Top
Begin typing your search...

लाल किले में हिंसा की राष्ट्रपति ने की निंदा, कहा- गणतंत्र दिवस जैसे पवित्र दिन का अपमान दुर्भाग्यपूर्ण

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के अभिभाषण से संसद के बजट सत्र का आगाज हो रहा है.

लाल किले में हिंसा की राष्ट्रपति ने की निंदा, कहा- गणतंत्र दिवस जैसे पवित्र दिन का अपमान दुर्भाग्यपूर्ण
X
  • Facebook
  • Twitter
  • Whatsapp
  • Telegram
  • Linkedin
  • Print
  • Facebook
  • Twitter
  • Whatsapp
  • Telegram
  • Linkedin
  • Print
  • Facebook
  • Twitter
  • Whatsapp
  • Telegram
  • Linkedin
  • Print

नई दिल्ली : राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के अभिभाषण के साथ संसद का बजट सत्र आज से शुरू हो गया है. 1 फरवरी को केंद्रीय बजट पेश किया जाएगा, जिसे वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण पेश करेंगी. राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के अभिभाषण से सत्र का आगाज हो रहा है. राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने अपने संबोधन में कोरोना काल में सरकार द्वारा किए गए कार्यो को गिनाया. उन्होंने 26 जनवरी को लालकिले में हुई हिंसा की निंदा की तो वहीं केंद्र सरकार के कृषि कानूनों की तारीफ की.

अपने संबोधन की शुरुआत करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि कोरोना महामारी के खिलाफ इस लड़ाई में हमने अनेक देशवासियों को असमय खोया भी है. हम सभी के प्रिय और मेरे पूर्ववर्ती राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का निधन भी कोरोना काल में हुआ. संसद के 6 सदस्य भी कोरोना की वजह से असमय हमें छोड़कर चले गए. मैं सभी के प्रति अपनी विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं.

तिरंगे और गणतंत्र दिवस जैसे पवित्र दिन का अपमान बहुत दुर्भाग्यपूर्ण: राष्ट्रपति

पिछले दिनों हुआ तिरंगे और गणतंत्र दिवस जैसे पवित्र दिन का अपमान बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है, जो संविधान हमें अभिव्यक्ति की आजादी का अधिकार देता है, वही संविधान हमें सिखाता है कि कानून और नियम का भी उतनी ही गंभीरता से पालन करना चाहिए. वर्तमान में इन कानूनों का अमलीकरण देश की सर्वोच्च अदालत ने स्थगित किया हुआ है. मेरी सरकार उच्चतम न्यायालय के निर्णय का पूरा सम्मान करते हुए उसका पालन करेगी. जो संविधान हमें अभिव्यक्ति की आजादी का अधिकार देता है, वही संविधान हमें सिखाता है कि कानून और नियम का भी उतनी ही गंभीरता से पालन करना चाहिए.'

मेरी सरकार यह स्पष्ट करना चाहती है कि तीन नए कृषि कानून बनने से पहले, पुरानी व्यवस्थाओं के तहत जो अधिकार थे तथा जो सुविधाएं थीं, उनमें कहीं कोई कमी नहीं की गई है. बल्कि इन कृषि सुधारों के जरिए सरकार ने किसानों को नई सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ-साथ नए अधिकार भी दिए हैं.

आपको बता दें कि गणतंत्र दिवस के मौके पर किसान संगठनों ने ट्रैक्टर परेड निकाली थी, इस दौरान दिल्ली में जमकर हिंसा हुई थी. इसी बीच लाल किले पर हजारों प्रदर्शनकारी घुसे, वहां पर तोड़फोड़ की. इतना ही नहीं लाल किले के प्राचीर पर निशान साहिब का झंडा फहराया गया, जिसकी काफी निंदा की गई. इसी मसले पर दिल्ली पुलिस की ओर से केस भी दर्ज किया गया है और एक्शन जारी है.

कृषि बिल को बताया अच्छा

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने अपने संबोधन में नए कृषि कानून और उनके खिलाफ जारी आंदोलन का जिक्र किया. राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा कि वर्तमान में कृषि कानूनों का अमलीकरण देश की सर्वोच्च अदालत ने स्थगित किया हुआ है, मेरी सरकार उच्चतम न्यायालय के निर्णय का पूरा सम्मान करते हुए उसका पालन करेगी. राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद बोले, 'मेरी सरकार यह स्पष्ट करना चाहती है कि तीन नए कृषि कानून बनने से पहले, पुरानी व्यवस्थाओं के तहत जो अधिकार थे तथा जो सुविधाएं थीं, उनमें कहीं कोई कमी नहीं की गई है. बल्कि इन कृषि सुधारों के जरिए सरकार ने किसानों को नई सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ-साथ नए अधिकार भी दिए हैं.'

सरकार ने स्वामीनाथन आयोग की सिफ़ारिशों को लागू किया: राष्ट्रपति

मेरी सरकार ने स्वामीनाथन आयोग की सिफ़ारिशों को लागू करते हुए लागत से डेढ़ गुना MSP देने का फैसला भी किया था. मेरी सरकार आज न सिर्फ MSP पर रिकॉर्ड मात्रा में खरीद कर रही है बल्कि खरीद केंद्रों की संख्या को भी बढ़ा रही है.

दुनिया का सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान भारत में चल रहा है: राष्ट्रपति

हमारे लिए गर्व की बात है कि आज भारत दुनिया का सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान चला रहा है. इस प्रोग्राम की दोनों वैक्सीन भारत में निर्मित हैं. संकट के समय में भारत ने मानवता के प्रति अपने दायित्व का निर्वहन करते हुए अनेक देशों को कोरोना वैक्सीन की लाखों खुराक उपलब्ध कराई हैं.

सरकार की प्राथमिकताओं में ये छोटे और सीमांत किसान भी: राष्ट्रपति

समय की मांग है कि कृषि क्षेत्र में हमारे जो छोटे और सीमांत किसान हैं, जिनके पास सिर्फ एक या दो हेक्टेयर जमीन होती है, उन पर विशेष ध्यान दिया जाए. देश के सभी किसानों में से 80 प्रतिशत से ज्यादा ये छोटे किसान ही हैं और इनकी संख्या 10 करोड़ से ज्यादा है.

मेरी सरकार की प्राथमिकताओं में ये छोटे और सीमांत किसान भी हैं. ऐसे किसानों के छोटे-छोटे खर्च में सहयोग करने के लिए पीएम किसान सम्मान निधि के जरिए उनके खातों में लगभग 1,13,000 करोड़ से अधिक रुपए सीधे ट्रांसफर किए जा चुके हैं.


Arun Mishra

About author
Sub-Editor of Special Coverage News
Next Story
Share it