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Nirbhaya Death Anniversary: निर्भया हादसे के 10 साल हुए पूरे लेकिन ऐसे मामलों पर नहीं लगी लगाम
देश को हिलाकर रख देने वाले निर्भया रेप केस को आज 10 साल पूरे हो गए हैं. आज ही के दिन निर्भया बस में सवार दरिंदों का शिकार हुई थी. यही ऐसा केस था जिसने पुलिस की तफ्तीश के तौर-तरीकों में ना सिर्फ बदलकर रख दिया, बल्कि फॉरेंसिक सबूतों में भी ऐसा प्रयोग हुआ जो गुनहगारों को फांसी तक ले जाने में एक नजीर बन गया. वहीं निर्भया मामला, दुनिया का पहला ऐसा केस था जिसमें 164 के बयान, शब्दों के बजाय इशारों से दर्ज कर लिए गए और उसी पर पूरा केस लड़ा गया. लेकिन इन सब के बावजूद हालातों में किसी तरह का बदलाब नहीं आए हैं. एनसीआरबी की एक रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली में पिछले साल हर दिन दो नाबालिग लड़कियों के साथ रेप हुआ और दिल्ली, देशभर में महिलाओं के लिए सबसे असुरक्षित महानगर रहा. साल 2021 में महिलाओं के खिलाफ अपराध के 13893 मामले दर्ज किए गए जबकि 2020 में यह आंकड़ा 9,83 था. यानी कुल मिलाकर इनमें कमी आने की बजाए ये मामले बढ़े ही.
10 साल पूरे होने पर निर्भया की मां ने क्या कहा
निर्भया केस के 10 साल पूरे होने पर पीड़िता की मां ने कहा कि, उन्हें बेटी के गुनाहगारों को सजा दिलाने के लिए 8 साल तक लड़ाई लड़नी पड़ी, तब जाकर इंसाफ मिला. लेकिन आज भी रेप के मामलों में ऐसी कई मां और परिवार हैं, जो कई सालों से न्याय के लिए दर-दर भटक रहे हैं. जैसे छावला गैंगरेप मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा आरोपियों को सबूतों के आभाव के चलते बरी किए जाने पर पीड़िता का परिवार काफी आहत हुआ. हालांकि मामले में दिल्ली सरकार की ओर से इस फैसले की समीक्षा याचिका को उपराज्यपाल की मंजूरी मिलने से परिवार को नई उम्मीद मिली है लेकिन अब भी पीड़िता के परिवार को लंबी लड़ाई लड़नी है. इसपर निर्भया के परिवार ने कहा कि, बच्चियों के साथ बर्बरता करने वाले न जाने कितने लोग बाहर घूम रहे हैं, जो समाज के लिए खतरा हैं. लेकिन सिस्टम ऐसा बन गया है कि जो सजा दोषियों को मिलनी चाहिए, वो पीड़ितों के परिवारों को मिल रही है. हमारी लड़ाई में भी कई बार फांसी टाली गई और कोर्ट में भी हमें कई सबूत देना पड़ा. पुलिस व्यवस्था को सख्त और न्याय व्यवस्था को तेज होने की जरूरत है।
जानिए दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष ने क्या कहा
दिल्ली महिला आयोग अध्यक्ष स्वाति मालीवाल ने लोकसभा व राज्यसभा स्पीकर को कहा कि जैसा कि आप जानते ही होंगे आज निर्भया की दसवीं बरसी है. दिसंबर 2012 में उसके साथ सामूहिक बलात्कार किया गया था. इस घटना ने देश की अंतरात्मा को झकझोर कर रख दिया था. इसके फलस्वरूप भारी विरोध प्रदर्शन हुआ था. इसकी वजह से कई कानून बने और कुछ कानून कड़े किए गए. हालांकि, इस भीषण घटना को 10 साल बीत चुके हैं और देश में महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ अपराध बढ़ते ही जा रहे हैं।
Satyapal Singh Kaushik
न्यूज लेखन, कंटेंट लेखन, स्क्रिप्ट और आर्टिकल लेखन में लंबा अनुभव है। दैनिक जागरण, अवधनामा, तरुणमित्र जैसे देश के कई प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में लेख प्रकाशित होते रहते हैं। वर्तमान में Special Coverage News में बतौर कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हूं।




