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आज ही के दिन शिव सेना के संस्थापक बाला साहेब ठाकरे का हुआ था निधन, जानें कार्टूनिस्ट से किंगमेकर बनने का पूरा सफर

उनके राजनीतिक कद का अंदाजा इस बात से लग सकता है कि उनके निधन के बाद पूरा मुंबई बंद हो गया था. अंतिम यात्रा में 2 लाख से ज्यादा लोग शामिल थे.

आज ही के दिन शिव सेना के संस्थापक बाला साहेब ठाकरे का हुआ था निधन, जानें कार्टूनिस्ट से किंगमेकर बनने का पूरा सफर
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आज ही के दिन साल 2012 में शिव सेना के संस्थापक बाला साहेब ठाकरे की मौत हो गई थी जिसकी वजह से बाला साहेब के समर्थकों का हर साल शिवाजी पार्क स्थित बाला साहेब ठाकरे मेमोरियल में जुटना शुरू हो गया.सिर्फ मुंबई से ही नहीं बल्कि दूसरे राज्यों से भी लोग यहां पर उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए आते हैं.बाला साहेब ठाकरे का जन्म 23 जनवरी 1926 को हुआ था. उसके बाद उन्होंने अपने करियर की शुरूआत एक कार्टूनिस्ट के रूप में की.

1966 में बाल ठाकरे ने शिवाजी पार्क में एक नारियल फोड़कर अपने मित्रों के साथ 'शिवसेना' बना ली. शंकर भगवान की नहीं शिवाजी की. बाल ठाकरे की नजर में मराठी ठंडे पड़ गए थे. शिवाजी का वीर मराठा स्वरूप चाहिए था. बाहर के लोगों से निपटने के लिए.फिर एक मीटिंग बुलाई गई लोगों की. संदेशा सब तक पहुंचना जरूरी था. डर था कि कहीं लोग ना आएं 50,000 लोगों का इंतजाम था. 2 लाख पहुंचे. बाल ठाकरे ने अपना पहला भाषण दिया. इसी में क्लियर कर दिया कि 'लोकशाही' नहीं 'ठोकशाही' चलेगी.

सबसे पहले इन दो न्यूजपेपर में छपे कार्टून

बता दें साल था 1996. कार्टूनिस्ट प्रशांत कुलकर्णी एक राजनीतिक हस्ती का इंटरव्यू ले रहे थे. बात शुरू होने से पहले ही प्रशांत से कहा गया कि आपका बनाया ब्रोकन एरो वाला कार्टून अच्छा था. चलो, अब कार्टून की ही बात करते हैं. दरअसल, तारीफ करने वाला शख्स खुद भी एक कार्टूनिस्ट था और उनका नाम था- बालासाहेब ठाकरे.

यह किस्सा बहुत खास है क्योंकि प्रशांत के जिस कार्टून की तारीफ की गई थी, उसका उस समय राजनीतिक तौर पर महत्व बहुत ज्यादा था. दरअसल, पुणे के अलका थिएटर में रमेश किणी की लाश मिली थी और उस समय वह थिएटर में अंग्रेजी फिल्म ब्रोकन एरो (Broken Arrow) देख रहे थे. इस हत्या को लेकर बाल ठाकरे के भतीजे राज ठाकरे पर अंगुलियां उठ रही थी और यह खूब चर्चित हुआ. प्रशांत ने अपने कार्टून में टूटे तीर की नोंक से टपकता खून दिखाया था. उसके साथ लिखा था- ब्रोकन एरो- खलबली मचाने वाला डरावना सिनेमा.

1950 में फ्री प्रेस जर्नल में मशहूर कार्टूनिस्ट आरके लक्ष्मण के साथ काम कर चुके बाल ठाकरे की कहानी एक किंग मेकर की कहानी है. ठाकरे के कार्टून जापान के एक डेली न्यूज पेपर 'द असाही शिंबुन' और 'द न्यूयॉर्क टाइम्स' के संडे एडिशन में छपा करते थे. उनके राजनीतिक कद का अंदाजा इस बात से लग सकता है कि उनके निधन के बाद पूरा मुंबई बंद हो गया था. अंतिम यात्रा में 2 लाख से ज्यादा लोग शामिल थे. 9 भाई-बहनों में सबसे बड़े. मीनाताई ठाकरे से शादी के बाद उन्हें तीन बेटे भी हुए- बिंदुमाधव ठाकरे, जयदेव ठाकरे और उद्धव ठाकरे. उद्धव आज महाराष्ट्र में शिवसेना के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार में मुख्यमंत्री हैं.

Arun Mishra

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Sub-Editor of Special Coverage News
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