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झारखंड का ऐतिहासिक धरोहर,नवरत्न गढ़ का किला

झारखंड का ऐतिहासिक धरोहर,नवरत्न गढ़ का किला
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15नवंबर को झारखंड स्थापना दिवस के रूप में मनाया जाता है।इसदिन ही इसे एक अलग राज्य का दर्जा दिया गया था। झारखंड के स्थापना दिवस के अवसर पर आज मैं झारखंड की एक ऐतिहासिक धरोहर की व्याख्या करूंगी।

नवरत्नगढ़ का किला झारखंड के गुमला जिला के सिसई प्रखंड में नागवंशियों की एक अमिट धरोहर है नवरत्नगढ़ का किला। जिसकी स्थापना नागवंशी राजा दुर्जन शाल ने किया था। अरसे तक उपेक्षित रहने के बाद भारत सरकार ने 27 सितंबर 2019 में इसे राष्ट्रीय धरोहर की मान्यता दे दी।

डोयसा गांव में होने के कारण इसे डोयसागढ़ भी कहा जाता है। झारखंड की राजधानी राँची से इसकी दूरी मात्र 70किलोमीटर है। ऐतिहासिक मान्यता के अनुसार छठी; सातवीं शताब्दी में तीन शासकों का ही प्रभुत्व था।बिहार-झारखंड और उड़ीसा में नागवंशी, बंगाल में पाल और मध्यप्रदेश में भोजवंशी।

इन तीनों में अपनी संस्कृति और धर्म को लेकर बहुत ही अधिक अनबन रहती थी।नागवंशी मूल रूप से शैव थे। अपनी सुरक्षा और धर्म की रक्षा के लिए ये अपनी राजधानी हमेशा बदलते रहते थे। आज भी उनके साक्ष्य झारखंड के कई क्षेत्रों में बिखरे हुए दिखते हैं।

नागवंश के संस्थापक दुर्जन शाल का शासन काल मुगल शासक जहांगीर के समय का माना जाता है। लगान नहीं देने के कारण मुगल सूबेदार इब्राहिम खान ने दुर्जन शाल को 1615 ई. में बंदी बना लिया था। हीरे का पारखी होने के कारण जहांगीर ने 1627ई. में छोड़ दिया।

दुर्जन शाल को कैद से रिहा करने के बाद जहांगीर ने दुर्जन शाल को एक वास्तुकार भेंट किया था। दुर्जन शाल बहुत ही सामान्य और मिलनसार व्यक्ति थे।लेकिन मुगलों के कैद में रहकर उन्होंने राजसी ठाठबाट देख लिया था इसलिए उन्होंने भी अपने लिए महल बनवाया।

डोयसा गाँव में उन्होंने अपने लिए एक राजमहल बनवाया।महल पाँच मंजिला इमारत है जिसके चारों ओर सैनिकों के गुप्त भवन बने हुए हैं। रानी के लिए एक अलग महल है।महल से सटे एक विशाल तालाब तथा तालाब तक जाने के लिए सुरंग भी बना हुआ है।

तालाब के किनारे मंदिरों के समूह भी बने हुए हैं। नागवंश शासन काल दुनिया के लिए एक अजूबा ही है क्योंकि इसकी शुरुआत प्रथम शताब्दी में हुई थी और आज तक उसके अवशेष मौजूद हैं यह किसी आश्चर्य से कम नहीं।

लंबे समय से नवरत्नगढ़ को राष्ट्रीय धरोहर के रुप में स्थापित करने की माँग उठ रही थी लेकिन अब इसे मान्यता मिलने के बाद अब राष्ट्रीय पुरातत्व विभाग इसका जीर्णोद्धार करेगा और एक पर्यटन स्थल के रुप में विकसित करेगा। जो भी हो प्राकृतिक रूप से संपन्न झारखण्ड ऐतिहासिक दृष्टि से भी संपन्न है।

सीमा सहाय(लेखिका)

सुजीत गुप्ता
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