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यक़ीन न हो तो... किसान बिल वापस लेने के बाद पीएम मोदी के समर्थकों की प्रतिक्रियाएं देंखे... ये रहे कुछ नमूने

संघ,भाजपा और मोदी शाह की भाजपा की राजदुलारी अभिनेत्री कंगना रानाउत ने क़ानून वापस लेने की घोषणा भर से तिलमिला कर भारत नाम के राष्ट्र राज्य को एक 'जिहादी देश' घोषित कर दिया है।

यक़ीन न हो तो... किसान बिल वापस लेने के बाद पीएम मोदी के समर्थकों की प्रतिक्रियाएं देंखे... ये रहे कुछ नमूने
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डॉ राकेश पाठक

प्रधानमंत्री की माँ का चरित्र हनन सहने वाला नीच समाज हैं हम। वघृणा के भस्मासुर ने वरदान देने वाले के सिर पर हाथ रख दिया है।इतिहास का 'समय सिद्ध' कथन है कि 'फासीवाद अपने जनक और जननी को खा जाता है।'

जिन लोगों ने इतिहास नहीं पढ़ा वे अब इसके निर्लज्जतम रूप में अपने ही देश में इसे देख सकते हैं। शर्त ये है कि आप ज़िंदा हों, ज़मीर ज़िंदा हो और आंखें खुली हों।देख सकते हैं तो देखिये, सुन सकते हों तो सुनिये और सह सकते हों तो सहिए...

हक़ीक़त ये है कि जिन लोगों ने ज़हरीला दूध पिला कर कट्टरता के इस अजगर को पाला पोसा था उसकी लपलपाती जीभ अब उन्हीं को निगलने को आतुर है।घृणा और विद्वेष का यह भस्मासुर अब अपने ही देवता और उसके गणों के सिर पर हाथ रखने को बौराया घूम रहा है।

यक़ीन न हो तो किसान क़ानून वापस लेने के बाद नरेंद्र मोदी के अंध समर्थकों की प्रतिक्रियाएं देख लीजिये।ये रहे कुछ नमूने..

आज के अख़बार 'पंजाब केसरी' की है। शीर्षक देख लीजिये। हिन्दू धर्म, सनातन धर्म, संस्कृति की ध्वजवाहक हिन्दू महासभा ने किसान क़ानून वापस लेने पर अपने दफ़्तर से नरेन्द्र मोदी की तस्वीर हटा दी है। इसके साथ महासभा ने बयान जारी करके कहा है 'जिसकी एक बात नहीं उसका बाप एक नहीं।'

यह नीचतम बयान सीधे सीधे देश के प्रधानमंत्री की परम पूज्य माँ हीरा बेन के चरित्र पर कीचड़ उछालने वाला है। नरेंद्र मोदी से हज़ार असहमति के बावज़ूद उनकी वयोवृद्ध माँ पर आक्षेप न केवल उनका अपमान है बल्कि समाज के माथे पर कलंक की तरह है। अपने प्रधानमंत्री की माँ के चरित्र को इस तरह तार तार होते देखने वाला समाज नपुंसक, निकृष्ट, नराधम मुर्दा समाज ही हो सकता है।

प्रधानमंत्री तो छोड़िए किसी सामान्य नागरिक की माँ के चरित्र पर इस तरह विष वमन की इजाज़त किसी को नहीं दी जा सकती। याद रखिये ये वही हिन्दू महासभा है जिसे राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ,मोदी-शाह की भाजपा का वरद हस्त प्राप्त है। ये वही हिन्दू महासभा है जो गांधी जी के हत्यारे नाथूराम गोडसे का मंदिर बना कर उसे पूजती है और नरेंद्र मोदी को 500 साल बाद देश की कमान सम्हालने वाला पहला हिंदू हृदय सम्राट मान कर आरती उतारती रही है।अब एक क़ानून वापस लेने पर मोदी की माँ का असहनीय अपमान कर रही है।

2) सोशल मीडिया पर दिन रात हिन्दू राष्ट्र की कल्पना में डूबे रहने वाले लोग कल से जिस तरह प्रधानमंत्री को कोस रहे हैं वह भी इसी फासीवादी विषधर का ही एक चेहरा हैं। कल तक नरेंद्र मोदी का चालीसा पढ़ने वाले न जाने ऐसे कितने धर्म ध्वजा वाहक हैं जो आज उन्हें डंके की चोट पर Hi जड़ा कह रहे हैं। जरा सा ढूंढिये हज़ार ऐसे प्रोफ़ाइल मिल जाएंगे। यह भी पड़ताल कर लीजिये कि उनमें से सौ फ़ीसदी कल तक मोदी के अंध अनुकर थे और हर असहमत को ऐसी ही अश्लील गालियों से नवाज़ते थे।

(हम उनका स्क्रीन शॉट नहीं लगा रहे)

3) किसान क़ानून वापस लेने पर जरखऱीद मीडिया के वे चारण और भाट भी अब नरेंद्र मोदी को एक कायर प्रधानमंत्री बताने में लग गए हैं। जो चौबीसों घंटे, आठों पहर, सोलहों दिशाओं में नरेंद्र मोदी की दुंदुभी बजाते अपना जीवन धन्य कर रहे थे उनमें से भी कुछ के बोल शालीनता की सीमा लांघ रहे हैं। उन्हें लग रहा है कि जिसे हिन्दू राष्ट्र बनाने के राजसूय यज्ञ के लिये निकला उनका चक्रवर्ती सम्राट का रथ तो किसानों के हल की नोंक से ही 'पंचर' हो गया।

4) संघ,भाजपा और मोदी शाह की भाजपा की राजदुलारी अभिनेत्री कंगना रानाउत ने क़ानून वापस लेने की घोषणा भर से तिलमिला कर भारत नाम के राष्ट्र राज्य को एक 'जिहादी देश' घोषित कर दिया है। कंगना के लिये अभी अभी '2014 को आज़ाद हुआ देश' एक पल में गुंडों,मवालियों का देश बन गया है। मत भूलिए कि ये वही कंगना रानाउत हैं जो कल तक मोदी भक्ति में दूसरों को ऐसे ही अपशब्द कहतीं थीं आज आपको कह रहीं हैं।

आपने ही तो बनाया है ऐसा देश और समाज हो सकता है आज नरेंद्र मोदी और पूज्य मातुश्री के लिये कहे, लिखे जा रहे शब्द आपको नागवार गुजरें लेकिन यह सब आपका दिया हुआ ही है। पिछले आठ दस साल में आपने महात्मा गांधी से लेकर सोनिया,राहुल गांधी तक अपनी कीचड़ से सने संस्कारों से किसी को नहीं बख्शा।किसी दल,विचार का कोई नहीं बचा जिसे आपने देशद्रोही नहीं कहा हो। लेखक,कवि ,पत्रकार,किसान,मज़दूर,छात्र , कर्मचारी या कोई भी हो जिसने आपके अवतार,आराध्य, महामानव नरेंद्र मोदी की रीति नीति से मत भिन्नता दर्ज़ की आपने उसकी माँ बहन किसी को नहीं छोड़ा।

जब व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी और ट्रोल आर्मी नफ़रत और झूठ का नग्न नृत्य कर रहे थे तब आप दर्शक दीर्घा में बैठ कर पॉपकॉर्न चबाते हुए तालियां पीट रहे थे।लेकिन तालियां बजाते वक़्त आप भूल गए थे कि बूमरेंग नाम की एक चीज भी होती है। यह तो होना ही था।

नफ़रत का यह राक्षस अब आपकी गुफा से बाहर आकर आपको ही ढूंढ रहा है। डायरी में लिख कर रख लीजिये फासीवाद का यह दस मुखी पिशाच आपको भी नहीं छोड़ेगा। जब इसने अपने वरदान देने वाले 'महाप्रभु' और उनकी श्रद्धेय माताजी को नहीं छोड़ा तो आप हैं ही क्या..! कृपया प्रतीक्षा कीजिये आप कतार में हैं।

सुजीत गुप्ता
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