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निन्दक नियरे राखिये, अपनी समझ से देवघर के इस विकास का मुख्य श्रेय मैं निशिकांत दुबे जी को ही देता हूं

निन्दक नियरे राखिये,  अपनी समझ से देवघर के इस विकास का मुख्य श्रेय मैं निशिकांत दुबे जी को ही देता हूं
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राणा सिंह

आंख मूंदकर किसी के विपक्ष में लिखते रहना न कि सिर्फ अहमन्यता है पत्युत खुद को अंधकार के गह्वर में ले जाने जैसा है। यह सवाल दिमाग में आया क्योंकि मोदी जी के एक प्रशंसक ने मुझसे पूछा कि क्या आपको मोदी जी में कुछ भी अच्छा दिखाई नहीं देता?

बहुत दूर न जाकर अगर सिर्फ अपने देवघर शहर की छोटी परिधि में रहकर चीजों का मूल्यांकन करूं तो मोदी युग की उपलब्धियों की समुचित लिस्ट पेश करना सुलभ होगा। इसमें कोई संदेह नहीं कि पिछले दस सालों में मेरे इस छोटे शहर में कुछ बहुत बड़े परिवर्तन आये जिनका क्रमवार वर्णन नीचे है।

प्रथम तो यह कि देवघर की सड़कें विगत सालों में बहुत खूबसूरत और चौड़ी हो गई हैंएवं सड़कों के दोनों ओर दस दस फीट की चौड़ाई में लगे पेभर्स ने इनकी सुंदरता और बढ़ा दी हैं। शहर से बाहर निकलतीं सड़कें भी उतनी ही अच्छी हो चुकी हैं। देवघर से AIIMS होते हुए रांची जाने वाली सड़क का तो कहना ही क्या। सुनते हैं, इसका और भी चौड़ीकरण होने वाला है।

चूंकि देवघर भोले शंकर की नगरी है और यहां तीर्थयात्रियों की भरमार रहती है, इसलिए शहर के सौंदर्यीकरण के लिए फण्ड खूब आया और काम भी बेहतरीन हुआ। आज शहर के लगभग सभी जलाशयों को बहुत ही सुंदर पार्कों में परिणत कर दिया गया है। यह जरूर है कि आप उनमें फ्री नहीं घुस सकते। अंदर जाने के लिए दस से बीस रुपये प्रति व्यक्ति टिकट का प्रावधान है।

हमारे लोकल जैसीडीह रेलवे स्टेशन का तो कायाकल्प ही हो गया। स्टेशन का काफी विस्तार हुआ, प्लेटफार्म पर नया ओवरब्रिज बना, लिफ्ट लगा, सामने पार्क बना, यात्री भवन बना, स्टेशन के बगल का पुराना गंदा तालाब मनोहारी स्थल में परिणत हो गया, जिसके चारो ओर अब कार और टेम्पो के लिए बहुत बड़े पार्किग की सुविधा है।

एक बिल्कुल नये खूबसूरत देवघर स्टेशन का निर्माण हुआ तथा बगल में एक बहुत बड़े आधुनिक किस्म का बस टर्मिनल बना। इस नए स्टेशन से सिलीगुड़ी से होते हुए अगरतल्ला तक जाने की नयी ट्रेन मिली। यह स्टेशन अब कई एक नये शहरों से जुड़ चुका है या जुड़ने की प्रक्रिया में है।

शहर के अंदर के पुराने चौड़े नालों को ढ़ककर उनके ऊपर चौड़ी सड़कों का निर्माण हुआ और हो रहा है। जिन नालों का कायाकल्प हो चुका , उनके अगल बगल की बात ही कुछ और हो गयी। BIT, Mesra का एक्सटेंशन सेंटर खुला। अब हम गर्व से कहते हैं कि हमारे यहां एक उच्च कोटि का इंजीनियरिंग कॉलेज है जहां अन्य राज्यों के छात्र भी पढ़ रहे हैं।

देवघर, AIIMS की स्थापना हुई, जहां तेजी से काम जारी है और शायद आगामी दो तीन सालों में यह एक अच्छा रूप ले ले। पूरे भारत के छात्र यहां पढ़ रहे हैं। AIIMS के बगल ही Plastic Park बन रहा है। AIIMS बनने के साथ वहां पांच दस हजार कठ्ठा वाली जमीन पन्द्रह बीस लाख प्रति कठ्ठा बिकने लगी है। देवघर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा बनकर लगभग तैयार है और शायद अगले कुछ माहों से यहां से हवाई यात्राएं भी शुरू होने की बात है।

इसके अलावे शहर में प्राइवेट पूंजी का भी अच्छा खासा निवेश हुआ है। इस दो तीन लाख की आबादी वाले छोटे शहर मे जितने होटल हैं उतने तो हमारे राज्य की राजधानी रांची में भी नहीं हैं। ऊपर से शहर इधर बड़े बड़े अपार्टमेंट्स से भरता जा रहा है।

यह भी याद रखिये कि हमारे इस शहर में हिंदू मुस्लिम वाली कोई बात नहीं होती। बगल भागलपुर में दंगे हुए पर यहां कभी कोई असर नहीं पड़ा। बाबा भोले के भक्त हिन्दू ही नहीं, बहुतेरे मुस्लिम भी हैं। इस शहर के मनोविज्ञान में दंगे फसाद नहीं हैं।

शहर में हुए इस चौतरफे विकाश का श्रेय तो किसी न किसी को देना ही पड़ेगा। तीन नाम दिमाग में सम्प्रति आ रहे हैं– प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी , पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास , तथा हमारे लोकल MP निशिकांत दुबे । अपनी समझ से देवघर के इस विकास का मुख्य श्रेय मैं निशिकांत दुबे जी को ही देता हूं।

(शेष बाद में)

Shiv Kumar Mishra
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