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हालत पत्रकारों की भी बहुत बुरी है मगर हिम्मत नहीं कुछ बोले, मौत का आंकड़ा 426 तक तो पता है बाकी ...

किसी के पास कोई आंकड़ा नहीं है कि देश में कितने पत्रकार इस कोविड में मौत के मुंह में समा गए.

हालत पत्रकारों की भी बहुत बुरी है मगर हिम्मत नहीं कुछ बोले, मौत का आंकड़ा 426 तक तो पता है बाकी ...
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शकील अख्तर

हालत पत्रकारों की भी बहुत बुरी है मगर हिम्मत नहीं आ रही। आई एम ए ने हिम्मत दिखाई है। बताया कि कितने डाक्टर मरे। बाकी किसी के पास तो कोई आंकडे ही नहीं हैं। पत्रकारों की तो ऐसी कोई अपेक्स बाडी ही नहीं है जो IMA की तरह बताए।

प्रेस कौंसिल है मगर वह बोलती नहीं। मगर फिर भी 426 पत्रकारों के नाम हैं जिन्होंने कोरोना में काम करते हुए जान दी। विभिन्न संगठनों ने यह आंकड़ा इकट्ठा किया। संख्या ज्यादा हो सकती है क्योंकि इसमें छोटे शहरों के नाम शामिल नहीं है। फोटोग्राफर, कैमरामेन दूसरे मीडिया कर्मी भी बहुत मरे हैं।

नौकरियां बहुत बड़ी तादाद में गई हैं। उसके अवसाद में आत्महत्याएं हुईं। जिन्हें कहीं गिना नही गया। गोदी में बैठे मीडिया को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है। मगर फील्ड में काम कर रहा पत्रकार और उसका परिवार सड़क पर आ जाता है।

Shiv Kumar Mishra
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