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कर रहे हैं अपनी छवि डेंट-पेंट,तो यह है, मोदी जी का चुनावी इवेंट .?

येन चुनाव के वक्त 2019 में केदारनाथ 2022 के चुनाव पूर्व आमजन को अपने तरफ खिंचने की कोशिश मात्र !

कर रहे हैं अपनी छवि डेंट-पेंट,तो यह है, मोदी जी का चुनावी इवेंट .?
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विनय मौर्य

वाराणसी। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मौकाई मैनेजमेंट और इवेंट का कोई जवाब नहीं है। यह हर उस अवसर को बारीकी से समझते हैं जिससे जनता को अपनी तरफ आकर्षित किया जा सके। और वक्तअनुसार लाभ लिया जा सके।

और जब मौका और माहौल चुनावी हो तो मोदी जी वैसे भी नहीं चूकते हैं। वैसे भी 2022 का चुनाव नजदीक है,और मंदी महंगाई बेरोजगारी जैसे मुद्दों के शीर्ष पर होने के कारण सरकार की हालत नासाज नाठीक है। और जनता बीजेपी सरकार की तरफ से उदासीन है,और विपक्ष अपने दांव से उत्साहित नजर आ रही है।

बहरहाल हम बात कर रहे हैं विश्वनाथ कॉरिडोर की जिसे मेगा इवेंट के तौर पर प्रस्तुत किया जा रहा है।और भाजपा की तरफ से नारा उछाला गया है, "दिव्य काशी, भव्य काशी, चलो काशी।" इस नारे के साथ पीएम नरेंद्र मोदी का काशी में स्वागत आगाज होगा। वह विश्वनाथ मंदिर कॉरिडोर के लोकार्पण के लिए वाराणसी आ रहे हैं।

दरअसल बीजेपी के मुख्य रणनीतिकारों को यह अच्छे से मालूम है कि जब जनता मूलभूत आवश्यकताओं को मुद्दों बनाये तो मूल विषयों से इतर बहुसंख्यक जनता को किस तरह से शांत किया जा सकता है। उसी रणनीति के तहत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी "चलो काशी" जैसे नारों के मुलत्व में अपने सतरंगी सपनों को परवाज़ देने की जुगत में लगे हैं। उन्हें इस बात पर पूरा भरोसा है कि धर्म के आवरण में छुपी उनकी मंशा को आमजनमानस समझ नहीं पायेगा और विश्वनाथ कॉरिडोर के बहाने पुनः मोदी योगी अगेन टाईप का नारा हवा में तैरेगा जिससे भाजपा का परचम फिर लहरायेगा।

असल में चुनावी बिसात पर भावनाओं को भुनाने का सबसे बेहतर तरीका बीजेपी यह समझ रही है कि यूपी के विधानसभा चुनाव में मंदी की काट मंदिर है जिस पर वह चुनावी फसल काट सकते हैं,और लोगों को दो फाड़ में बांट सकते हैं।उन्हें लगता है कि सांप्रदायिक ध्रुवीकरण के बगैर सत्ता की सीढ़ी की तरफ बढ़ पाना नामुमकिन है। इसलिए मोदीजी एंड कम्पनी विश्वनाथ कॉरिडोर को मेगा इवेंट के रूप में हाई लाईट कर रही है। "चलो काशी" को मात्र नारा समझने की भुल वही कर सकता है जिसे बीते लोकसभा चुनाव के वक्त मोदीजी का केदारनाथ जाकर बैठ जाना नहीं याद होगा। क्योंकि उस वक्त भी जनता प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सरकार के नोटबन्दी,जीएसटी, सहित कई मुद्दों पर उकताई हुई थी। मगर मोदी जी के उस मेगा इवेंट ने लोकसभा चुनाव का माहौल उनके पक्ष में कर दिया।

उसी रणनिति के तहत काशी से पूरे उत्तर प्रदेश को साधने का सियासी खेल है यह विश्वनाथ कॉरिडोर लोकार्पण क्योंकि भाजपा को पता है कि यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार जनता को फीलगुड कराने में पूरी तरह से नाकाम हो चुकी है। और महंगाई, बेरोजगारी,कई जगहों पर भ्रष्टाचार साथ ही दम तोड़ती कानून व्यवस्था से जनता उनपर सवाल खड़े कर रही है। इन मुद्दों ने जनता के बीच बीजेपी की छवि 2014-17 से एकदम विपरीत हो गई है। लिहाजा उन सवालों से आड़ लेने के लिये विश्वनाथ कॉरिडोर को इवेंट की तरह जनता के सामने लाया जा रहा है। ताकि धार्मिक नारों,ढोल-नगाड़ों तिलक,आरती घण्ट घड़ियाल के बीच मूल मुद्दे दब छुप जायें और बीजेपी फिर से सत्ता की मलाई खाये।अब यह तो वक्त ही बताएगा कि जनता को बीजेपी का वादा (महंगाई बेरोजगारी मंदी पर लगाम) याद आएगा या धर्म की आड़ में सरकार की कमियों को भुला दिया जाएगा।

Shiv Kumar Mishra
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