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जन्मदिन विशेष : ओम पूरी के जन्मदिन पर जानें कुछ खास बातें

Ekta singh
18 Oct 2017 12:03 PM GMT
जन्मदिन विशेष : ओम पूरी के जन्मदिन पर जानें कुछ खास बातें
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ओम पुरी और नसीरुद्दीन शाह पहली बार 1970 में एनएसडी में मिले थे. बेहतर किरदारों को निभाने के चलते पहले वे एक-दूसरे के प्रतिद्वंदी बने और फिर धीरे-धीरे दोस्त बनते-बनते फिल्मों में भी साथ सफर पर निकले.

बॉलीवुड के दिवंगत महान कलाकार ओम पुरी जी का आज जन्मदिन है. ओम पूरी जी करीब चालीस साल लंबे फिल्मी सफर में उन्होंने कई यादगार फिल्मों का तोहफा हमें दिया. उनका जन्म 1950 में हरियाणा के अंबाला में हुआ था. ओम पुरी ने एनएसडी दिल्ली से कोर्स करने के बाद पुणे फिल्म इंस्टीट्यूट से भी अभिनय की ट्रेनिंग ली. इसी साल जनवरी के महीने में उनका निधन हो गया था.

ओम पूरी ने 200 से ज्‍यादा फिल्‍मों में काम किया है. उन्होंने 1976 में मराठी फिल्‍म घासीराम कोतवाल के साथ सिनेमा जगत में कदम रखा. ओम पुरी और नसीरुद्दीन शाह पहली बार 1970 में एनएसडी में मिले थे. बेहतर किरदारों को निभाने के चलते पहले वे एक-दूसरे के प्रतिद्वंदी बने और फिर धीरे-धीरे दोस्त बनते-बनते फिल्मों में भी साथ सफर पर निकले.

नसीरुद्दीन शाह की साल 2014 में आई अपनी ऑटोबॉयोग्राफी 'एंड देन वन डे' में ओम पुरी के बारे में कुछ अनोखे किस्से दर्ज किए. इन किस्सों और नसीर की नजर से भी उन ओम पुरी को देखा जाना चाहिए, जो खुद अपनी ऑटोबायोग्राफी लिखे बिना ही दुनिया को विदा कह गए, क्योंकि ऐसी दोस्ती के किस्से बॉलीवुड में अकसर मिलते नहीं है.

वह बॉलीवुड सिनेमा में ही नहीं, बल्कि पाकिस्तानी, ब्रिटिश और हॉलीवुड फिल्मों में भी अपनी बेमिसाल अदाकारी के लिए जाने जाते रहे हैं. ओम पुरी ने बॉलीवुड के अलावा 20 से ज्यादा हॉलीवुड फिल्मों में भी काम किया. उन्होनें हॉलीवुड फिल्म 'इस्ट इज इस्ट' , 'व्हाइट टिथ' और 100फीट जर्नी, वुल्फ अभियान किया है.

बॉलीवुड में वर्ष 1980 में रिलीज फिल्म "आक्रोश" ओम पुरी के सिनेमा करियर की पहली हिट फिल्म साबित हुई। इस फिल्म के लिए उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिला. ओम पूरी गोविंद निहलानी के टीवी सीरियल तमस के लिए भी हमेशा याद आएंगे. भीष्म साहनी के उपन्यास पर बने तमस में भारत-पाकिस्तान बंटवारे की त्रासदी बहुत ही दिल दहला देने वाले अंदाज में बयां होती है.

ओम पूरी अपने रोल को गंभीरता से निभाते है.चाहे वह कॉमेडियन हो या गंभीरता का रोल करना हो . उन्होनें फिल्म 'जाने भी दो यारो', 'चाची ४२०' और 'मालमाल विकली' में वो अपनी भूमिका संजीदगी से निभाते हैं. ओम पुरी के अभिनय में कई शेड हैं. उन्होनें मजबूर आदमी के गुस्से को सबसे जोरदार ढंग से ओम ने ही व्यक्त किया है.


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