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ताइफ की गलियां, शदीद गर्मी, पैरों से निकलता खून,खून से भरी हुई जूतियां, दिल पर खंजर सी असर करने वाली, फब्तियां और हाथों से पत्थर बरसाते हुए लोग

ताइफ की गलियां, शदीद गर्मी, पैरों  से निकलता खून,खून से भरी हुई जूतियां, दिल पर खंजर सी असर करने वाली, फब्तियां और हाथों से पत्थर बरसाते हुए लोग
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परंतु फरिश्ते जिब्राइल ने जब कहा ऐ अल्लाह के नबी आप अगर आदेश दे तो ताइफ के लोगों को दोनों पहाड़ों के मध्य दबाकर खत्म कर दिया जाए । नबी ने जवाब दिया नहीं । यह शब्द उस नबी के थे जिन पर ताइफ शहर के लोग हिंसा कर रहे थे। ऐसी हिंसा की शरीर के अंगों से खून बह रहा था।

नबी का फरिश्ते को यह जवाब उन लोगों के लिए था जो इस्लाम के पैरोकार ना थे और जिनके हाथों और जबानो को आप पर जरा सा भी रहम नहीं आ रहा था।

हजरत मोहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहो अलेही वसल्लम को अल्लाह ने संसार के लिए रहमत बनाकर भेजा है। इसलिए शहर ताइफ मे इसलाम कि शिक्षा देने पर हिंसा की सारी हदें पार हो जाने के बावजूद आपने रहम दिली का सबूत दिया । आप अच्छे व्यवहार की शिक्षा देते थे। आप मनुष्य के अधिकारों को प्राथमिकता देते थे , ऐसे अधिकार जो किसी समाज में मौजूद व्यक्ति के सर्वो सम्मान से जीवन व्यतीत करने के लिए आवश्यक होते हैं। आप ईमानदारी और हक परस्ती का मुजस्समा थे । आप की ईमानदारी का यह आलम था की मक्का के वो लोग जो आप से शत्रुता का इजहार किया करते थे और आपकी जान के दुश्मन थे अपनी चीजें आपकी निगहबानी मे रखना पसंद करते थे। मक्का के लोग आपके बचपन ही से आपकी ईमानदारी और हक परस्ती के कायल थे।

आपसे पहले अरब की पहचान एक ऐसे देश के रूप में थी जहां औरतों की कोई इज्जत नहीं थी , एक बेटी के रूप में , एक बहू के रूप में और ना एक बीवी के रूप में उसे कोई अधिकार प्राप्त थे। बेटियों को बड़ा होते ही जिंदा दफन कर देने का रिवाज था। ब्याही गई औरत पति की मौत पर या उसके नापसंद दीदगी पर अक्सर प्रयोग की जाने वाली वस्तु की समान हुआ करती थी। आजादी उसके मुकद्दर से कोसों दूर थी। आपने इन तमाम कुरीतियों को अरब की सर जमीन से समाप्त किया। औरतों को बराबरी के अधिकार दिए । बेटियों की अहमियत को स्थापित किया। आप जब इस दुनिया में तशरीफ लाने वाले थे उस वक्त आपके पिता का देहांत हो गया जब आप थोड़े बड़े हुए तो आपकी मां भी इस दुनिया को छोड़ कर चली गई, उसके बाद आपको आपके दादा ने पाला , वह भी ज्यादा लंबे समय आपके साथ ना रहे और दुनिया को अलविदा कह दिया, इसके बाद आप अपने चाचा अबु तालिब की छत्र व छाया में रहे।

अरबों का पेशा व्यवसाय था। इसलिए मोहम्मद सo भी व्यवसाय किया करते थे।

हुजूर सल्लल्लाहो अलेही वसल्लम हजरत खदीजा रo का सामान तिजारत के लिए शहर से बाहर ले जाया करते थे हजरत खदीजा अरब की एक अमीर खातून थीं आपके इमानदारी से प्रभावित होकर उन्होंने आपके सामने विवाह का प्रस्ताव रखा जिसे आपने स्वीकार कर लिया जिस समय हजरत खदीजा ने आपके सामने विवाह का प्रस्ताव रखा उस समय आपकी उम्र 25 साल थी और हजरत खदीजा की उम्र 40 साल थी। हजरत खदीजा एक विधवा औरत थीं जिनके पति का देहांत हो चुका था। हजरत खदीजा से हुजूर को बेहद मोहब्बत थी, आप हुजूर सo की पहली पत्नी थीं , आपसे मोहब्बत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि हजरत खदीजा की मौत के बाद भी उनकी सहेलियों को रसूल तोहफे भिजवाया करते थे।

हजरत मोहम्मद मुस्तफा सo ने विधवा और तलाकशुदा औरतों से विवाह किया,आपने विधवा और तलाकशुदा औरतों से निकाह करके समाज को एक ऐसा पैगाम दिया जिसमें औरतों के लिए जिंदगी की रौनकें और नई राहें थी ।

केवल हजरत आयशा रo अपनी कमसिनी मे आपकी जिंदगी में आईं ।हजरत आयशा अल्लाह की तरफ से आपके लिए तोहफा थीं । हजरत आयशा और आपका विवाह विशेष था।इस की विशेषता यह थी कि हजरत आयशा का आपसे विवाह से पहले कोई वैवाहिक जीवन नहीं था।

हजरत आयशा बहुत बुद्धिमान थीं वह हुजूर के अनुयायियों को दरस दिया करती थीं।आप बीमारियों का उपचार बताया करती थीं , आपके बताए हुए उपचार बहुत लाभकारी हुआ करते थे। आपने इस्लाम की रक्षा के लिए जंग की व्यवस्था की थी आप को घुड़सवारी और तलवारबाजी का हुनर प्राप्त था। आप रसूल से बेइंतहा मोहब्बत करती थीं एक दफा एक यहूदी रसूल के पास आया और मौत की बद्दुआ देने लगा जब हजरत आयशा ने यह सुना तो आपको बर्दाश्त नहीं हुआ और आपने उस यहूदी से कहा तुम्हें मौत आए तुम्हें मौत आए। हजरत आयशा अमीर बाप की बेटी थीं, आप के पिता का नाम हजरत अबू बकर रo था । हजरत अबू बकर रसूल के दोस्त और अनुयायी थे आप भी रसूल सo से अपनी जान से ज्यादा मोहब्बत करते थे आप ही ने इस धरती पर हजरत आयशा से निकाह का प्रस्ताव रसूल के समक्ष रखा था। हजरत आयशा रo सामाजिक कार्य को इतनी प्राथमिकता देती थीं की अपना खाना तक दान कर दिया करती थीं अक्सर ऐसा होता की आपके खाने के लिए घर में कुछ भी बाकी नहीं रहता था। आप हुजूर से बहुत अधिक प्रश्न किया करती थीं और अपने मालूमात में इजाफे के लिए उत्सुक रहा करती थीं। जब रसूल सoका आखरी वक्त था तो वह आप ही के कमरे में आप ही के बिस्तर पर मौजूद थे , आखिरी वक्त में जिस दातून का प्रयोग रसूल सo ने किया था वह आप ही ने अपने दांतो से नरम करके रसूले पाक के मुंह में रखा था।

हमें मालूम है रसूल मानव अधिकार की रक्षा में तमाम जीवन प्रयासरत रहें और ऐसे नियम संसार को दिए जिनके बगैर मानवाधिकार के रक्षा की कल्पना भी नहीं की जा सकती । मानव अधिकार की रक्षा के लिए आपके नजरिए को इन दो बातों से समझा जा सकता है। एक बार एक बूढ़ा व्यक्ति जिसके पास अच्छे कपड़े और चादर नहीं थी आपके सामने हाजिर हुआ और आपके सीने से लिपटी हुई चादर पर अपना अधिकार जताते हुए जोर से खींच लिया, उसके चादर जोर से खींचने के कारण आपको पीड़ा पहुंची और आपके शरीर पर निशान बन गए परंतु आपने अपनी जबान से उफ तक नहीं कहा और चादर पर बूढ़े व्यक्ति के अधिकार को प्राथमिकता देते हुए चादर उसके सुपुर्द कर दी। दुनिया के इतिहास में ऐसा उदाहरण नहीं मिलता की वस्तु के छीन लेने पर किसी ने छीनने वाले के साथ मोहब्बत व हमदर्दी का व्यवहार किया हो जबकि उस चादर की आवश्यकता आप को थी।

रूस यूक्रेन युद्ध के दौरान औरतों के बलात्कार का सिलसिला जारी है। दुनिया का इतिहास गवाह है जब भी कभी जंग होती है तो सबसे ज्यादा हिंसा औरतों को झेलनी पड़ती है। जंग के दौरान औरतों की सजा के लिए बलात्कार को चुना जाता है। परंतु इस्लाम के शत्रुओं के अहवान पर इस्लाम के लिए जो भी जंग लड़ी गई उनमें रसूल सoके आदेश अनुसार यह उसूल होता था की लड़ाई के लिए पहल नहीं की जाएगी, हर मुमकिन जंग से बचने की कोशिश की जाएगी, औरतों की हिफाजत की जाएगी बच्चों और बूढ़ों पर रहम किया जाएगा किसी भी हरयाली को नष्ट नहीं किया जाएगा । औरतों को हाथ लगाना तो दूर उनकी तरफ नजर उठाकर भी नहीं देखा जाएगा।आप ने जंग के लिए जिन नियमों को तय किया उनका उदाहरण दुनिया में किसी दूसरी जगह पर नहीं मिलता। आपने बैतुल माल का Concept दिया जिसके माध्यम से निर्धनों की आवश्यकताओं को सरलता से पूरा किया जा सकता है। और समाज में आर्थिक बराबरी कायम की जा सकती है। आपने ऐसे व्यक्ति के खाने को उस पर हराम करार दिया जिसके पड़ोसी के पास खाने के लिए कुछ ना हो और वह भूख की हालत में सो जाएं ।

रसूल ने मानवता का संदेश केवल दिया ही नहीं बल्कि उसे व्यवहारिक रूप से सार्थक करके दिखाया आपने एक औरत हिंदा जिसने आपके चाचा को मारने और उनके अंगों को चबाने का प्रण लिया था और आपके चाचा के शरीर के साथ मरणोपरांत अमानवीय व्यवहार किया था, उसे भी माफ कर दिया बस इतनी गुजारिश की के वह नजरों के सामने ना आया करे, क्योंकि आपको उसे देख कर अपने प्यारे चाचा पर किए गए अत्याचार की याद आती थी। रसूल सo मानवता के कार्य में इस कदर व्यस्त रहते और माली रूप से इतना योगदान करते कि आपने अपने जीवन में कभी पेट भर खाना नहीं खाया।

माइकल हार्ट एक प्रसिद्ध व्यक्ति रहे हैं ।जब इन्होंने दुनिया के 100 महान व्यक्तियों पर किताब लिखी तो आपके किरदार जैसा किसी को भी ना पाया और आपको अपनी किताब में प्रथम स्थान पर जगह दी।

इस्लाम का बुनयादी उसूल है आप से मोहब्बत करना आपसे मोहब्बत के बगैर कोई मुसलमान मुसलमान की श्रेणी में नहीं आता।

डॉ बुशरा इरम

Shiv Kumar Mishra
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