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मध्यप्रदेश: 4 उपचुनाव में 14 मंत्री संभालेंगे मोर्चा, शिवराज चाहते हैं-अब कोई हार न हो

मध्यप्रदेश: 4 उपचुनाव में 14 मंत्री संभालेंगे मोर्चा, शिवराज चाहते हैं-अब कोई हार न हो
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भोपाल।दमोह विधानसभा उपचुनाव में करारी हार के बाद मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष विष्णुदत्त शर्मा आने वाले उपचुनावों में कोई कसर नही छोड़ना चाहते हैं।यही बजह है कि चुनाव की तारीख आने से पहले ही उन्होंने मंत्रियों,सांसदों,विधायकों और पार्टी पदाधिकारियों को चुनाव की जिम्मेदारी सौंप दी है।शिवराज ने यह भी साफ कर दिया है कि अब वे कोई भी उपचुनाव हारना नही चाहते हैं।जीत के लिये वे किसी भी हद तक जाएंगे।इसलिए पहले से ही हर मोर्चे पर तैयारी शुरू कर दी है।उनके कुल 14 मंत्रियों की चुनाव में ड्यूटी लगाई गई है।

उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश में खण्डबा लोकसभा क्षेत्र और जोबट,पृथ्वीपुर व रैगांव विधानसभा क्षेत्रों में उपचुनाव होने हैं।यह सभी सीटें चुने गए जनप्रतिनिधियों की कोरोना के दौरान मृत्यु के कारण खाली हुई हैं।हालांकि अभी तक चुनाव आयोग ने इनके लिए कोई तारीख घोषित नही की है।लेकिन दमोह में भारी अंतर से हारी भाजपा ने अपनी कमर कस ली है।

चुनावी तैयारियों को लेकर रविवार को प्रदेश भाजपा कार्यालय में एक महत्वपूर्ण बैठक हुई।इस बैठक में राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री शिवप्रकाश और प्रदेश प्रभारी पी मुरलीधर राव भी मौजूद थे।

बैठक में मौजूद एक वरिष्ठ नेता के मुताविक मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने दमोह हार का जिक्र किया।उन्होंने कहा कि जिन चुनावों से सरकार की सेहत पर असर नही पड़ता है वे ज्यादा कठिन होते हैं।स्थानीय स्तर पर बहुत से ऐसे मुद्दे होते हैं जो असर डालते हैं।इन चुनावों में संगठन जुटता है।सरकार की ज्यादा भूमिका नही रहती।

लेकिन आने वाले उपचुनाव में इस बात का ध्यान रखें कि राज्य में सरकार भाजपा की है।इसका ज्यादा से ज्यादा उपयोग कैसे किया जा सकता है।इस बारे में सोचें। सुविधाओं और व्यवस्था का भरपूर इस्तेमाल करें।

उन्होंने यह भी कहा कि इन उपचुनावों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम और राज्य सरकार के काम की ही चर्चा करना है।इस बैठक में शिवप्रकाश ने चुनाव मैनेजमेंट के गुर बताये।साथ ही कहा कि इन इलाकों में सरकारी काम ज्यादा से ज्यादा कराए जायँ।

इसी बैठक में शिवराज सरकार के 14 मंत्रियों के अलाबा 3 सांसदों और विधायकों सहित कुल 26 प्रदेश पदाधिकारियों की चुनाव में ड्यूटी लगाई गई है।गणित के हिसाब से देखें तो एक क्षेत्र में कम से कम तीन मंत्रियों के साथ करीब 7 पदाधिकारी मौजूद रहेंगे।जिन मंत्रियों को जिम्मा दिया गया है उनके नाम हैं-जगदीश देवड़ा,तुलसी सिलाबट,विजय शाह,कमल पटेल,अरविंद भदौरिया, विश्वास सारंग, बिसाहू लाल सिंह,प्रेम सिंह पटेल,इंदर परमार,मोहन यादव, उषा ठाकुर,रामखेलाबन पटेल,भारत सिंह कुशवाह और बृजेन्द्र प्रताप सिंह।

जिस तरह की बात मुख्यमंत्री ने कही है उससे यह तो साफ है कि वे अपनी सरकार को पूरी ताकत से उपचुनाव में झोंकेंगे।क्योंकि अब ये चुनाव उनकी प्रतिष्ठा का प्रश्न बन चुके हैं। हालांकि दमोह में भी उन्होंने यही सब किया था।कोरोना काल में हुए उस उपचुनाव में उन्होंने हर दांव आजमाया था लेकिन दमोह की जनता ने दलबदलू भाजपा प्रत्याशी को वोट नही दिए थे।इस हार से शिवराज की बहुत किरकिरी हुई थी।

इधर भाजपा ने अपनी तैयारी शुरू कर दी है उधर देश में नेतृत्व के संकट से जूझ रही कांग्रेस अभी तक प्राथमिक तैयारियों में ही उलझी है। माना यह भी जा रहा है कि इन उपचुनावों में बंगाल के विधानसभा और उत्तरप्रदेश के जिला पंचायत चुनावों की झलक देखने को मिलेगी।यह मध्यप्रदेश के लिए नई शुरुआत होगी।

यहां यह भी बताना जरूरी है कि 2018 के विधानसभा चुनाव में शिवराज के नेतृत्व में लड़ी भाजपा चुनाव हार गई थी।लेकिन करीब 15 महीने बाद ही कांग्रेस के विधायकों ने ज्योतिरादित्य सिंधिया के नेतृत्व में पाला बदल लिया था।जिसके चलते कमलनाथ सरकार गिर गयी थी।कमलनाथ आज भी यह आरोप लगाते हैं कि भाजपा ने कांग्रेस के विधायकों को मोटी कीमत देकर खरीदा था।यह भी साफ है कि इन उपचुनावों से शिवराज सरकार की सेहत पर कोई असर नही पड़ेगा।लेकिन 2023 के लिए एक संदेश जरूर जाएगा।

अरुण दीक्षित
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