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वित्त मंत्री ने नेशनल मोनेटाइजेशन पाइपलाइन किया लॉन्च, 6 लाख करोड़ रुपये की संपत्तियां बेचने की तैयारी में सरकार, जानें लिस्ट में क्या-क्या है

केंद्र सरकार ने आज नेशनल मोनेटाइजेशन पाइपलाइन लॉन्च कर दिया।

वित्त मंत्री ने नेशनल मोनेटाइजेशन पाइपलाइन किया लॉन्च, 6 लाख करोड़ रुपये की संपत्तियां बेचने की तैयारी में सरकार, जानें लिस्ट में क्या-क्या है
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नई दिल्ली : केंद्र सरकार ने आज नेशनल मोनेटाइजेशन पाइपलाइन (National Monetisation Pipeline) लॉन्च कर दिया। वित्त मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि इसके तहत वित्त वर्ष 2022 से 2025 तक 6 लाख करोड़ रुपये के एसेट्स बेचे जा सकते हैं। इसमें सड़क, परिवहन एवं राजमार्ग, रेलवे, बिजली, पाइपलाइन एवं नेचुरल गैस, सिविल एविएशन, शिपिंग पोर्ट्स एंड वॉटरवेज, टेलिकम्युनिकेशंस, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण, माइनिंग, कोल और हाउसिंग एंड अर्बन अफेयर्स मंत्रालयों से जुड़े एसेट्स शामिल हैं।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Finance Minister Nirmala Sitharaman) ने नेशनल मोनेटाइजेशन पाइपलाइन को लॉन्च किया। उन्होंने साफ किया कि सरकार केवल अंडर-यूटिलाइज्ड एसेट्स को ही बेचेगी। इसका हक सरकार के पास ही रहेगा और प्राइवेट सेक्टर के पार्टनर्स को तय समय के बाद अनिवार्य रूप से वापस करना होगा। उन्होंने कहा कि हम कोई जमीन नहीं बेच रहे हैं। नेशनल मोनेटाइजेशन पाइपलाइन में ब्राउनफील्ड एसेट्स की बात कही गई है जिन्हें बेहतर ढंग से मोनिटाइज करने की जरूरत है। निजी भागीदारी से हम इन्हें बेहतर ढंग से मोनीटाइज कर रहे हैं। मोनेटाइजेशन से मिलने वाले संसाधनों को इन्फ्रास्ट्रक्चर बिल्डिंग में निवेश किया जाएगा।

क्या-क्या बिकेगा

इससे पहले नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत ने कहा कि 2025 तक नेशनल इंफ्रास्ट्रक्चर प्लान का 14 फीसदी हिस्सा यानी 6 लाख करोड़ रुपये रोड, रेलवे और पावर आदि से आएंगे। रेलवे स्टेशन, 15 रेलवे स्टेडियम, ट्रेन, माउंटेन रेलवे बेचे जाएंगे। इसके साथ ही शिपिंग में 9 मेजर पोर्ट बेचे जाएंगे। दो नेशनल स्टेडियम भी इस लिस्ट में हैं। सरकारी कंपनियों के गेस्ट हाउस भी पीपीपी मोड में जाएंगे। अगले चार साल के वार्षिक टारगेट होंगे और रियल टाइम मॉनिटरिंग होगा। इसकी हर महीने समीक्षा होगी और तिमाही आधार पर पर बड़े अधिकारी समीक्षा करेंगे ताकि प्राइवेट सेक्टर बेटर मैनेज कर सकें।

नीति आयोग के मुताबिक वित्त वर्ष 2022 से 2025 के बीच 6 लाख करोड़ रुपये के एसेट्स बेचे जा सकते हैं। इसमें रोड, रेलवे, पावर ट्रांसमिशन, पावर जेनरेशन, नेचुरल गैस पाइपलाइंस, प्रॉडक्ट पाइपलाइन, टेलिकॉम, वेयरहाउसिंग, माइनिंग, एविएशन, पोर्ट्स और स्टेडियम एसेट्स शामिल हैं। इनमें टॉप 5 सेक्टर रोड (27 फीसदी), रेलवे (25 फीसदी), पावर (15 फीसदी), ऑयल एंड नेचुरल गैस पाइपलाइंस (8 फीसदी) और टेलिकॉम (6 फीसदी) हैं।

किस सेक्टर में कितनी बिक्री

अगले 4 साल में 160200 करोड़ रुपये के रोड एसेट्स बेचे जा सकते हैं। इसी तरह रेलवे से जुड़े 152496 करोड़ रुपये के एसेट्स निजी हाथों में जा सकते हैं। पावर ट्रांसमिशन में 45200 करोड़ रुपये और पावर जेनरेशन में 39832 करोड़ रुपये की परिसंपत्तियों को निजी हाथों में बेचा जा सकता है। इसी तरह 24462 करोड़ रुपये के नेचुरल गैस पाइपलाइंस और 22504 करोड़ रुपये के प्रॉडक्ट पाइपलाइन एसेट्स को बेचे जाने की संभावना है।

नीति आयोग के मुताबिक 35100 करोड़ रुपये के टेलिकॉम, 28900 करोड़ रुपये के वेयरहाउसिंग, 28747 करोड़ रुपये के माइनिंग, 20782 करोड़ रुपये के एविएशन, 12828 करोड़ रुपये के पोर्ट्स और 11450 करोड़ रुपये के स्टेडियम एसेट्स बेचे जा सकते हैं। इसी तरह 15000 करोड़ रुपये के अर्बल रियल एस्टेट से जुड़े एसेट्स को भी निजी हाथों को बेचा जा सकता है। इसमें 12 से अधिक मंत्रालयों और 20 से अधिक एसेट क्लासेज को शामिल किया गया है।

Arun Mishra

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Sub-Editor of Special Coverage News
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