Top
Begin typing your search...

अंतिम समीक्षा यही है कि अपराध एवं माफियाराज के खिलाफ कार्रवाई?

हाँ हिन्दूत्व, राम मंदिर, और पूर्व सरकारों के राज्य प्रायोजित साम्प्रदायिक तुष्टिकरण के खिलाफ उनके कदमों से उनके हिन्दू हृदय सम्राट की छवि और मजबूत हुईं हैं!

अंतिम समीक्षा यही है कि अपराध एवं माफियाराज के खिलाफ कार्रवाई?
X
  • Facebook
  • Twitter
  • Whatsapp
  • Telegram
  • Linkedin
  • Print
  • Facebook
  • Twitter
  • Whatsapp
  • Telegram
  • Linkedin
  • Print
  • Facebook
  • Twitter
  • Whatsapp
  • Telegram
  • Linkedin
  • Print

अंतिम समीक्षा यही है कि अपराध एवं माफियाराज के खिलाफ कार्रवाई, प्रदेश की बिजली आपूर्ति व्यवस्था, सड़क निर्माण एवं आधारभूत संरचनाओं के ऊपर योगीजी के नेतृत्व में अबतक जबरदस्त कार्य हुआ है! लेकिन रोजगार के अवसर पर उनके दावे बेईमानी है! ऐसा नहीं है कि उन्होंने रोजगार उपलब्ध कराने की कोशिश नहीं की, लेकिन वह रोजगार और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराने में केवल इसलिए विफल हुए हैं।

क्योंकि उन्होंने अपने मंत्रिमंडल के सहयोगियों, संगठन पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के फीडबैक से ज्यादा भरोसा नौकरशाहों के मायावी डेटाबेस पर रखा! पूरे कार्यकाल के दौरान उनको यह लगता रहा कि नौकरशाह उनके इशारे पर एक पैर खड़े होकर काम कर रहे हैं जबकि सच्चाई यह है कि नौकरशाहों ने स्वयं योगीजी जी को लंगड़ा बना दिया! जमीनी हकीकत यह है कि आज वह कार्यकर्ताओं की पसंद की जगह मात्र मजबूरी बन गए हैं! चार साल पहले रोजगार के संबंध में योगीजी की जो छवि कार्यकर्ताओं में थी निश्चित रूप से अब उस छवि को धक्का लगा है!

हाँ हिन्दूत्व, राम मंदिर, और पूर्व सरकारों के राज्य प्रायोजित साम्प्रदायिक तुष्टिकरण के खिलाफ उनके कदमों से उनके हिन्दू हृदय सम्राट की छवि और मजबूत हुईं हैं! कुल मिलाकर अगर रोजगार के क्षेत्र में विफलता को हटा दिया जाए तो योगी आदित्यनाथ जी ने एक मुख्यमंत्री के रूप अपने को बेहतर साबित किया है! हालांकि वह इससे भी बेहतर मुख्यमंत्री बन सकते थे अगर वह नौकरशाहों के मायाजाल में फंसने के बजाय अपने मंत्रिमंडल के साथियों को भरोसे में लेकर आगे बढ़ते!

डॉ रवींद्र प्रताप सिंह

सुजीत गुप्ता
Next Story
Share it