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लोगों से सुनी व मीडिया में देखी हर चीज प्रमाणित नहीं होती, अधूरी जानकारी पर आपस में तनातनी सही नहीं होती

एक गांव में मैंने महात्मा गांधी रोजगार गारंटी योजना के तहत तालाब के सौंदर्यीकरण का कार्य होते हुए देखा। कुछ मजदूर चमचमाती धूप में पसीने से लथपथ अपनी कर्मठता का बखूबी अहसास करा रहे थे। पास में एक पेड़ के नीचे युवावस्था के अंतिम पड़ाव के लोगों का जमाववाड़ा था। मैंने नजदीक पहुंचकर बाइक रोकी व अभिवादन किया।
एक साथी ने मुझसे पूछा भाईसाहब बाइक पर ये काहे की तख्ती लगी है। मैंने कहा आपको क्या समझ आया इसे पढ़कर? तब तक दूसरा कोई साथी बोल पड़ा ग्राम पंचायत का काम हैं, शायद ये सरकारी कर्मचारी हैं। तब तक तीसरा बोला- अरे भाईसाहब इनको छोड़ो आप ही बताइये क्या मिशन है ये? मैंने ग्रामसभा व ग्रामपंचायत के जागरूकता अभियान को संक्षेप में समझा दिया।
मेरी बातचीत के दौरान वहां कुछ अन्य साथी भी इकट्ठा हो गए थे। एक ने सवाल दागा कि किस पार्टी से बिलोंग करते हो? पार्टी का नाम आते ही उस समूह में दो पक्ष बन गए एक सरकार के पक्ष का दूसरा विपक्ष वाला। फिर क्या... तनातनी शुरू मोदी,योगी,सोनिया,माया,मुलायम,केजरीवाल आदि की सबकी कुंडलियां खुलना शुरू हो गईं।
फिर मैंने सभी से मुखातिब होते उनसे सवाल करना शुरू किये ? क्या आपने इन पार्टियों के नेतृत्वकर्ताओं के बारे में कोई किताब पढ़ी है? रिसर्च की है? कुछ दिन इनके साथ रहें हैं?
एकस्वर में सभी- नहीं ऐसा तो नहीं फिर मैंने पूछा- तो इतनी बातें इनके बारे में कैसे कह पा रहे हैं। एक दो लोग बोले- लोगों से सुनते रहते हैं, मीडिया में देखते हैं।
मैं बोला कि लोगों से सुनी व मीडिया में देखी हर चीज प्रमाणित नहीं होती, अधूरी जानकारी पर आपस में तनातनी सही नहीं होती। आम आदमी के लिये सरकार को परखने के मानक शिक्षा,स्वास्थ्य, रोजगार, बिजली, पानी आदि हैं।
इन्हीं के आधार पर सरकार का रिपोर्ट कार्ड बनाना चाहिए। दूसरा आपके गांव में भी अपनी खुद की सरकार है। जिसके अंतर्गत ग्राम सभा व ग्राम पंचायत आती हैं। काम करने के 29 विषय व प्रॉपर बजट का प्रावधान हैं। क्या ये सब काम विधिवत हो पा रहें ? कृपया इस पर भी सोचें? फिर सबके माथे की लकीरों पर बल पड़ता दिखा।
रामभरत उपाध्याय




