अभी आज इसी समय मै रहना सुबह होना है। कल के काल मै घटी नकारात्मकता से उबारना सुबह होना है। हर दिन एक नए जीवन का अहसास करना। जैसे कि जो है वो आज से ही शुरू है। कल चाहे जैसा भी रहा हो। आज अच्छा ही होगा इसका अहसास सुबह है। ऊर्जा का अनंत एकदिशीया प्रवाह जो सिर्फ आपको ताकतवर बनाएगा। आप को कभी कितना भी कमजोर क्यों ना लगे बस एक बार सुबह मै डूब के देखिए। प्रकृति की तेज बहती हवा मै परिश्रम का स्नान सुबह करके देखिए अपने नए होने का अहसास होगा आपको।

भारत में आप जितना पूर्व मै जाएंगे उतनी अच्छी सुबह लगती है।

भोर __ए _ बनारस की कायल तो पूरी दुनिया है। गंगा के किनारे की सुबह जीवन के शुरू होने का अहसास कराती है। सिर्फ गंगा ही नहीं पूर्वोत्तर बहती हर नदी अपने गंतव्य की ओर बहती है फिर भी उसकी सुबह और उसके किनारे उगता सूरज ऊर्जा से आपको सरोकार कर देगा। पूर्व की और बहती नदियां अपने समापन कि और अग्रसर होते हुए भी आपको हमेशा अच्छी शुरुआत करने की प्रेरणा देती है। मानो जैसे जीवन के हर दौर में हर दिन की शुरुआत नई होती है।

सिर्फ गंगा ही नहीं

उत्तर और पूर्व भारत की बहुत सी नदियां पूर्व की और बहती है। जिन्हे देख कर भी लगता है कि पूर्व मै ही समापन है। उसी और बहना है। वहीं चलना है। गंगासागर की पवित्रता मै जीवन के सम्पूर्ण कराने का अहसास ही पूर्वी होना है। ध्यान दीजिए पूर्व मै समापन है अंत नहीं। अंत और समापन मै अंतर होता है। यही समापन की भावना वा अंत से निडरता ही इंसान को बेखौफ और वीर बनाती है।

पूर्वी भारत में बहती अनंत मानवीय ऊर्जा को देखिए। करोड़ों की संख्या में प्रबुद्ध मानव का भंडार है यहां। इस ऊर्जा का संचार पूर्व की सुबह की देन है। इलाहाबाद से लेकर कोलकाता तक नजर मारिए आपको प्रबुद्ध भारत का बड़ा हिस्सा यही पला यही बड़ा होता हुआ नजर आएगा। संकुचित संसाधनों में संघर्ष करते विकसित हुआ मानव ही मानव होने की कुछ विशेषता हासिल कर पाता है। क्यूंकि उसको हमेशा खुद को पालने ढालने का संघर्ष करना पड़ता है। इस संघर्ष की ताकत यहां की सुबह मै है। जिसने सूर्य की अनंत ऊर्जा को गंगा के पास बैठ कर खुद मै समाहित किया हो उसका व्यापक विकास इसी ऊर्जा से निहित हो जाता है। हमारे इतिहास के बहुत बड़े हिस्से मै पूर्व से प्रकाशित ज्ञान वा ऊर्जा ने पूरे देश को कुछ नया ही दिया है। परिश्रम, काम, मेहनत के लिए ऊर्जा का संचालन जरूरी है। पूर्व मै परिश्रम की ताकत यहां की सुबह से आयी है। युगों युगों से परिश्रम से पूर्व आगे चलता रहा है।

आगे जरूरत है तो पूर्व को अपनी सुबह की ताकत समझने की। मानव जीवन की सफलता परिश्रम मै ही संधारित है। पूर्व का जागना बहुत जरूरी है।

जब जाग उठेगा पूर्व तब बदलेगा दौर

तब जागेगा जग जब जगाएगा पूर्वी छोर।

विनय तिवारी SP, पटना मध्य

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