Begin typing your search...

परिवार था खिलाफ, चार घंटे की थी फिल्म, निर्देशक को भी मिलने लगी थी जान से मारने की धमकी

अगर वे (सैनिक) हमारे लिए खड़े हो सकते हैं, मेरे लिए वे अपनी जान दे सकते हैं तो मैं उनके लिए क्यों नहीं मर सकता? मैं पीछे हटने वाला नहीं हूं। मैं यह करूंगा और इतिहास दर्ज करूंगा, चाहे वह (लेफ्टिनेंट) मनोज पांडे हो या (लेफ्टिनेंट) विक्रम बत्रा या (लेफ्टिनेंट सौरभ) कालिया।‘

परिवार था खिलाफ, चार घंटे की थी फिल्म, निर्देशक को भी मिलने लगी थी जान से मारने की धमकी
X
  • Whatsapp
  • Telegram
  • Linkedin
  • Print
  • koo
  • Whatsapp
  • Telegram
  • Linkedin
  • Print
  • koo
  • Whatsapp
  • Telegram
  • Linkedin
  • Print
  • koo

मुंबई। आजादी को मिले हमें 75 साल बीत गए हैं। इसी कड़ी में आज हम लोग 15 अगस्त के दिन अपना स्वतंत्रता दिवस मना रहे हैं। इस शुभ अवसर पर हमारे देशवासी काफी खुश हैं और इसे लेकर उत्सुक भी। कहते हैं सिनेमा देशों को जोड़ने का काम करता है। भारत की कई फिल्मों को देश-विदेश में खूब पसंद किया जाता है। वही आजादी के बाद बॉलीवुड में देशभक्ति से प्रेरित कई फिल्में बनी हैं। इन फिल्मों में जेपी दत्ता की 'बॉर्डर' और 'एलओसी कारगिल' मुख्य हैं।

हालांकि जेपी दत्ता के लिए इन फिल्मों को बनाने का फैसला आसान नहीं था। उन्हें जान से मारने की धमकी तक मिली थी लेकिन वह पीछे नहीं हटे। 'बॉर्डर' की रिलीज के बाद जेपी दत्ता के परिवार पर खतरा मंडराने लगा था। जिसके बाद परिवार ने 'एलओसी कारगिल' बनाने से मना किया था लेकिन जेपी दत्ता अपने फैसले पर अड़े रहे।

'बॉर्डर' की कहानी 1971 के भारत-पाक युद्ध पर आधारित थी। फोर्ब्स के लिए लिखे गए एक कॉलम में जेपी दत्ता ने बताया कि 'फिल्म की रिलीज के बाद उनकी जान को खतरा था जिसके बाद उन्हें दो हथियारबंद बॉडीगार्ड्स दिए गए।' उन्होंने बताया कि वे हमेशा उनके साथ साए की तरह रहते थे और करीब 3-4 महीने तक साथ थे।


जेपी दत्ता ने एलओसी कारगिल बनाने का फैसला किया लेकिन उनका परिवार इसके खिलाफ था। वह कहते हैं कि 'मैंने अपने परिवार के साथ बहस की और कहा कि हम सभी को किसी ना किसी तरह, कभी ना कभी मरना होगा। अगर वे (सैनिक) हमारे लिए खड़े हो सकते हैं, मेरे लिए वे अपनी जान दे सकते हैं तो मैं उनके लिए क्यों नहीं मर सकता? मैं पीछे हटने वाला नहीं हूं। मैं यह करूंगा और इतिहास दर्ज करूंगा, चाहे वह (लेफ्टिनेंट) मनोज पांडे हो या (लेफ्टिनेंट) विक्रम बत्रा या (लेफ्टिनेंट सौरभ) कालिया।'

जेपी दत्ता ने आगे कहा था कि 'मैंने पैसे कमाने के लिए फिल्म नहीं बनाई और ना ही बॉक्स ऑफिस के लिए। मैंने फिल्म को तीन घंटे या ढाई घंटे करने का फैसला नहीं लिया। यह चार घंटे की फिल्म थी और मैंने उस लंबाई को बरकरार रखा क्योंकि मैं अधिकारियों से मिला था। मैंने उनके बच्चों से मिला, कैसे वे बड़े हुए, कैसे वे लड़े। अगर मैंने फिल्म काट दी होती तो मुझे फिल्म से उनके जीवन और उनकी कहानियों को हटाना पड़ता। मैं उन परिवारों का फिर कभी सामना नहीं कर पाता।'

जेपी दत्ता ने बताया कि 'एलओसी कारगिल' की रिलीज के बाद उन्हें धमकियां मिलनी बंद हो गई थीं। इस फिल्म की कहानी 1999 में कारगिल युद्ध पर आधारित थी। इसमें अजय देवगन, संजय दत्त, अभिषेक बच्चन, सुनील शेट्टी, सैफ अली खान, मनोज बाजपेयी, करीना कपूर, रानी मुखर्जी, ईशा देओल और रवीना टंडन की मुख्य भूमिका थी।




सुजीत गुप्ता
Next Story
Share it