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मोदी ने क्यों रखा मादा चीता का नाम आशा? जानें इसे रखने का कारण

मोदी ने क्यों रखा मादा चीता का नाम आशा?  जानें इसे रखने का कारण
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ग्वालियर : नामीबिया से शनिवार को कूनो नेशनल पार्क लाए गए चीतों में से चार वर्ष की मादा चीता को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आशा नाम दिया है। कूनो प्रबंधन के अनुसार यह मादा चीता जल्द ही प्रजनन योग्य हो जाएगी और यहां चीते की वंशवृद्धि होगी। इसीलिए पीएम मोदी ने इसे आशा नाम दिया है। कूनो प्रबंधन का कहना है कि जल्द ही अन्य चीतों के नाम उनके स्वभाव के अनुसार रखे जाएंगे।

अभी और भेजे जाएंगे चीते

लारी मार्कर नामीबिया से भारत तक चीतों को लाने में समन्वय करने वाली चीता संरक्षण कोष की कार्यकारी निदेशक लारी मार्कर ने समाचार एजेंसी एएनआइ से बात करते हुए कहा कि नामीबिया से आने वाले वर्षों में और अधिक चीते भारत भेजे जाएंगे। उन्होंने कहा कि चीतों की आबादी बढ़ाने के लिए और अधिक संख्या में इन्हें लाना होगा। भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच भी इस दिशा में प्रयास जारी है। इस दौरान उन्होंने कहा कि चीते को बचाने का अर्थ है, दुनिया को बदलना। भारत में 70 साल पहले चीते विलुप्त हो गए थे। उनके विलुप्त होने की वजह मानव रहे थे और अब उनका अस्तित्व भी मानव के हाथों में ही है। यह हम सभी पर निर्भर है कि हम जागरूक रहें। हम ही पृथ्वी को, खुद को और चीता को बचा सकते हैं।

चीतों को भारत लाने की अनुमति देने वाले पूर्व चीफ जस्टिस कूनो आए

नामीबिया से चीते आने के बाद श्योपुर के कूनो नेशनल पार्क में सबसे पहले पर्यटक के तौर पर देश के पूर्व चीफ जस्टिस शरद अरविंद बोबड़े पहुंचे। उन्होंने ही अफ्रीका से भारत चीते लाने की योजना पर लगी रोक हटाई थी। श्योपुर जिला प्रशासन का कहना है कि चीतों के क्वारंटाइन अवधि में होने के कारण पूर्व चीफ जस्टिस को बाड़े के पास नहीं जाने दिया गया। चीता देखने के लिए पर्यटकों को दो अक्टूबर तक इंतजार करना होगा।

Shiv Kumar Mishra
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