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जो मक़्तल हो उसे मक़्तल बतइयो फ़क़त महफ़िल को ही महफ़िल बतइयो :गाजियाबादी

अरे मरता है क्यूँ तिल-तिल बतइयो कहानी कुछ तो ए बिस्मिल बतइयो...

जो मक़्तल हो उसे मक़्तल    बतइयो    फ़क़त महफ़िल को ही महफ़िल बतइयो :गाजियाबादी
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जो मक़्तल हो उसे मक़्तल

बतइयो

फ़क़त महफ़िल को ही महफ़िल बतइयो

अरे मरता है क्यूँ तिल-तिल बतइयो

कहानी कुछ तो ए बिस्मिल

बतइयो

लहू भी बोलता है याद रखियो

जो क़ातिल हो उसे क़ातिल बतइयो

चलेगा कारवाँ रुकता-ठहरता

पडावों को ही मत मँज़िल बतइयो

कोई पूछे हदीसों के जो क़ातिल

बरहना फ़िल्म और नॉविल बतइयो

किसी मज़दूर का मत हक़ दबाना

उसे ग़ुस्से में मत जाहिल

बतइयो

हवाओ मेरे परदेसी मेरी

ज़रा आराम से मुश्किल बतइयो

तू अपने पाँव के छालों की हालत

बताए तो सरे-मँज़िल बतइयो

सुनों स्कूल के बस्तों में बच्चों

फ़क़त महफ़ूज़ मुस्तक़बिल बतइयो

हमारी हिडकियाँ बँध जाएंगी अब

ज़रा रुक-रुक के दर्दे-दिल बतइयो

यही मासूम से बच्चे हैं इनको

नई तहज़ीब का हासिल बतइयो

- मासूम गाज़ियाबादी

Desk Editor
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