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समय की मांग है पुरुष आयोग का गठन

Satyapal Singh Kaushik
23 Oct 2022 11:45 AM IST
समय की मांग है पुरुष आयोग का गठन
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पुरुषों के ऊपर हो रहे अत्याचार को देखते हुए देश में अब पुरुष आयोग के गठन की मांग उठ रही है।

अभी हाल ही में 8 अक्टूबर को राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से सटे गाजियाबाद में एक लड़की से बलात्कार की घटना सामने आती है। घटना का परिदृश्य पूरी तरह से निर्भया जैसा दिखता है। घटना के बाद से ही समाज में पुरुषों के ऊपर सवालों का बौछार लगा दिया जाता है कि,पुरुष हवशी होते हैं,बलात्कारी होते हैं आदि तरह-तरह के कई सवाल। फिर जब पुलिस जांच करती है तो चौंकाने वाले रहस्य उजागर होते हैं। उस जांच में जो दृश्य सामने लिकलकर आता है वह बेहद दिलचस्प होता है। लड़की द्वारा खुद जानबूझकर अपने भाइयों को फंसाने के लिए बलात्कार की झूठी कहानी गढ़ी जाती है। अब,अगर सोचिए कि लड़की इस स्वरचित झूठी कहानी का पर्दाफाश नहीं हुआ होता तो उन निर्दोष लड़कों के साथ कितना बुरा होता। शायद आगे चलकर उनको फांसी भी हो सकती थी। लेकिन वो तो शुक्र है पुलिस का जिन्होंने समय रहते इस झूठी घटना का पर्दाफाश कर देते हैं और उन निर्दोष लड़कों को बचा लेते हैं।

समाज में पुरुषों के प्रति अत्याचार को देखते हुए देश में पुरुष आयोग के गठन की आवश्यकता

ऐसे में अगर देखा जाए तो अब इस बात की जरूरत पड़ जाती है कि हमारे देश में भी एक "पुरुष आयोग" होना चाहिए जो पुरुष के अधिकारों की रक्षा कर सके और गाजियाबाद में घटी इस घटना से अब पुरुष आयोग की सख्त जरूरत महसूस होती है। महिलाओं के लिए जो कानून बने हैं वे इतने एक पक्षीय हैं कि, पुरुषों को हमेशा खलनायक सिद्ध करते हैं। इसलिए अब जेंडर न्यूट्रल कानून की मांग उठने लगी है। अपराधी चाहे जो भी हो चाहे वह स्त्री हो या पुरुष अगर वह दोषी है तो उसे सजा मिलनी चाहिए। आखिर में दोषी मानकर कब तक पुरुषों को ही सताया जाएगा।

अभिनेत्री पूजा बेदी ने की है पहल

हालांकि इस दिशा में एक अच्छी पहल हुई है और पुरुषों द्वारा "मैन टू अभियान" चलाया जा रहा है प्रसिद्ध अभिनेत्री पूजा बेदी के नेतृत्व में इस अभियान ने काफी जोर पकड़ा है। पूजा बेदी ने कहा कि अब वक्त आ गया है कि पुरुष अधिकारों की भी बात होनी चाहिए। यह वह जमाना नहीं जिसे प्रतिशतता के वर्चस्व के वर्चस्व का पर्याय माना जाता हो। अब महिलाओं को भी पूरे अधिकार है। इसके बावजूद महिलाएं जब चाहे अपने को शक्तिशाली मानती हैं और जब चाहें तो वह बेचारी दिखने लगते हैं, उदाहरण के तौर पर ऐसी महिलाएं जो लिव इन रिलेशनशिप में रहती हैं और रिलेशनशिप टूटने के बाद रिलेशन में रहने वाले पुरुष पर बलात्कार का आरोप लगा देती हैं। पूजा बेदी ने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि 2013 से 2014 तक जितने भी केस दर्ज हुए उनमें से 53 प्रतिशत केस झूठे पाए गए।

जानिए क्या कहते हैं NCRB के आंकड़े

NCRB के आंकड़ों को मानें तो दहेज के जितने भी केस हैं उनमें से 10 प्रतिशत केस झूठे पाए गए। NCRB के अनुसार उच्चतम न्यायालय ने भी कहा था कि जो कानून पति और ससुराल वालों से रक्षा के लिए बनाए गए थे अब उसी कानून का इस्तेमाल महिलाएं पति और ससुराल वालों के फंसाने में कर रही हैं।NCRB के आंकड़े बताते हैं कि हर एक विवाहित महिला की खुदकुशी की तुलना में घरेलू हिंसा और पत्नी द्वारा प्रताड़ित करने की वजह से शादीशुदा मर्द आत्महत्या करते हैं।CRISP के संस्थापक कुमार जाहगीरदार कहते हैं कि,बहुत से पिता आत्महत्या कर रहे हैं क्योंकि वे अपने बच्चों से मिल नहीं पाते हैं। पुरुषों को महिलाओं से ज्यादा संवेदनशील बताते हुए जाहगीरदार ने फिर कहा कि सरकार को 'राष्ट्रीय पुरुष आयोग' के गठन पर अवश्य विचार करना चाहिए। वह कहते हैं कि,'यह देश पुरुषों के खिलाफ पक्षपातपूर्ण रवैया रखता है। पुरुष महिलाओं से ज्यादा खुदकुशी करते हैं। पितृसत्ता महिलाओं की तुलना में पुरुषों को ज्यादा प्रभावित करती है। कोई भी विवाहित मर्दों की खुदकुशी पर बात नहीं करता है। हर साल सैकड़ों पुरुष दहेज के झूठे विवादों के कारण जान दे देते हैं।"

वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ.एपी सिंह भी कर चुके हैं वकालत

निर्भय केस के वकील डॉ. एपी सिंह ने भी पुरुष आयोग बनाने पर अपनी राय जाहिर कर चुके हैं।समय-समय पर ऐसी घटनाएं देखने को मिलती रहती हैं जब किसी महिला से तंग आकर कोई पुरुष आत्महत्या कर लेता है,लेकिन ऐसी घटनाओं का बड़े पैमाने पर कभी भी बात नहीं होती है। अगर संविधान की बात की जाए तो देश के सभी नागरिकों को समान अधिकार प्राप्त हैं।भले ही वह हिंदू हो, मुस्लिम हो,सिख हो या ईसाई या फिर किसी भी जाति-धर्म का हो। लेकिन अगर महिलाओं के लिए महिला आयोग है और पुरुषों के लिए पुरुष आयोग नहीं है तो इसे पुरुष समाज के साथ भेदभाव क्यों नहीं माना जाए? ऐसे में पुरुषों के लिए पुरुष आयोग बनाने की सख्त आवश्यकता है।




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Satyapal Singh Kaushik

Satyapal Singh Kaushik

न्यूज लेखन, कंटेंट लेखन, स्क्रिप्ट और आर्टिकल लेखन में लंबा अनुभव है। दैनिक जागरण, अवधनामा, तरुणमित्र जैसे देश के कई प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में लेख प्रकाशित होते रहते हैं। वर्तमान में Special Coverage News में बतौर कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हूं।

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