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ओशो और इस्लाम

ओशो ने हजरत राबिया बसरी के गीत और शेख फरीद के बोल को अपने साहित्य मे स्थान दिया है। ब्रह्मचर्य से दूरी ओशो और इस्लाम की समान विचार धारा है।केवल इस्लाम में निकाह की बाध्यता है और ओशो के यहाँ नहीं है

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शारिक रब्बानी (वरिष्ठ उर्दू साहित्यकार)

नानपारा, बहराईच (उत्तर प्रदेश)

ओशो ने अपने जीवन में सभी प्रमुख धर्मों का गहन अध्ययन किया ।और लगभग सभी धर्मों की किताबों और उनके सिद्धांतो पर अपने विचार अपने तरीक़े से प्रस्तुत किये लेकिन जब भी ओशो से इस्लाम पर बोलने को कहा गया तो उन्होंने टाल दिया। उनका मानना था कि इस्लाम पर सीधे कोई प्रतिक्रिया देना उचित नहीं है क्योंकि मुस्लिम धर्मावलंबियो की अधिक संख्या व मौलाना लोग इस्लाम मेें किसी प्रकार का परिवर्तन या धर्म सम्बन्धी विरोधी प्रतिक्रिया स्वीकार नहीं करते है।

ओशो ने हजरत राबिया बसरी के गीत और शेख फरीद के बोल को अपने साहित्य मे स्थान दिया है। ब्रह्मचर्य से दूरी ओशो और इस्लाम की समान विचार धारा है।केवल इस्लाम में निकाह की बाध्यता है और ओशो के यहाँ नहीं है।

ओशो ने मुस्लिम समाज से निकटता बढाने के लिये कई बार मुस्लिम उलेमाओं से विचार विमर्श करने का प्रयास किया परन्तु इसमे उन्हें सफलता नही मिली। कहा जाता है कि, रायपुर प्रवास के दौरान एक बार ओशो ने मुस्लिम मौलाना से बात करने के लिए खुद को इस्लामिक हुलिए मेें ढाला अर्थात दाढ़ी बढ़ई, मूछ कटवाई मेहनत करके उर्दू सीखी परन्तु फिर भी ऐन मौके पर उन्हें पहचान लिया गया और मौलाना ने इस्लाम से जुडे किसी मुद्दे पर ओशो से बात करने से इंकार कर दिया। फिर भी ओशो ने सम्भोग के मुद्दे पर जो विचार प्रस्तुत किये है उनसे मुस्लिम समा जअछूता नहीं है ।

मुस्लिम देशों और मुस्लिम समाज के लोग ओशो के साहित्य का गुप्त रूप से अध्ययन करते हैं और ओशो की बहुत सी पुस्तकों का उर्दू में अनुवाद भी हो चुका है। "संभोग से समाधि" ओशो की सबसे चर्चित पुस्तक है। जो ब्रह्मचर्य से मुकम्मल दूरी बनाये रखने की बात करती है और इस पुस्तक मेें जिस मुद्दे पर विशेष जोर दिया गया हे वह इस्लामी लिटरेचर में भी मिलता है और मुस्लिम समाज की मुस्लिम महिलाओं से जुड़े अनेक मुद्दों मे भी यही बिन्दु चर्चा का विषय होता है।

ओशो एक आध्यात्मिक महापुरुष कहे जाते हैं, उन्होंने अनेक पुस्तकें लिखी हैं और सभी पुस्तकों में अनोखापन और प्रेम का सिद्धांत मौजूद है । विश्व में ओशो प्रेमियों की एक अच्छी खासी तादाद है और पश्चिमी देशों और कल्चर से जुुड़े पुरूष और महिलाएं भी काफी संख्या में ओशो को अपना गुरु मानती हैं। कुल मिलाकर ओशो प्रेमियों के जीवन यापन का अलग अन्दाज है ।

Desk Editor
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