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अफगानिस्तान: इस्तीफे की पेशकश के बीच,राष्ट्रपति अशरफ गनी बोले,'हम अस्थिरता रोकेंगे'

समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, अफगानी लोगों को अपने संबोधन में राष्ट्रपति अशरफ गनी ने कहा कि वह स्थिति पर स्थानीय नेता और अंतर्राष्ट्रीय भागीदारों के साथ परामर्श कर रहे हैं.

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नई दिल्ली: अफगानिस्तान में तालिबान अभी तक 18 प्रांतो पर कब्ज़ा कर चूका है.राजधानी काबुल से मात्र 50 किलोमीटर दूर पर है.तालिबान अपने कदम लगातार बढ़ा रहा है.वही क़तर में अफगानिस्तान और तालिबान के बीच वार्ता भी चल रही है.वार्ता में सरकार ने तालिबान को सरकार में जगह देने की भी पेशकश की थी.वही खबर यह भी आ रही थी की राष्ट्रपति अशरफ गनी इस्तीफा दे सकते है.इसी बीच राष्ट्रपति अशरफ गनी ने देश को संबोधित करते हुए कहा है कि हम अस्थिरता रोकेंगे.

समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, अफगानी लोगों को अपने संबोधन में राष्ट्रपति अशरफ गनी ने कहा कि वह स्थिति पर स्थानीय नेता और अंतर्राष्ट्रीय भागीदारों के साथ परामर्श कर रहे हैं.

वही,TOLO news के मुताबिक राष्ट्रपति गनी ने कहा, "मैं आपको विश्वास दिलाता हूं कि आपके राष्ट्रपति के रूप में मेरा ध्यान लोगों की अस्थिरता, हिंसा और विस्थापन को रोकने पर है. मैं अफगानों पर युद्ध थोपने नहीं दूंगा. न ही 20 वर्षों के लाभ को हानि में बदलकर कत्ले आम और सार्वजनिक संपत्ति का विनाश होने दूंगा."

टोलो न्यूज के मुताबिक, राष्ट्रपति अशरफ गनी ने कहा कि मौजूदा स्थिति में, अफगानों की रक्षा और सुरक्षा बलों को फिर से संगठित करना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है. गनी ने इस बात के कोई संकेत नहीं दिए कि वह पद से इस्तीफा देंगे या मौजूदा स्थिति की जिम्मेदारी लेंगे, लेकिन उन्होंने कहा कि युद्ध की कोशिश करने और समाप्त करने के लिए वह "परामर्श" कर रहे हैं.

बता दें कि तालिबान लड़ाकों ने शुक्रवार को लोगहर प्रांत की राजधानी पुल-ए-आलम पर भी कब्जा कर लिया. अब यहां से काबुल सिर्फ 50 किलोमीटर (30 मील) दूर है. तालिबान ने अपने आध्यात्मिक गढ़ कंधार, जो अफगानिस्तान का दूसरा सबसे बड़ा शहर है, पर भी नियंत्रण कर लिया है. फिलहाल सरकार के नियंत्रण में कुछ शहर बचे हुए हैं.

इस बीच, संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने इस बात पर चिंता जताते हुए कहा है कि अफगानिस्तान में हालात "नियंत्रण से बाहर हो रहे हैं." उन्होंने तालिबान से फौरन हमले रोकने को कहा है. उन्होंने कहा कि सैन्य ताकत के जरिए सत्ता छीनना एक "असफल कदम" है और यह सिर्फ और सिर्फ लंबे समय तक गृहयुद्ध चलने का और युद्धग्रस्त राष्ट्र के पूरी तरह से अलग-थलग होने का कारण बन सकता है.









RUDRA PRATAP DUBEY
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