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अपना एमपी गज्जब है..15: लोग बच्चे बेच के पुलिस को पैसे देते हैं..?

अपना एमपी गज्जब है..15: लोग बच्चे बेच के पुलिस को पैसे देते हैं..?
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अरुण दीक्षित

देश की संसद में भोपाल की जनता की नुमाइंदगी करने वाली संयासिन प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने एक बयान देकर राज्य की शिवराज सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया है।मजे की बात यह है कि प्रज्ञा ठाकुर भी उसी दल की हैं जिस की सरकार मध्यप्रदेश में हैं।फिर भी उन्होंने जो हिम्मत दिखाई है वह काबिले तारीफ़ है।

सांसद प्रज्ञा ने सनसनीखेज खुलासा किया है।उनका कहना है कि भोपाल के कुछ गांवों में गरीब लोग अपने बच्चे बेच कर पुलिस को पैसे देते हैं।

प्रज्ञा का एक वीडियो सामने आया है।यह वीडियो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर भोपाल में आयोजित एक कार्यक्रम का है।उद्योग व्यापार मंडल द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में प्रज्ञा ने कहा कि उन्होंने तीन गांव गोद लिए हैं।इन गांव की गरीब बच्चियों की वे पढ़ाई लिखाई में मदद करती हैं।मंडल की तरफ से भी उन्हें कुछ सामग्री दी गई है।

मंच से प्रज्ञा ने कहा - उन गांवों में लोग गरीब हैं।वे कच्ची शराब बनाते और बेचते हैं।ऐसे में पुलिस उन्हें पकड़ ले जाती है तो वे अपनी बच्चियों को बेच कर पुलिस को पैसे देते हैं और अपने लोगों को छुड़ाते हैं।

प्रज्ञा के इस बयान से राजनीतिक हलकों में सनसनी फैल गई है।जब भाजपा की सांसद ही कह रही हैं कि भोपाल में अवैध शराब बेचने वाले लोग बच्चों को बेचकर पुलिस को पैसा देते हैं।तब शक की गुंजाइश कहां बचती है!

जहां तक प्रज्ञा ठाकुर की बात है,यह सभी जानते हैं कि उनकी अपनी ही पार्टी की सरकार से पटरी नही बैठ रही है।पिछले 3 सालों में वे कई बार ऐसे बयान दे चुकीं हैं जिनसे राज्य सरकार पर सवाल उठे हैं।कई बार केंद्र सरकार भी कटघरे में आई है।इसी वजह से वे भोपाल की सांसद होते हुए भी पार्टी में हाशिए पर हैं।

प्रज्ञा सिंह ठाकुर भारतीय जनता पार्टी की छात्र इकाई विद्यार्थी परिषद में रही हैं।बाद में उन्होंने निजी कारणों से राजनीति छोड़ सन्यास ले लिया था।

वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में तब आई थीं जब महाराष्ट्र एटीएस ने उन्हें मालेगांव बम विस्फोट कांड में गिरफ्तार किया था।उससे पहले मध्यप्रदेश सरकार ने ही बागली के सुनील जोशी हत्याकांड में उन पर मुकदमा चलाया था।

राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के वरिष्ठ सदस्य इंद्रेश कुमार की करीबी माने जाने वाली प्रज्ञा ने महाराष्ट्र एटीएस पर उन्हें भारी शारीरिक यातना देने के आरोप भी लगाए थे।उनका आज भी यह कहना है कि इसी यातना की वजह से वह शारीरिक रूप से अक्षम हो गई हैं।शिवराज सिंह सरकार ने उन्हें जेल की बजाय भोपाल के आयुर्वेदिक अस्पताल में रख कर उनका इलाज भी कराया था।

यह अलग बात है कि अक्सर व्हील चेयर पर चलने वाली सांसद अब गरबा करते और फुटबाल खेलते भी दिखाई देती हैं।

यह भी कहा जाता है कि संघ की सिफारिश के चलते ही प्रज्ञा को भोपाल से लोकसभा का टिकट दिया गया था।उन्होंने कांग्रेस के दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह को तीन लाख से भी ज्यादा मतों से हराकर रिकॉर्ड बनाया था।

सांसद बनने के बाद से प्रज्ञा लगातार चर्चा में रही हैं।वे अक्सर विवादित बयान देती रही हैं।खुद प्रधानमंत्री भी उनके बयानों पर नाखुशी जाहिर कर चुके हैं।

अब बच्चियों को बेचकर पुलिस को पैसे देने का उनका बयान ऐसे समय में सामने आया है जब मुख्यमंत्री ने झाबुआ के एसपी को सिर्फ इसलिए निलंबित किया है क्योंकि उन्होंने छात्रों से बात करते समय पुलिसिया भाषा का इस्तेमाल किया था।ऐसे आरोप में किसी आईपीएस अधिकारी को निलंबित किए जाने का यह पहला मामला है।

माना जा रहा है कि अपनी ही पार्टी की सांसद के इस बयान से शिवराज की मुश्किलें बढ़ेंगी। अपने अस्तित्व को बचाए रखने के लिए संघर्ष कर रही कांग्रेस इस मुद्दे पर उन्हें घेरेगी।राष्ट्रीय क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो की सालाना रिपोर्ट ने उन्हें पहले से ही कटघरे में खड़ा कर रखा है।बच्चियों और महिलाओं के प्रति हर तरह के अत्याचार के मामलों में मध्यप्रदेश देश में पहले पायदान पर है।

ऐसे में पुलिस को पैसे देने के लिए छोटी छोटी बच्चियों को बेचने की बात सरकार के लिए एक बड़ा धक्का साबित हो सकती है।क्योंकि यह बात किसी और ने नहीं खुद भाजपा की सांसद ने कही है।फिर यह किसी छोटे जिले का मामला नही है। यह बात राज्य की राजधानी से जुड़ी है।

देखना यह होगा कि मुख्यमंत्री अब क्या कदम उठाते हैं।झाबुआ की तरह कुछ और पुलिस अफसरों को निलंबित करते हैं या फिर अपनी सांसद से सवाल करेंगे।

मामला इतना गंभीर है कि यह मुख्यमंत्री के राजनैतिक कैरियर को भी प्रभावित कर सकता है। अब शिवराज सिंह की प्रतिक्रिया देखनी होगी।

कुछ भी हो अपना एमपी बहुतै गज्जब है।यहां विपक्ष का काम भी अपने ही लोग कर रहे हैं।पहले ऐसा कांग्रेस में हुआ करता था।लगता है कि कांग्रेसियों को अपनाते अपनाते भाजपा भी "कांग्रेस" जैसी ही हो गई है।

अरुण दीक्षित
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