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साहित्य: इस्मत चुग़ताई की कहानियों व उपन्यास में स्त्री विमर्श

इस्मत चुग़ताई ऐसी मुस्लिम लेखिका हैं जिन्होंने नारी के यौनिक जीवन की अस्पष्टताएं तथा फन्दो पर पुरूष तथा स्त्रियों दोनो ही दृष्टि से ध्यान दिया है

साहित्य: इस्मत चुग़ताई की कहानियों व उपन्यास में स्त्री विमर्श
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इस्मत चुग़ताई उर्दू साहित्य की बेबाक व खुले विचारों वाली नारीवादी मुस्लिम लेखिका हैं जिनका व्यक्तित्व उर्दू साहित्य ही में नही बल्कि अपने समकालीन समाज के लिये भी एक जबरदस्त आंदोलन लेकर आया था । उर्दू में प्रगतिशील साहित्य को परिभाषित करने में भी उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है।

इस्मत चुग़ताई का जन्म 21अगस्त 1915 को बदायूँ मेें हुआ था और उनके पिता मिर्जा कसीम बेग चुुग़ताई ब्रिटिश भारत में डिप्टी कलेक्टर के पद पर बहराईच में तैनात होने के कारण उनके बचपन के कुछ साल बहराईच में भी गुजरे हैं और इनका उपन्यास "दिल की दुनिया" बहराईच की ही पृष्ठभूमि पर है। इस्मत चुुग़ताई ने मुस्लिम समाज से जुडे मुद्दों पर कुशलतापूर्वक लेखनी चलाई है तथा मुस्लिम समाज की सित्रयों के जितने भी संभव चित्र हो सकते है वह हूू-ब-ह उनकी रचनाओं का हिस्सा बनते रहे हैं।

इस्मत चुग़ताई ऐसी मुस्लिम लेखिका हैं जिन्होंने नारी के यौनिक जीवन की अस्पष्टताएं तथा फन्दो पर पुरूष तथा स्त्रियों दोनो ही दृष्टि से ध्यान दिया है। इस्मत चुग़ताई अपनी विवाहित मुस्लिम सखियों से प्रथम रात्रि अर्थात सुहागरात की बातों को बहुत ध्यान से सुनती थी और इन्हीं सब बातों को सुनकर वह यौनिक विषयों की छानबीन मे लग गयीं। साथ ही सआदत हसन मँटो की दोस्ती ने भी इनके इन विचारों में और जागृति पैदा की।

इस्मत चुग़ताई की कहानियों में स्त्री विमर्श को प्रमुखता प्राप्त है और उनको कहानियों में प्रस्तुत किये गए यौनिक मुद्दे मुस्लिम समाज की महिलाओं पर ही केद्रित हैं। इस्मत चुग़ताई की सर्वश्रेष्ठ कहानी लिहाफ है जिसके विरूद्ध इनपर अश्लीलता का मुकदमा भी दायर किया गया। इस कहानी में उन्होंने मुस्लिम समाज की दो औरतों का जिक्र किया है जो लिहाफ के नीचे यौन सन्तुष्टि पाती थी।

इस्मत चुग़ताई को दोषी सिद्ब करने के लिये एक व्यक्ति ने इन पर मुकदमा दायर करते हुए कहा था कि, वह आशिक इकट्ठा कर रही हैं, अशलील है।"

न्यायाधीश ने पूछा कौन सा शब्द अशलील है? इकठ्ठा करना या आशिक!

इस मुकदमे में वह बाइज्जत बरी हो गई ।और कहानी लिहाफ को बहुत प्रसिद्ध मिली । रूढ़ीवादी मुस्लिम व मौलवियों ने इस्मत चुग़ताई पर अनेक आरोप लगायें ,लेकिन वह अपनी लेखनी पर सदैव कायम रहीं और महिलाओं के विभिन्न यौनिक और सामाजिक मुद्दों पर बेबाकी के साथ कहानियां लिखी जो वास्तविक स्थिति से आगाह करती हैं। इस्मत चुग़ताई के बहुत से कहानी संग्रह प्रकाशित हो चुके हैैं।

उपन्यासों में टेढी लकीर, जिद्दी, एक कतरा खून, दिल की दुनियां, मासूमा, बहरूप नगर, सैदाई, जंगली कबूतर, अजीब आदमी, बाँदी आदि हैं। और इस्मत चुग़ताई की आत्मकथा कागजी है, पैरहन है। इस्मत चुग़ताई की रचना टेेढ़ी लकीर के लिए गालिब पुरस्कार तथा अन्य रचनाओं पर भी पुरस्कार मिल चुके हैैं तथा अनेक सम्मानों से भी आपको नवाजा जाता रहा है। इस्मत चुग़ताई को महिलाओं का पथ प्रर्दशक भी कहा जाता है।

: शारिक रब्बानी, वरिष्ठ उर्दू साहित्यकार

नानपारा, बहराईच (उत्तर प्रदेश)

Desk Editor
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