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Ghaziabad News : गाजियाबाद में मिला ब्लैक और व्हाइट फंगस का पहला केस

ब्लैक फंगस आंख और ब्रेन को सबसे ज्यादा प्रभावित करता है, जबकि व्हाइट फंगस आसानी से लंग्स, किडनी, आंत, पेट और नाखूनों को प्रभावित करता है.

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First case of black and white fungus found in Ghaziabad: गाजियाबाद में ब्लैक और व्हाइट फंगस का पहला केस सामने आया है. कोविड-19 की नई लहर के खतरे के बीच अब इस केस ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है. जबकि इस समय चीन, अमेरिका और जापान समेत कई देशों में कोरोना कहर मचा रहा है तो अब भारत में भी इसका असर दिखना शुरू हो गया है.

ब्लैक फंगस कोरोना के उन मरीजों में पाया जाता है, जिन्हें बहुत ज्यादा स्टेरॉयड दिए गए हों, जबकि व्हाइट फंगस के केस उन मरीजों में भी संभव हैं, जिन्हें कोरोना नहीं हुआ. ब्लैक फंगस आंख और ब्रेन को सबसे ज्यादा प्रभावित करता है, जबकि व्हाइट फंगस आसानी से लंग्स, किडनी, आंत, पेट और नाखूनों को प्रभावित करता है.

इसके अलावा ब्लैक फंगस ज्यादा डेथ रेट के लिए जाना जाता है. इस बीमारी में डेथ रेट 50% के आसपास है. यानी हर दो में से एक व्यक्ति की जान जाने का खतरा है. लेकिन व्हाइट फंगस में डेथ रेट को लेकर अभी तक कोई आंकड़ा मौजूद नहीं है.

डॉक्टर कहते हैं कि व्हाइट फंगस एक आम फंगस है जो कोरोना महामारी से पहले भी लोगों को होता था. वाराणसी के विट्रो रेटिना सर्जन डॉ. क्षितिज आदित्य बताते हैं कि 'ये कोई नई बीमारी नहीं है. क्योंकि जिन लोगों की इम्युनिटी बहुत ज्यादा कम होती है, उनमें ऐसी बीमारी हो सकती है.

ब्लैक फंगस यानी म्युकरमाइकोसिस एक अलग प्रजाति का फंगस है, ये भी ऐसे ही मरीजों को हो रहा है, जिनकी इम्युनिटी कम है. ब्लैक फंगस नाक से शरीर में आता है और आंख और ब्रेन को प्रभावित करता है. लेकिन व्हाइट फंगस यानी कैनडिडा अगर एक बार खून में आ जाए तो वो खून के जरिए ब्रेन, हार्ट, किडनी, हड्डियों समेत सभी अंगों में फैल सकता है. इसलिए ये काफी खतरनाक फंगस माना जाता है.'

Shiv Kumar Mishra
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