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दिल्ली में कोरोना संक्रमण से मरने वाले लोगों में 70% ने नहीं ली थी वैक्सीन

दिल्ली में बीते चार दिनों में 97 लोगों की मौत हुई है। उसमें 70 लोग ऐसे है जिन्होंने कोरोना टीके की एक भी डोज नहीं ली थी।

दिल्ली में कोरोना संक्रमण से मरने वाले लोगों में 70% ने नहीं ली थी वैक्सीन
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राजधानी दिल्ली में कोरोना की तीसरी लहर चल रही है। उसके बाद भी अगर आपने अभी तक कोरोना टीका नहीं लगवाया है तो ये आंकड़े अपने डर का कारण बन सकते है। बता दें कि दिल्ली में बीते चार दिनों में 97 लोगों की मौत हुई है। उसमें 70 लोग ऐसे है जिन्होंने कोरोना टीके की एक भी डोज नहीं ली थी। जिन 27 लोगों ने कोविड का टीका लगवाया था, उसमें 19 ऐसे थे जिन्होंने सिर्फ एक डोज लगवाया था।

बता दें कि राजधानी में बीते कुछ दिनों से कोरोना संक्रमण से मरने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही थी। बुधवार को दिल्ली में 40 लोगों की मौत हुई। जिसके बाद 9 से 12 जनवरी के बीच मरने वालों लोगों को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने एक अध्ययन किया। इस अध्यन में पाया कि मरने वालों में 50 फीसदी लोग ऐसे है जो किसी न किसी दूसरी बीमारी से ग्रसित थे। उसमें 70 लोग ऐसे जिन्होंने कोरोना टीके की एक भी डोज नहीं लगवाई थी। पांच दिनों में 7 ऐसी मौत भी है जिनकी उम्र 18 साल से कम थी।

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार लोग अस्पताल पहुंचने में देरी कर रहे है। कुल मौतों में करीब 40 फीसदी लोग की अस्पताल पहुंचने के अगले 48 घंटे के भीतर मौत हो गई। दीपचंद बंधू अस्पताल में एक महिला की मौत के अगले दिन कोरोना रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव इसी तरह डीडीयू अस्पताल में एक 13 साल के बच्चे की मौत 24 घंटे के अंदर हो गई। डीडीयू में ही एक महिला को 11 जनवरी को भर्ती कराया गया, उसी दिन उसकी मौत हो गई। बाबा साहेब अंबेडकर अस्पताल में एक 10 साल के बच्चे को 10 जनवरी को अस्पताल आएं, 11 जनवरी को मौत हो गई। दोनों बच्चों के मामले में उन्हें 3-4 दिन से बुखार, कफ, सीने में दर्द के साथ सांस लेने में तकलीफ थी।

इन बीमारी वालों रहे सावधान

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार मरने वालों में सबसे ज्यादा दूसरी बीमारी से ग्रसित लोग है। इसमें किडनी, हृदय रोग, लीवर, श्वसन तंत्र और कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से ग्रसित लोग ज्यादा शामिल है। ऐसे लोगों ने कोविड का टीका भी नहीं लगवाया है। स्वास्थ्य विभाग ने अस्पतालों को कहा है कि अगर कोई कोरोना संक्रमित दूसरी बीमारी से ग्रसित है तो उसका इलाज उसका विशेषज्ञ डॉक्टर ही करेगा। जिससे मौतों की संख्या को कम किया जा सके।

Sakshi
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